ज्योतिष समाधान

Tuesday, 12 January 2021

भागवत कथा पूजन सामग्री पर्णकुटी


Friday, 1 December 2017

भागवत कथा के लिए आवश्यक पूजन सामग्री

पूजन सामग्री लिस्ट सभी प्रकार की जटिल समस्याओ के समाधान हेतु   शीघ्र सम्पर्क करे
एबम  अपनी कुंडली दिखाकर  उचित मार्ग दर्शन प्राप्त करे । 

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1】हल्दीः-------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------10गोले
३】धूप बत्ती-------------     3पैकिट
४】कपूर-----------------   50 ग्राम
५】पीला चंदन--------   100 ग्राम
६】चंदन पेस्ट -------------- 50 ग्राम
७】यज्ञोपवीत ----------   02बंडल 
८】चावल----- 10किलो  (1 किलो साबुत )
९】अबीर-------------------50 ग्राम
१०】गुलाल, -----------------10 0ग्राम
११】अभ्रक-----------
१२】सिंदूर ------------100 ग्राम
१३】रोली, --------------100ग्राम
१४】सुपारी, ( बड़ी)--------  200 ग्राम
१५】नारियल -------------  51नग्
१६】सरसो---------------50 ग्राम
१७】पंच मेवा--------------100 ग्राम
१८】शहद (मधु)----------- 50 ग्राम
१९】शकर----------------0 1 किलो
२०】घृत (शुद्ध घी)--------  02किलो
२१】इलायची (छोटी)-----------10ग्राम
२२】लौंग --------------10ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२४】रंग लाल----------------20ग्राम
२५】रंग काला --------------20ग्राम
२६】रंग हरा -------------20ग्राम
२७】रंग पिला ------------20ग्राम
२८】तेल तीली का---------- 02 किलो
२९】अगरबत्ती--------------2 पैकिट
      पंचमेवा अलग अलग कुल 200 ग्राम
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३०】सप्तमृत्तिका
1】 हाथी के स्थान की मिट्टि------50ग्राम
२】घोड़ा बांदने के स्थान की मिटटी--50ग्राम
३】बॉबी की मिटटी---------------------50ग्राम
४】दीमक की मिटटी-------------------50ग्राम
५】नदी संगम की मिटटी---------------50ग्राम
६】तालाब की मिटटी-------------------50ग्राम
७】गौ शाला की मिटटी-----------------50ग्राम राज द्वार की मिटटी-----------------------50ग्राम ============================
३१】पंचगव्य
१】 गाय का गोबर ----------50 ग्राम
२】गौ मूत्र-------------------50ग्राम
३】गौ घृत-------------------50ग्राम
4】गाय दूध-----------------50ग्राम
५】गाय का दही --------------50ग्राम =============================
३२】सप्त धान्य-कुलबजन------100ग्राम
१】 जौ-----------
२】गेहूँ-
३】चावल-
४】तिल-
५】काँगनी-
६】उड़द-
७】मूँग =============================
३३】कुशा
३४】दूर्वा
35】पुष्प कई प्रकार के
३६】गंगाजल
३७】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो


38】पंच पल्लव
१】बड़,
२】 गूलर,
३】पीपल,
४】आम
५】पाकर के पत्ते)
6)सात गांठ का बॉस 1 नग
=============================
३९】बिल्वपत्र
४०】शमीपत्र
४१】सर्वऔषधि
४२】अर्पित करने हेतु पुरुष बस्त्र
४३】सोभाग्यवस्त्र  स्त्री

44】जल कलश मिट्टी के अनुमानित


४५】      बस्त्र
१】सफेद कपड़ा 03मीटर)
२】लाल कपड़ा (2मीटर)
३】काला कपड़ा 2मीटर)
४】हरा कपड़ा 2मीटर)
5)पीला कपड़ा  03 मीटर)
    पोथी के लिए  छींट कपड़ा रेशमी 

४६】

४७】दीपक
४८】तुलसी दल
४८】केले के पत्ते (यदि उपलब्ध हों तो खंभे सहित) 

49】बन्दनवार
50】पान के पत्ते ------------11 नग
51】रुई
५२】भस्म
53】ध्वजालाल-1
         पचरंगा -1
सभी देवताओं के झन्डे  (अहुत, गोड़,  आदि )

54】प्रसाद(अनुमानित) प्रति दिन के लिए परमल  आदी 

55] व्यास पीठ के लिये सफेद चादर  2

56]लौड़  2

(57) 7गांठ का बांस का डंडा 
============================

55】    ब्राहम्णो  के   लिए  उनके लिए नित्य उपयोगी सामान ================================= सावुन नहाने के----------07
सावुन कपड़े धोने के -------07
सर्फ कपडे धोने का --------02किलो
मंजन ------------------100ग्राम
तेल ----खोपरा 100ग्राम


56】========ब्राह्मण बरण सामग्री=======
1】धोती 

२】दुपट्टा 

३】आंगोछा 

४】आसन 

५】माला 

६】गौमुखी 

७】लोटा 

८】पंचपात्र 

९】चमची 

१०】तष्टा 

११】अर्घा 

१२】 डाभ अंगूठी =============================

५७】===नवग्रह समिधा=======


१】आक २】 छोला ३】खैर ४】आंधी झाड़ा ५】पीपल ६】उमर(गूलर) ७】शमी ८】दूर्वा ९】कुशा

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अगर कलश यात्रा होगी तो     मिट्टी के कलश  अनुमानित 

अनुमानित - 
      अनुमानित नरियल



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संपर्क -किसी भी प्रकार की पूजा जैसे - सतचण्डीपाठ ,नवरात्रिपाठ  ,महामृत्यंजय , वास्तु पूजन, ग्रह प्रवेश  ,श्री मदभागवत कथा, श्री राम कथा , करवाने हेतु एबम ज्योतिष द्वारा समाधान,आदि की  जानकारी के लिए ××××××××××××××××××××××××××××××
संपर्क सूत्र पंडित -परमेश्वर दयाल शास्त्री (मधुसुदनगड़) 09893397835 =============================
पंडित-भुबनेश्वर दयाल शास्त्री (पर्णकुटी गुना) 09893946810 ============================
पंडित -घनश्याम शास्त्री(मधुसुदंगड़) 09893983084 =============================
विशेष संपर्क
कस्तूरवा नगर पर्णकुटी आश्रम
गुना ऐ -बी रोड दा होटल सारा के सामने 09893946810

Wednesday, 11 November 2020

धनतेरस पूजा, धनत्रयोदशी पूजा 02 नबम्बर 2021


धनत्रयोदशी या धनतेरस के दौरान लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए 
जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है 
और लगभग २ घण्टे २४ मिनट तक रहता है।

धनतेरस पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं 
क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं। 
धनतेरस पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है 
जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है। 
ऐसा माना जाता है कि 
अगर स्थिर लग्न के दौरान धनतेरस पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है। 
इसीलिए धनतेरस पूजन के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है। 
वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है

मुख्य दरवाजे के बाहर गेहूँ से ढेरी बनाकर उसके ऊपर दीपक को रखना है । 
दीपक को रखने से पहले प्रज्वलित कर लें और दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए निम्मलिखित मन्त्र का उच्चारण करते हुए चार मुँह के दीपक को गेहूँ आदि की ढेरी के ऊपर रख दें ।

“मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीतयामिति।।

”धन तेरस पर यमदीपदान का महत्व

 :-धर्मशास्त्रों में भी उल्लेखित है-

"कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे।
मदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति।।"

अर्थात-कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्युका भय समाप्त होता है।
 
धनतेरस पूजा के लिए हम यथार्थ समय उपलब्ध कराते हैं। 
हमारे दर्शाये गए मुहूर्त के समय में 
त्रयोदशी तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न सम्मिलित होते हैं।

Gurudev 
Bhubneshwar 
Parnkuti  guna( m.p)
9893946810 

Tuesday, 3 November 2020

लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 04नबम्बर 2021सम्पर्क सूत्र 9893946810

लक्ष्मी पूजा को 
प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिये, 
जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है 
और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है।
कुछ स्त्रोत लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशिता काल का सुझाव भी देते हैं। 
हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों, जो इस विशेष समय के दौरान लक्ष्मी पूजा के बारे में अधिक जानते हैं, 
के लिए अधिक उपयुक्त होता है। 
सामान्य लोगों के लिए प्रदोष काल मुहूर्त ही उपयुक्त है।
लक्ष्मी पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं,
क्यूँकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं। लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान ही होता है,
जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है। 
ऐसा माना जाता है, कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये 
तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है। 
इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। 
वृषभ लग्न को स्थिर माना जाता है
और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होते है 
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लक्ष्मी पूजा के लिये स्थिर लग्न 

 प्रात:
वृश्चिक लग्न :07:29 से 09 :46 तक 
मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज में पूजा होती है. राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.

व्यापारियों के लिए शुभ मुहूर्त

व्यापारिक प्रतिष्ठानों में व्यापार में प्रयोग किए जाने वाले कल, पुर्जे, गद्दी, लक्ष्मी कुबेरादि सरस्वती पूजन हेतु शुभ मुहूर्त 
प्रालेपन गादी स्थापना-स्याही भरना-कलम दवात सबारने के लिये  ब्र्श्चीक लग्न मे कर सकते है 
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कुम्भ लग्न :दोपहार 01:36 से 3:07 तक 

यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है. जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है, जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है. उनको इस लग्न मे पूजा करना चाहीए
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वृषभ लग्न  :शाम:06:15 से रात्रि 08:13 तक

दीपावली के दिन शाम का समय होता है. यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.
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सिंह लग्न – मध्य रात्रि 12:44 से 2:44 तक 

दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. 
संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.
महानिशिता काल में तांत्रिक और पंडित लोग पूजा करते है, 
ये वे लोग होते है, जिन्हें लक्ष्मी पूजा के बारे में अच्छे से जानकारी होती है.

 लक्ष्मी पूजा के लिए हम यथार्थ समय उपलब्ध कराते हैं।
 हमारे दर्शाये गए मुहूर्त के समय में
 अमावस्या, प्रदोष काल और स्थिर लग्न सम्मिलित होते हैं। 
हम स्थान के अनुसार मुहूर्त उपलब्ध कराते हैं, इसीलिए आपको लक्ष्मी पूजा का शुभ समय देखने से पहले अपने शहर का चयन कर लेना चाहिये।
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04 नबम्बर 2021

व्यापारियों के चोघड़िया मूहूर्त

दिन का चोघड़िया मुहूर्त 

शुभ=प्रात:        06:14 - 08:53=शुभ
चर =दोपहर       10:59 से- 12:21 =शुभ
अभिजित =दोपहर 11:59 से 12:43 
लाभ=दोपहार   12:21=से - 01:30 =शुभ
शुभ=शाम =4:28 से 05:50 =शुभ
गौ धूली बेला ऐबं प्रदोष बेला =05:50 से 08:27 तक 
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अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 
04 नवम्बर  2021 को
प्रात:  06:03 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त -
 05 नवम्बर  2021 को 
रात्रि02:44  बजे

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यह मुहूर्त निर्णय सागर पंचांग द्वारा  तैयार किया गया है 
हमारे यहा दीपावली पूजन ऐबं लक्ष्मी जी के अर्चन के लिये  सम्पर्क करे 

सम्पर्क सूत्र 
Gurudev
 bhubneshwar 
Parnkuti guna 
9893946810/ 9893983084 

Monday, 2 November 2020

दीपावली पूजन मुहूर्त 14 नबम्बर 2020

लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिये,
जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है
और लगभग 2 घण्टे 24 मिनट तक रहता है।
कुछ स्त्रोत लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशिता काल का सुझाव भी देते हैं।
हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों, जो इस विशेष समय के दौरान लक्ष्मी पूजा के बारे में अधिक जानते हैं,
के लिए अधिक उपयुक्त होता है।
सामान्य लोगों के लिए प्रदोष काल मुहूर्त ही उपयुक्त है।

लक्ष्मी पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं,
क्यूँकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं। लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान ही होता है,
जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है।
ऐसा माना जाता है, कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये
तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है।
इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
वृषभ लग्न को स्थिर माना जाता है
और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होते है 
यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है. 

वृश्चिक लग्न में 
मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज में पूजा होती है. राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.

कुम्भ लग्न – यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है. जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है, जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है. उनको इस लग्न मे पूजा करना चाहीए

वृषभ लग्न – यह दिवाली के दिन शाम का समय होता है. यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.

सिम्हा लग्न – यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.

महानिशिता काल में तांत्रिक और पंडित लोग पूजा करते है, ये वे लोग होते है, जिन्हें लक्ष्मी पूजा के बारे में अच्छे से जानकारी होती है.

 लक्ष्मी पूजा के लिए हम यथार्थ समय उपलब्ध कराते हैं।
 हमारे दर्शाये गए मुहूर्त के समय में अमावस्या, प्रदोष काल और स्थिर लग्न सम्मिलित होते हैं। 
हम स्थान के अनुसार मुहूर्त उपलब्ध कराते हैं, इसीलिए आपको लक्ष्मी पूजा का शुभ समय देखने से पहले अपने शहर का चयन कर लेना चाहिये।

धनतेरस पूजा 
शुक्रवार, नवम्बर 13, 2020 पर

धनतेरस पूजा मुहूर्त - 
शाम 05:34  से शाम 05:59 


यम दीपम 
शुक्रवार, नवम्बर 13, 2020 को

प्रदोष काल -
शाम  05:34 से रात्रि 08:11 

लग्न अनुसार वृषभ काल
शाम 05:39  से शाम 07:36 

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ - 
नवम्बर 12, 2020 को शाम 09:30 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त -
 नवम्बर 13, 2020 को शाम 05:59  बजे
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दीपावली ऐबं श्री महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त 

14 नबम्बर 2020

व्यापारियों के लिए शुभ मुहूर्त

व्यापारिक प्रतिष्ठानों में व्यापार में प्रयोग किए जाने वाले कल, पुर्जे, गद्दी, लक्ष्मी कुबेरादि सरस्वती पूजन हेतु शुभ मुहूर्त 
प्रालेपन गादी स्थापना-स्याही भरना-कलम दवात सबारने हेतु

चोघडिया, दिन का
काल=06:41 - 08:04 =अशुभ
शुभ=08:04 - 09:26। =शुभ
रोग=09:26 - 10:49 =अशुभ
उद्वेग=10:49 - 12:11 =अशुभ
चर=12:11 - 13:34। = शुभ
लाभ=01:34 - 02:56 =शुभ
अमृत=02:56 - 04:19 =शुभ
काल=04:19 - 05:41=अशुभ



प्रदोष काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा 
शनिवार, नवम्बर 14, 2020 पर

गोधुली बेला
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 
शाम :05:35  से शाम 07:32 

प्रदोष काल -
शाम 05:34  से शाम 08:11 

वृषभ काल - 
शाम 05:35 से शाम  07:32 

अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 
नवम्बर 14, 2020 को
दोपहर  02:17 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त -
 नवम्बर 15, 2020 को 
प्रात:10:36  बजे



चौघड़िया पूजा मुहूर्त रात्रि

चोघडिया, रात
लाभ=05:41 - 07:19 =शुभ
उद्वेग=07:19 - 08:56 =अशुभ
शुभ=08:56 - 10:34।    =शुभ
अमृत=10:34 - 12:12।  =शुभ
चर=12:12- 01:49।       =शुभ
रोग=01:49 - 02 :27। =अशुभ
काल=04:27* - 05:04*=अशुभ
लाभ=05:04* - 06:42* =शुभ

(रात्रि )निशिता काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 14/15 को
रात्रि: 12:03 से रात्रि 12:32
नवम्बर 15

निशिता काल -
रात्रि: 11:39 से रात्रि 12:32
नवम्बर 15
सिंह लग्न -
रात्रि 12:03 से रात्रि 02:17
नवम्बर 15

सम्पर्क सूत्र 
Gurudev
 bhubneshwar 
Parnkuti guna 
9893946810

Thursday, 22 October 2020

दुर्गा हवन सामग्री श्लोक संख्या सहित कौन से श्लोक पर किस ओषधि का हवन करना है केवल ब्राह्मणों के उपयोगार्थ लिंक ओपन करे हमसे सम्पर्क :9893946810


नवरात्रि हवन सामग्री श्लोक संख्या सहित कई कौन से श्लोक पर किस ओषधि का हवन करना है केवल ब्राह्मणों के उपयोगार्थ लिंक ओपन करे

श्लोक सँख्या   ///******///
1   पत्र पुष्प, फल,
2 अर्क
3 अर्क
5 अपामार्ग
6 कुशा
7 खैर
10 त्रण कुशा दूर्वा
20 पत्र पुष्प फल
26 पत्र पुष्प फल
29 पत्र पुष्प फल
35 पत्र पुष्प फल
39 पत्र पुष्प फल
46पत्र पुष्प फल
51 यव तंडुल
55 इलायची
56 शकर
59 पत्र पुष्प फल
63 पत्र पुष्प फल
66 मिश्री पुष्प
67 पीपल पत्ता कमल गट्टा
68 उडद राल समुद्र फेन
69कमल गट्टा
70 कमल गट्टा
71पत्र पुष्प फल
72 हल्दी
73पुष्प
74दूर्वा दर्भा
75 मिश्री
77 राई
78 राई
79 लाजा  पुष्प मिश्री शहदेवी
80 हवन नही
83 राई
84जाय फल  भांग
87 भांग
88पत्र पुष्प फल
89 कमल गट्टा
92 रक्त गुंजा
94 राई
96 पत्र पुष्प फल
100 कपूर
101 कमलगट्टा दर्भा
102 पत्र पुष्प फल
103 कुशा शंख  पुष्पी गूगल पान  मधु केला
104 पुष्प
महाहुति "","पान कैथ मधु कमल गट्टा गूगल गंधक्षत पुष्प लोंग इलायची सुपाड़ी
=================================

               दूसरा अध्याय

श्लोक सँख्या ///******///
1 पत्र पुष्प, फल,
2 अर्क
3 अर्क
5 अपामार्ग
6 कुशा
7 खैर
10 त्रण कुशा दूर्वा
20 पत्र पुष्प फल
26 पत्र पुष्प फल
29 पत्र पुष्प फल
35 पत्र पुष्प फल
39 पत्र पुष्प फल
46पत्र पुष्प फल
51 यव तंडुल
55 इलायची
56 शकर
59 पत्र पुष्प फल
63 पत्र पुष्प फल
66 मिश्री पुष्प
67 पीपल पत्ता कमल गट्टा
68 उडद राल समुद्र फेन
69कमल गट्टा
70 कमल गट्टा
71पत्र पुष्प फल
72 हल्दी
73पुष्प
74दूर्वा दर्भा
75 मिश्री
77 राई
78 राई
79 लाजा पुष्प मिश्री शहदेवी
80 हवन नही
83 राई
84जाय फल भांग
87 भांग
88पत्र पुष्प फल
89 कमल गट्टा
92 रक्त गुंजा
94 राई
96 पत्र पुष्प फल
100 कपूर
101 कमलगट्टा दर्भा
102 पत्र पुष्प फल
103 कुशा शंख पुष्पी गूगल पान मधु केला
104 पुष्प
महाहुति "","पान कैथ मधु कमल गट्टा गूगल गंधक्षत पुष्प लोंग इलायची सुपाड़ी
=================================

               दूसरा अध्याय

""""""""","''''''':::::::::::""""""""""''''''''**********

1 पत्र पुष्प फल
2 भैंसा गूगल
10 नीम गिलोय जाय फल
12 कपूर
14 जाटा मासी  विष्णु कांता
15आम्र फल
17 कपूर
18 रक्त चंदन
20 लोंग
21 शंख पुष्पी
22 लोंग
25 पुष्प
28 कपूर पुष्प
29 पुष्प कमल गट्टा
30 मधु
57 हरताल
60 सरसो
63 कटहल
67 दर्भा कपूर राई
69 पुष्प गूगल विल्वफल

महाहुति """"","",पान शाकल्य  कमल गट्टा  गूगल नारियल फल खंड  पुष्प  लोंग  इलायची सुपाड़ी

:::      ::::  ::::::::::;;;         ::::::::: :;: ;;;;;;;;;    ;;
     तीसरा अध्याय
1पत्र पुष्प फल
9 दर्पण कपूर
10 लोंग कागजी नीबू
12 मैनसिल
17 मैनसिल
19 लोंग
20 सरसों
25 खिरनी
27 सिंघाड़ा
29 हरताल
34 पान गुड़ दूध शहद
36 वच राजान
37 पत्र पुष्प फल
38  मधुआसव पत्र पुष्प फल
39 पत्र पुष्प फल
40 सरसो गोखुरु
42 कालीमिर्च उडद लोकी
44 पत्र पुष्प गुलाल पान सुपारी
  महा आहुति """""""पान विजोरानीबू चंदन दधि नीम गिलोय  माष (उडद दही मिलाकर ) भैसा गूगल  कमल गट्टा  लोंग इलायची सुपारी पत्र पुष्प फल

::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
चौथा अध्याय :::::::
3 कदली फल
5 विष्णु कांता विल्वफल
7 विल्व फल
8 हलुआ पकवान  श्वेत चंदन
11 ब्राह्मी कपूर
12 विजोरा
14 लाल कनेर पुष्प
23 कमल गट्टा  लाल कनेर सीताफल
24 से  हवन नही होगा
27 तक हवन नही होगा
28 पत्र पुष्प फल
29 पुष्प लाल चंदन हरिद्रा सुगंधित द्रव्य
30 अष्टांग धूप गूगल
31 पत्र पुष्प फल
33 पत्र पुष्प फल
34 राई  गूगल
35 गूगल जाय फल
36 पंचमेवा खीर गुलकंद  मिश्री पुष्प फल
37 पत्र पुष्प फल 
39 पुष्प
41 भोजपत्र  रक्तनीर 
42 पुष्प आंवला  मधु  धूप
महआहुति :::::     पान शाकल्य खीर कमल गट्टा विल्वफल लोंग इलायची गूगल पुष्प सुपारी

::::: :::::::::: :::::: ::::::; :::::::: :::::::: ::::: ::::;: ::::: :::::
1 पत्र पुष्प फल
6 पत्र पुष्प फल
8 पत्रपुष्प फल
9 पत्र पुष्प फल  गूगल भोज पत्र 
10 हल्दी  आंवला
11 पुष्प
12 दूर्वा
13 दारू हल्दी
14 से 16तक  विष्णु कांता
17 से  19 तक आंवला
20 से 22 तक ब्राह्मी
23 से 25  तक हल्दी ब नीम गिलोय
29 से 31 तक सतावरी
32 से 34 तक सोंठ  जाय फल
44 से 46 तक   लाजा पुष्प
47 से 49 तक पुष्प
50 से 52 तक पुष्प
53 से 55 तक  अबीर
56 से 58 तक  मिश्री विल्वफल कमल गट्टा
59 से 61 तक शहद  पुष्प
62 से 64 तक  ब्राह्मी विजया
65 से 67 तक सहदेवी
68 से 70 तक पकवान
71 से 73 तक  केसर लाल कनेर
81 मिश्री इलायची
82 गूगल
83 पत्र पुष्प फल
84 जावित्री
85 दाल चीनी
86 भोज पत्र 
87 भोजपत्र दालचीनी
88 दारू हल्दी  पुष्प
89 आम्र फल
92 कपूर
94 पुष्प विल्व पत्र
95 गुंजा
96 पुष्प कमलगट्टा
97 भोजपत्र
99 भोजपत्र
101 पत्र पुष्प
104 मैनसिल
105 पत्र पुष्प फल
114 लाजा
115 पत्र पुष्प फल
116 वच पान भोजपत्र शमीपत्र दूर्वा
117  शमी पत्र दूर्वा फल पुष्प कनेर पुष्प
120 लाजा लोंग काजल
121 लाजा खाजा शमीपत्र  हिंगुल
122 पत्र पुष्प फल
126 जटामांसी
127 पान पुष्प फल शमीपत्र
129 ताम्बूल सुपारी गन्ना
महआहुति:::   पान शाकल्य लोंग इलायची सुपारी गूगल कमल गट्टा श्वेत चंदन पुष्प फल विजोरा

:::::/,,,,,,::    ::::::::::::::::::::;;;;;;;;;;;;;;;;;;;!!!!!!!!!!::;;;;;;;;;


छठवा अध्याय :::::::
1पत्र पुष्प फल
4 राई  जटामांसी गूगल
7 मसूर
10 पत्र पुष्प फल
12 पत्र पुष्प फल
13 राल विजोरा गूगल
14 उडद मसूर
17 केसर
18 केसर राई
19 केसर राई
23 राई जटामांसी
24 लोंग कनेर गन्ना
महआहुति ******पान शाकल्य गूगल कमलगट्टा  भोजपत्र कुष्मांड नारंगीफल  नारिकेल फल खंड /

**///***///////****//////*****/////*****/////***
सातवा अध्याय **///*****////***/////
1पत्र पुष्प फल
5 काली हल्दी कस्तूरी काजल
6 काली मिर्च
8 पान रक्त चंदन कुमकुम केसर
12 सरसो
14 हल्दी काली मिर्च
15 गूगल बज्र दंती
19 कपूर बज्र दंती
20 जटा मासी दर्भा सरसो कदली फल
23 विजोरा नीबू
24 गन्ना
25 पत्र पुष्प फल
26 पान पुष्प फल आम्रफल  चिरोंजी
महआहुति ****/////पान शाकल्य लोंग इलायची चिरोंजी लाजवंती पुष्प कमल गट्टा जाय फल कुष्मांड फलखंड कपूर
******///////*****/////******///////****//////आठवाँ अध्याय
1 पत्र पुष्प फल
5 राई
6 राई
8दूर्वा रक्त नीर गूगल
9 दूर्वा रक्त नीर गूगल
10 दूर्वा गूगल काली हल्दी
13 पत्र पुष्प फल
14 गुंजा
15 ब्राह्मी
16 जटामासी
17 मोर पंख
18 विष्णु कांता
19 बज्रदन्ति पत्र
20 गोखरू
21 पुष्प लोंग
28 जटामासी  विजया
29  आमी हल्दी
39 सरसों
43 रक्त गूंजा 
44 रक्त गुंजा
49 लालचन्दन
54 रक्त चंदन रक्त गुंजा
55 रक्त चंदन
57 से 61 तक रक्त चंदन
62 विजोरा नीबू
63 पुष्प
महआहुति****//////पान शाकल्य कमलगट्टा लोंग इलायची  सुपारी गूगल कुष्मांड फलखण्ड लाल चंदन मधु

*/******///////******///////******/////******//

नबम अध्याय ****///////
1पत्र पुष्प फल
2 विजोरा नीबू
4 पत्र पुष्प फल
17 कवीठ/कैथ
20 केसर
31 दूर्वा रक्त नीर
34 लोंग
35 विजोरा नीबू
36 गूगल कण इन्द्र जो
38 मोरपंखी
41 उडद कुष्मांड फलखण्ड गन्ना पान सुपारी बेलगिरी
महआहुति ****////पान शाकल्य लोंग इलायची सुपारी विजोरा कूष्मांडखण्ड इक्षुरखण्ड /गन्ना विल्वफल  मैनफल

*******///////*******////////******/////*****//

/दसवाँ अध्याय **///
1 पत्र पुष्प फल
2 केसर कस्तूरी
4 पान पुष्प फल दूर्वा शमीपत्र
5 रक्त चंदन
6 पान पुष्प फल
7 पुष्प
8 पान पुष्प फल दूर्वा शमीपत्र
9 पुष्प
10 पान पुष्प फल
27 पक्का केला
28 भोजपत्र
31 पुष्प
32 कपूर गूगल कमल गट्टा बटपत्र इन्द्र जो
महआहुति *****/////
पान शाकल्य लोंग इलायची सुपाड़ी  कस्तूरी कमलगट्टा गूगल विल्वफल  कूष्मांडखण्ड फल पुष्प मैनसिल मातुलिंग

******////////******////////******///////*******

ग्यारवा अध्याय ****/////

1 /1से 3 तक पुष्प पत्र फल
3 दूर्वा
5 विष्णु कांता विजोरा नीबू
6 भोजपत्र  मालकांगनी
10 इलायची गूगल जायफल दूर्वा पुष्प फल केसर मिश्री
12 दूर्वा पुष्प गुगल कमलगट्टा
13 कुशा ब्राह्मी
14 कपूर
15 मोरपंखी
16 शंख पुष्पी
17 बज्र दंती
18 गोखरू
19 पुष्प
20 जायफल जटामांसी
21 नीम गिलोय
22 लोंग इलायची गूगल मिश्री
23पान पुष्प
24 लालकनेर दूर्वा फल पुष्प पत्र बहेड़ा
25 बहेड़ा
26 नीम आंवला राई
28 रक्तचन्दन उडद मसूर दही
29 सरसो कालीमिर्च जायफल नीम गिलोय आंवला राई
31भोजपत्र मालकांगनी 
32 हल्दी दर्भा दुर्बा
33 पुष्प मिश्री
35 फल पुष्प
36 दुर्बा पत्र पुष्प फल शमी पत्र
37 लाजा शमीपत्र फल पुष्प फल
38 पान पुष्प फल
39 सरसों कालीमिर्च दालचीनी जायफल
40 दूर्वा पान शमीपत्र
41 सरसों
42 मक्खन
43 जायफल
44 दाड़िम/गुड़हल के पुष्प
45 आनार मजीठ
46 पुष्प पान फल नारंगी
47 इलायची कमल गट्टा
49 पालक पत्र पुष्प फल
50 दूर्वा लाल कनेर पान फल
52 रक्त गुंजा पान पुष्प फल
53 लालकनेर
54 पुष्प फल पान
55 काली मिर्च सरसो गुगल
महआहुति****///// पान लोंग इलायची कपूर  शकर पत्र पुष्प फल कमल गट्टा सुपारी  मिश्री खीर गूगल गन्ना गुड़हल पुष्प फल
******///////*******///////*******//////*****

बारहवा अध्याय ****/////
1 पान शमीपत्र पुष्प फल
2 गूगल दूर्वा आमी हल्दी  नागकेसर
3 दर्भा
4 भोजपत्र
5 गूगल मिश्री
6 हल्दी दूर्वा
8 मिश्री गूगल
9 पान पुष्प मिश्री इलायची मधु
10 गन्ना कुष्मांड खंड फल नारियल खण्ड फल पेड़ा
11 केला गन्ना कुष्मांड खंड फल
12 पान पुष्प फल मिश्री
13 पान पुष्प मिश्री हल्दी खीर फल इलायची
14 दूर्वा
15 दर्भा
17 अर्क पलास शमीपत्र खैर भोजपत्र
18 राई गुगल फूल प्रियंगु  आशापुरी धूप
20 पान पुष्प फल
21 पान पुष्प फल धूप केसर  मिश्री कपूर विजोरा नीबू  पकवान
22 खीर पकवान
23पान पुष्प फल जायफल
25 दर्भा पुष्प भोजपत्र
29 हरताल गूगल पुष्प
30 सरसों गूगल लोंग
31 पान पुष्प फल
32 वच पान पुष्प
33 सर्वोषधि
36 पान पुष्प फल
39 अनार के छिलके
41 गंध पुष्प पान फल मिश्री जाय फल  चन्दन धूप
महआहुति ****/////
अगर केसर कस्तूरी कमल गट्टा पत्र पुष्प फल जाय फल विल्वफल  मिश्री

******/////******/////////*******////////*******

तेरहँवा अध्याय

1 पत्र पुष्प फल
3 विष्णु कांता
5 पान पत्र  पुष्प फल
6 पान पत्र पुष्प फल
9 पुष्प  भोजपत्र
10 पान पुष्प गन्ध धूप फल
11 गन्ना
12 पान पुष्प फल  खोपरा बूरा गुड़
13 पान पुष्प फल दूर्वा शमीपत्र
14 पान पुष्प फल नारियल खंड फल
15 पान पुष्प फल
16 भैंसा गुगल काली मिर्च अशोक पुष्प या पत्र
18 पान पुष्प फल दूर्वा कनेर पुष्प शमीपत्र
19 कमलपुष्प अशोक पुष्प या पत्र
20 सरसो गुगल
22 अर्क कपूर
23 पुष्प फल
24 भोजपत्र
25 पुष्प फल पान
26 पुष्प फल पान
28 पुष्प फल पान
29 अर्क कपूर गंध फल पान सुपारी
महआहुति******//////पान शाकल्य लोंग इलायची सुपारी  विल्वफल गुगल कमल गट्टा फल शमीपत्र श्वेतकेसर कपूर पुष्प अर्क पुष्प  नारियल खंड फल
महआहुति///****

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”वर्ष मासो दिनं लग्नं मुहूर्तश्चेति पञ्चकम्। कालस्यांगानि मुखयानि प्रबलान्युत्तरोतरम्॥ लग्नं दिनभवं हन्ति मुहूर्तः सर्वदूषणम्। तस्मात् शुद्धि मुहूर्तस्य सर्व कार्येषु शस्यते॥” ”वर्ष का दोष श्रेष्ठ मास हर लेता है, मास का दोष श्रेष्ठ दिन हरता है, दिन का दोष श्रेष्ठ लग्न व लग्न का दोष श्रेष्ठ मुहूर्त हर लेता है, अर्थात मुहूर्त श्रेष्ठ होने पर वर्ष, मास, दिन व लग्न के समस्त दोष समाप्त हो जाते हैं।

Gurudev bhuvaneshvar
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मुहूर्त के अनुसार कार्य करने से हानि की संभावना को तो कम किया ही जा सकता है।

तिथि फल - एक गुणा 
नक्षत्र फल - चार गुणा
वार फल - आठ गुणा 
करण फल - सोलह गुणा 
योग फल - बत्तीस गुणा 
तारा फल - एक सौ आठ गुणा 
चंद्र फल - सौ गुणा 
लग्न फल - एक हजार गुणा

—अथर्व वेद जैसे हमारे आदि ग्रंथों में भी शुभ काल के बारे में अनेक निर्देश प्राप्त होते हैं जो जीवन के समस्त पक्षों की शुभता सुनिश्चित करते हैं।

”वर्ष मासो दिनं लग्नं मुहूर्तश्चेति पञ्चकम्। कालस्यांगानि मुखयानि प्रबलान्युत्तरोतरम्॥
लग्नं दिनभवं हन्ति मुहूर्तः सर्वदूषणम्।
तस्मात् शुद्धि मुहूर्तस्य सर्व कार्येषु शस्यते॥”

”वर्ष का दोष श्रेष्ठ मास हर लेता है, मास का दोष श्रेष्ठ दिन हरता है, दिन का दोष श्रेष्ठ लग्न व लग्न का दोष श्रेष्ठ मुहूर्त हर लेता है, अर्थात मुहूर्त श्रेष्ठ होने पर वर्ष, मास, दिन व लग्न के समस्त दोष समाप्त हो जाते हैं।”

इस संसार में समय के अनुरूप प्रयत्न करने पर ही सफलता प्राप्त होती है और समय अनुकूल और शुभ होने पर सफलता शत-प्रतिशत प्राप्त होती है जबकि समय प्रतिकूल और अशुभ होने से सफलता प्राप्त होना असंभव होता है। कहते हैं किसी भी वस्तु या कार्य को प्रारंभ करने में मुहूर्त देखा जाता है, जिससे मन को बड़ा सुकून मिलता है।
हम कोई भी बंगला या भवन निर्मित करें या कोई व्यवसाय करने हेतु कोई सुंदर और भव्य इमारत बनाएं तो सर्वप्रथम हमें ‘मुहूर्त’ को प्राथमिकता देनी होगी।
शुभ तिथि, वार, माह व नक्षत्रों में कोई इमारत बनाना प्रारंभ करने से न केवल किसी भी परिवार को आर्थिक, सामाजिक, मानसिक व शारीरिक फायदे मिलते हैं वरन उस परिवार के सदस्यों में सुख-शांति व स्वास्थ्य की प्राप्ति भी होती है।
यहां शुभ वार, शुभ महीना, शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र भवन निर्मित करते समय इस प्रकार से देखे जाने चाहिए ताकि निर्विघ्न, कोई भी कार्य संपादित हो सके।

देव स्थापना के विशेष लग्न्: स्थाप्यों हिरिर्दिन करो मिथुने महैर्शो।
नारायणश्च युवतौ घटके विधाता।।
देव्यो द्विमृत्तं भवनेषु नि वेशंनीयाः।
क्षुद्राश्चरे स्थिरगृहै निलिखलाश्चः देवाः।।

मिथुन लग्न में विष्णु, महादेव तथा सूर्य की स्थापना करनी चाहिए। कन्या लग्न में कृष्ण की, कुंभ लग्न में ब्रह्मा की, द्विस्वभाव लग्नों में देवियों की स्थापना करनी चाहिए। चार लग्नों में योगिनियों की और स्थिर लग्नों में सर्व देवताओं की स्थापना करना शुभ है।

लिंग स्थापन तु कत्र्तव्यं शिशिरादावृतुत्रये। प्रावृषि स्थापित लिंग भवेद् वरयोगदम्।
हैमंते ज्ञानदं चैव शिशिरे सर्वभूतिदम्।
लक्ष्मीप्रदं वसंते च ग्रीष्मे च लिंगसयारोपणंमतम्।।
यतीनां सर्वकाले च लिंगसयारोपणंमतम्।। श्रेष्ठोत्तरे प्रतिष्ठा स्याउयनेमुक्ति मिच्छताम्।।
दक्षिणे तु मुमुक्षूणां मलमासे न सा द्वयोः।।

माघ, फाल्गुन-वैशाख-ज्येष्ठाषाढेषु पंचसु। प्रतिष्ठा शुभदाप्रोक्ता सर्वसिद्धिः प्रजायते।।

श्रावणे च नभस्ये च लिंग स्थापनमुत्तमम्।
देव्याः माघाश्विने मासेअव्युत्तमा सर्वकामदा।।
माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ तथा आषाढ़ महीनों में शिव जी की प्रतिष्ठा सब प्रकार से सिद्धि देने वाली कही गयी है।

श्रावण महीना भी शुभ है। ऋतुओं की दृष्टि से हेमंत ऋतु में शिव लिंग की स्थापना से यजमान और भक्तों को विशेष ज्ञान की प्राप्ति होती है। शिशिर में शुभ, किंतु बसंत ऋतु में शिव मंदिर की प्रतिष्ठा विशेष धनदायक साबित होती है, जबकि ग्रीष्म ऋतु में यह प्रतिष्ठा शांति, शीतलता और विजयप्रदाता कही गयी है।
इस प्रकार भगवती जगदम्बा की प्रतिष्ठा माघ एवं अश्विन में सर्वश्रेष्ठ फल देने वाली उत्तम कही गयी है।

चैत्रे वा फाल्गुने मासे ज्येष्ठे वा माधवे तथा।
माघे वा सर्वदेवानां प्रतिष्ठा शुभदा सिते।
रिक्तान्य तिथिषु स्यात्सवारे भौमान्यके तथा।।

हेमाद्रि के कथनानुसार
: विष्णु प्रतिष्ठा माघे न भवति।
माघे कर्तुः विनाशः स्यात्।
फाल्गुने शुभदा सिता।।

देवी प्रतिष्ठा मुहूर्तः

सर्व देवताओं की प्रतिष्ठा चैत्र, फाल्गुन, ज्येष्ठ, वैशाख और माघ मास में करना शुभ है।
श्राविणे स्थापयेल्लिंग आश्विनै जगदंबिकाम्। मार्गशीर्ष हरि चैव, सर्वान् पौषेअपि केचन्।। -
मुहूर्तगणपति श्रावण में शंकर की स्थापना करना, आश्विन में जगदंबा की स्थापना करना, मार्गशीर्ष में विष्णु की स्थापना करना और पौष मास में किसी भी देवता की स्थापना करना शुभ है।
हस्त्र, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठ, मूल, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती, अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य, तीनों उत्तरा, रोहिणी एवं मार्गशीर्ष में सभी देवताओं की, खास कर देवी की, प्रतिष्ठा शुभ है।

यद्दिनं यस्य देवस्य तद्दिने संस्थितिः। -
वशिष्ठ संहिता जिस देव की जो तिथि हो, उस दिन उस देव की प्रतिष्ठा करनी चाहिए।

शुक्ल पक्ष की तृतीया, पंचमी, चतुर्थी, षष्ठी, सप्तमी, नवमी, दशमी, द्वादशी, त्रयोदशी एवं पूर्णिमा

तथा कृष्ण पक्ष की अष्टमी एवं चतुर्दशी दैवी कार्य के लिए सब मनोरथों को देने वाली है।

शुक्ल पक्ष में और कृष्ण पक्ष की दसवीं तक प्रतिष्ठा शुभ रहती है।

इसी प्रकार, शनि, रवि और मंगल को छोड़ कर, अन्य सभी वारों में यज्ञ कार्य एवं देव प्रतिष्ठा शुभ कहे गये है।

मंदिर में प्रतिमा की प्रतिष्ठा के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-
शुभ वार- देव प्रतिष्ठा मुहूर्त के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शुभ हैं।
शुभ तिथि- शुक्लपक्ष की 1, 2, 5,10, 13, 15 वीं तिथि शुभ हैं।
मतांतर से कृष्णपक्ष 1, 2, 5वीं तिथि भी शुभ मानी गई है।
शुभ नक्षत्र- पुष्य, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, हस्त, रेवती, रोहिणी, अश्विनी, मूला, श्रवण, धनिष्ठा व पुनर्वसु नक्षत्र शुभ हैं।
इसके अतिरिक्त उत्तरायण के सूर्य में गुरु, शुक्र और मंगल भी बली होना चाहिए।
लग्न शुद्धि- स्थिर व द्विस्वभाव लग्न हो केंद्र व त्रिकोण में शुभ ग्रह एवं 3,6,11वें पाप ग्रह हों।
अष्टम में कोई पाप ग्रह हो।
देवशयन, मलमास, गुरु-शुक्र अस्त व निर्बल चंद्र कदापि नहीं होना चाहिए।
शिवलिंग स्थापना के लिए शिववास भी देखना शुभ होता है।

नवरात्रि मे हवन के लिये श्लोक अनुसार हवन सामग्री हमसे सम्पर्क 9893946810


 समिधा=======
 १】आक
२】 छोला
३】खैर
४】आंधी झाड़ा
५】पीपल
६】उमर(गूलर)
७】शमी
८】दूर्वा
९】कुशा
============================ नवरात्र पूजा के लिए साधारण विशेष आहुतियों के लिए
जैसे हवन सामग्रि
तीली से आधा चावल
चावल से आधा जौ
जैसे तीली 3 किलो तो':
चावल 1 किलो 500 ग्राम
जौ 7500 ग्राम
1=तिली
2=चाबल
3=जौ 
4=शकर 
5=हवन सामग्री पेकीट 
6=कूष्माण्ड खण्ड (पेठा )
7=गोल सुपारी 
8=लौंग 
9=इलायची
10=कमल गट्टे  
11=जायफल 
12=मेनफल  
13=पीली सरसो 
14=पंच मेवा 
15=सिन्दूर 
16=उड़द 
18=शहद 
19=नारियल खण्ड
20=सुखा नारियल गोला
21=गूगल
22=सराई 
23=कपूर
24=पच रंग 
25=केशर
26=लाल चंदन
27=सफेद चंदन
28=सितावर
39=कथ्था (खेर)
40=भोज पत्र 
41=काली मिर्च 
42=मिश्री
43=अनारदाना
44=शकर बूरा 
45=अगर
46=तगर
47=नागर मोथा
48=बालछड
49= छार छवीला 
50=कपूर काचरी 
52=इन्द्र जौ
53 हल्दी 
54=राल  
55=समुद्र फेन 
56=राई काली 
57= इत्र
58=अष्टांग धूप 
59=रक्त नीर 
60=दारु हल्दी
61=सताबरी 
62=लाजा 
63=अवीर 
64=सहदवी
65=जावित्रि 
66=दालचीनी
67=काली हल्दी
68=खाजा 
69=कुंकुम
70=बज्र दन्ती
71=बेल गिरी
72=कस्तूरि
73=मातुलिंग
74=माल्कान्गनी
75=बहेड़ा 
76=मजीठ
77=नाग केशर 
78=प्रियंगू 
79=आशापुरि धूप
80=हरताल
81=सर्व औषधी 
82=धूप
83=खोपरा बूरा
84=गूड़
85=विजया (भाँग)
86=रक्त गुंजा 
87=शंख पुष्पी 
88=आवला 
89= नीम गिलोय 
90= जटा माशी 
91=विष्णू कान्ता 
92=अमचूर (खडा)
93=रक्त चंदन
94=हरताल
95=सरसो पीली 
96=दर्पण
97=मेनसिल 
88=खिरनि
89=बच
90=राजान 
91=मधुआसब 
92=गोखरू
93=भेसा गूगल
94=ब्राह्मी 
============================== घरेलू सामग्री 
1=आम के पत्ते 
2=पीपल के पत्ते
3=बड़ के पत्ते 
4=अशोक के पत्ते 
5=अशोक के फूल
6=अकौआ के पत्ते 
7=शमी के पत्ते 
8=कुशा 
9=दूर्वा 
10= पान के पत्ते
11=अपामार्ग
12= पालक के पत्ते
13=गूड़ हल  के फूल
14= लाल कनेर के फूल
15= नीम गिलोय
16=गन्ना 
17=कैथ फ़ल
19= वील फ़ल
20=कुमड़ा 
21= कटहल
22= कागजी निवू
23= सिन्घाड़ा 
24=विजोरा निवू 
25=केला 
26=अनार
27= मोरपंख
28= नारंगी
29=खाजा
30=मख्खन
31=काजल 
32=आवला
33= पैठा 
34= लाल कपडा चुनरी 
=======================///
सामग्री  की मात्रा अपने हिसाब से लेवे  
×××××××××××××××××××××××××××× संपर्क -किसी भी प्रकार की पूजा जैसे - सतचण्डीपाठ , नवरात्रिपाठ , महामृत्यंजय , वास्तु पूजन, ग्रह प्रवेश , श्री मदभागवत कथा, श्री राम कथा , करवाने हेतु एबम ज्योतिष द्वारा समाधान,आदि की जानकारी के लिए ×××××××××××××××××××××××××××××× संपर्क सूत्र पंडित -परमेश्वर दयाल शास्त्री (मधुसुदनगड़) 09893397835 ============================= पंडित-भुबनेश्वर दयाल शास्त्री (पर्णकुटी गुना) 09893946810 ============================ पंडित -घनश्याम शास्त्री(parnkuti guna ) 09893983084

============================

💐💐💐💐💐विशेष संपर्क👍👍👍💐

कस्तूरवा नगर पर्णकुटी आश्रम 👍
गुना ऐ -बी रोड 👍
दा होटल सारा के सामने 👍
09893946810 ===========

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