ज्योतिष समाधान
Sunday, 28 December 2025
पंचांग
Friday, 19 December 2025
विवाह में वर्जित नक्षत्र
Wednesday, 17 December 2025
गोत्र
Tuesday, 25 November 2025
भूमि पूजन सामग्री
२】कलावा(आंटी)----------01गोले
३ धूप बत्ती-------------- 1 पैकिट
४】कपूर---------------- 10ग्राम
5) कच्चा सूत ------------ 01 छोटा गोला
७】यज्ञोपवीत ------------- 05नग्
८】चावल----------------- 500ग्राम
९】अबीर------------------10ग्राम
१०】गुलाल, ---------------20ग्राम
11) सरसों ------------------10रुपए की
१२】सिंदूर -------------------20ग्राम
१३】रोली, -------------------20 ग्राम
१४】गोल सुपारी, ( बड़ी)--- 50 ग्राम
१५】नारियल ------------ 3 नग्
१६】असली गूगल -----------20 ग्राम
१७】पंच मेवा--------------100 ग्राम
१८】शहद (मधु)------------ 50 ग्राम
१९】शकर-----------------100ग्रांम
२०】घृत (शुद्ध घी)--------- 100 ग्राम
२१】इलायची (छोटी)--------05ग्राम
२२】लौंग -----------------05ग्राम
२३】इत्र की शीशी-------------1 नग्
२4】तांबे का लौटा 01
=============
26】पुष्प
27】हार मोगरा के फूल के 5
28】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो
Monday, 17 November 2025
गृह प्रवेश सामग्री
२】कलावा(आंटी)----------10गोले
३ धूप बत्ती-------------- 1 पैकिट
४】कपूर---------------- 100ग्राम
5) कच्चा सूत ------------ 01 छोटा गोला
७】यज्ञोपवीत ------------- 05नग्
८】चावल----------------- 10किलो ग्राम
९】अबीर------------------10ग्राम
१०】गुलाल, ---------------20ग्राम
11) सरसों ------------------10रुपए की
१२】सिंदूर -------------------50ग्राम
१३】रोली, -------------------20 ग्राम
१४】गोल सुपारी, ( बड़ी)--- 500 ग्राम
१५】नारियल ------------ 15 नग्
१६】असली गूगल -----------20 ग्राम
१७】पंच मेवा--------------100 ग्राम
१८】शहद (मधु)------------ 50 ग्राम
१९】शकर-----------------02किलोग्रांम
२०】घृत (शुद्ध घी)--------- 02किलो ग्राम
२१】इलायची (छोटी)--------05ग्राम
२२】लौंग -----------------05ग्राम
२३】इत्र की शीशी-------------1 नग्
२4】तांबे का लौटा 01
=============
26】पुष्प
27】हार मोगरा के फूल के 5
28】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो
Sunday, 16 November 2025
विबाह के लिए लगने वाली आबश्यक सामग्री लिस्ट
पर्णकुटी ज्योतिष केंद्र
विबाह के लिए लगने वाली आबश्यक सामग्री लिस्ट
------ //-- ( पीली चिट्टी पूजा के लिए )--- //--------
१】श्री गणेश जी
२】पांच हल्दी की गाँठ
३】पांच गोलसुपारि
४】 पिले चावल
५】गोबर के गणेश जी
६】बतासे
७】 दूर्वा
८】कलश एक मिटटी का
९】दीपक
१०】रुई
११】माचिस
पूजा की थाली सामग्री सहित
नाई(खबॉस )को किराया बतौर दक्षिणा
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बत्तीसी झिलाने की सामग्री-
32 लड़डू,
32 रुपया
मेवा,
शकर,
चावल,
गुड़ की भेली,
लाल कपड़ा,
हार,
फुल,
बताशा,
नारियल
और जवारी का रुपया।
विधि-
इसमे भाई पटिये पर बैठता है और बहन उसकी गोद मे पूरा सामान रख़कर आरती उतारती है सभी भाई अपनी बहन को साड़ी और जीजाजी को जवारी देकर बिदा करते है।
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सभी प्रकार की जटिल समस्याओ के समाधान हेतु शीघ्र सम्पर्क करे एबम अपनी कुंडली दिखाकर उचित मार्ग दर्शन प्राप्त करे ।
सम्पर्क सूत्र
पंडित जी श्री परमेस्वर दयाल जी शास्त्री
तिलकचोक मधुसुदनगण
मोबाइल नंबर 09893397835
(पूजन समग्री कम और ज्यादा कर सकते है )
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श्री गणेश पूजन सहित अन्य पूजन के लिए
सभी पूजन में उपयोग के लिए यही सामग्री में से ले सकते है
०】आटा हल्दी चोक पुरने के लिए
1】हल्दीः--------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------100 ग्राम
३】अगरबत्ती------------------- 3पैकिट
४】कपूर------------------------- - 50 ग्राम
५】केसर------------------------- -1डिव्वि
६】चंदन पेस्ट --------------------- 50 ग्राम
७】यज्ञोपवीत --------------------- 11नग्
८】चावल-------------------------- 05 किलो
९】अबीर-----------------------------50 ग्राम
१०】गुलाल, ----------------------10 0ग्राम
११】अभ्रक---------------------------10ग्राम
१२】सिंदूर ------------------------100 ग्राम
१३】रोली, -------------------------100ग्राम
१४】सुपारी, ( बड़ी)----------- 200 ग्राम
१५】नारियल ---------------------- 11 नग्
१६】सरसो--------------------------50 ग्राम
१७】पंच मेवा---------------------100 ग्राम
१८】शहद (मधु)------------------ 50 ग्राम
१९】शकर-------------------------0 1किलो
२०】घृत (शुद्ध घी)-------------- 01किलो
२१】इलायची (छोटी)--------------10ग्राम
२२】लौंग मौली---------------------10ग्राम
२३】इत्र की शीशी--------------------1 नग्
२४】तिली--------------------------२००ग्राम
२५】जौ-----------------------------१००ग्राम
२६】माचिस -------------------------१पैकिट
२७】रुई-------------------------------२०ग्राम
२८】नवग्रह समिधा------------------१पैकेट
२९】धुप बत्ती ------------------------२पैकिट
३०】लाल कपड़ा --------------------२मीटर
३१】सफेद कपडा-------------------२मीटर
३२】समिधा हवन के लिए ---------५किलो
33) तिली ------- ---------------------1किलो
34)जौ-----------------------------200 ग्राम
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अन्य सामग्री
१】पान
२】 पुष्प
३】पुष्पहार
४】दूर्वा
५】विल्वपत्र
६】दोना गड्डी
७】बताशे या प्रशाद
८】फल
९】आम के पत्ते
१०】समिधा हवन के लिए
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माता पूजन सामग्री
१】झंडियां लाल
२】पूड़ी
३】ताव
४】खारक
५】बदाम
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मंडप पूजन सामग्री
१】मानक खम्भ
२】पटली लकड़ी की
३】नींव में रखने का सामान
४】जैसे लाख का टुकड़ा
५】सर के वाल
६】कोयला
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अगर गंगाजली पूजन हो तो ---------कही कही होती है
ऊपर दी गयी पूजा सामग्री में से लेबे
१】खाजा
२】खारक
३】वादाम
४】लाल कपड़ा 3 मीटर
५】श्री फल (नारियल)
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जनेऊ (यज्ञनोपवित) संस्कार
१】मूँज की जनेऊ
२】खड़ाऊ
३】डण्डा(दंड)
४】भिक्षा पात्र "कमण्डल
५】गुरुपूजन की सामग्री
६】जैसे =बस्त्र नारियल जनेऊ गोलसुपारी आदि
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१】बर के निमित्त बस्त्र
२】फल
३】नारियल
४】आभूषण आदि
५】जनेऊ
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गनाना
पूजन सामग्री ऊपर दी गयी उसी में से पूजन थाली तैयार होगी
लड़के वालो की तरफ से दुल्हन के निमित्त
१】 बस्र
२】आभूषण श्रृंगार दानी
३】कुलदेवी प्रतिमा टिपारी
४】मोहर दुल्हन के सर पर बाँधने का
५】पिछौड़ा
६】सिंधोडा
७】सिंधोड़ि
८】कंकण
९】 बतासे
१०】नारियल या नारियल गोला
11)तस्वीर राम विबाह शिव विबाह
12)रगवारै के लोटा
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फेरे के समय लड़की वालों के यहाँ। पूजन सामग्री ऊपर दी है उसके
अलावा
१】लाजा
२】सूप
३】मधुपर्क
४】हथलेवा
५】सिंदुर्दानी
६】डाभ
७】मधुपर्क
८】गुड़
९】बतासे
१०】हल्दी पिसी पॉब पुजाई के लिए
११】समिधा हवन के लिए फेरे के समय
११】विछुड़ी
संपर्क
गुरुदेब भुबनेश्वर
कस्तूरवानगर पर्णकुटी गुना
मो।९८९३९४६८१०
Saturday, 8 November 2025
दुर्गा अष्टमी
Monday, 27 October 2025
दीपावली पर पांच दिन के मुहूर्त 2025
त्रयोदशी तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर दोपहर 12:18 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे
दीपदान समय:::::::::::
(1)धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 7:16 से 8:20 बजे तक शुभ रहेगा(3)वृषभ लग्न :सायंकाल 7:16 – रात्रि 9:11 तक शुभ रहेगा
अभ्यंग स्नान मुहूर्त - प्रात: 05:13 से प्रात: 06:25
नरक चतुर्दशी के दिन चन्द्रोदय का समय - : प्रात:05:13
अमावस्या तिथि आरंभ:
20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त:
21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे
गुरुदेव भुवनेश्वर जी महाराज पर्णकुटी वालो के अनुसार अमावस्या की रात स्थिर लग्न में महालक्ष्मी की पूजा करने से घर में मां लक्ष्मी की स्थिरता बनी रहती है। वैसे तो चार स्थिर लग्न है,
वृष, सिंह, वृश्चिक, और कुंभ।
- वृश्चिक लग्न - दीवाली के दिन प्रातःकाल वृश्चिक लग्न प्रबल होता है। मन्दिरों, अस्पतालों, होटलों, विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिये वृश्चिक लग्न के समय लक्ष्मी पूजा सर्वाधिक उपयुक्त होती है। विभिन्न टीवी और फिल्म कलाकारों, शो एन्करों, बीमा अभिकर्ताओं तथा जो लोग सार्वजनिक मामलों एवं राजनीति से जुड़े हैं, उन्हें भी वृश्चिक लग्न के दौरान देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।
- कुम्भ लग्न - दीवाली के दिन मध्यान्ह के समय कुम्भ लग्न प्रबल होता है। जो रोगग्रस्त एवं ऋणग्रस्त हैं, भगवान शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति प्राप्त करने के इच्छुक हैं, जिनके व्यापार में धन हानि हो रही है तथा व्यापार में भारी ऋण में है, उनके लिये कुम्भ लग्न में लक्ष्मी पूजा करना उत्तम होता है।
- वृषभ लग्न - दीवाली के दिन सायाह्नकाल में वृषभ लग्न प्रबल होता है। गृहस्थ, विवाहित, सन्तानवान, मध्यम वर्गीय, निम्न वर्गीय, ग्रामीण, किसान, वेतनभोगी तथा जो सभी प्रकार के व्यवसायों में संलिप्त व्यापारी हैं, उनके लिये वृषभ लग्न लक्ष्मी पूजा का सर्वोत्तम समय है। वृषभ लग्न को दीवाली पर लक्ष्मी पूजा हेतु सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है।
- सिंह लग्न - दीवाली के दिन मध्य रात्रि के समय सिंह लग्न प्रबल होता है। सिंह लग्न का मुहूर्त, साधु-सन्तों, सन्यासियों, विरक्तों एवं तान्त्रिकों के लिये लक्ष्मी पूजा एवं देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम मुहूर्त होता है।
चोघडिया, मुहूर्त दुकान फैक्ट्री व्यापार के लिए उपयोग कर सकते हो
प्रात: काल अमृत 06:22 से 07:48 शुभ
प्रात: काल शुभ 09:14 से 10:40 शुभ
मध्यान्ह काल चर 01:31 से 02:57 शुभ
दोपहर लाभ 02:57 से- 04:23 शुभ
सायंकाल। अमृत 04:23 से 05:48 शुभ
संध्याकाल लक्ष्मी पूजा के लिए विशेष मुहूर्त
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दिन ओर रात्रि के संक्रमण काल को गो धूली बेला कहते है
(1)गोधूली मुहूर्त सायंकाल 5:50से सायंकाल 06:15 तक
(2)लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 7:08 से 8:18 बजे तक
(3)प्रदोष काल: सायंकाल 5:46 –से रात्रि 8:18 तक
4)वृषभ काल: सायंकाल 7:14से – रात्रि 9:012 अति शुभ मुहूर्त
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प्रदोष काल कब होता है
(1)प्रदोषोऽस्तसमयादूर्ध्वं घटिकाद्वयमिष्यते।त्र्यंशेन तस्य कालस्य यः पूज्यः स प्रदोषकः
अस्त (सूर्यास्त) के समय से ऊपर (बाद में) दो घटी का जो समय होता है, वही प्रदोषकाल कहलाता है। उस काल के तृतीयांश (एक तिहाई भाग) में जो लक्ष्मी की पूजा की जाती है, वही प्रदोषपूजा मानी जाती है।
(2)सूर्यास्तं यावत् कालं प्रदोषः संप्रकीर्तितः।
तस्य तृतीयभागस्थे पूजां कुर्यात् प्रदोषिकाम्॥
(3)अस्ताचलगतादर्कात् पूर्वं द्विघटिकापर्यन्तं च प्रदोषकालः।
अथास्तमितभानोरनन्तरं द्विघटीकान्तः स प्रदोषः परिकीर्तितः
जब सूर्य अस्ताचल (पश्चिम पर्वत) की ओर अग्रसर होता है, तो सूर्यास्त से दो घटी (लगभग 48 मिनट) पहले से लेकर सूर्यास्त के दो घटी बाद तक का जो काल होता है, वही प्रदोषकाल कहलाता है।
➡️ सूर्यास्त से 48 मिनट पूर्व आरंभ होकर
➡️ सूर्यास्त के 48 मिनट बाद तक
कुल चार घटी (लगभग 1 घंटा 36 मिनट) का काल प्रदोषकाल माना गया है।
प्रतिपदा तिथि आरंभ: 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे
(1)गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त: 6:26 से प्रात: 09:14तक
(2)प्रात: काल 10:39से से 12:05 तक
सायाह्नकाल मुहूर्त: 3:29 – से सायंकाल 5:44
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भाई दूज: भाई दूज गुरुवार 23 अक्टूबर को है।
द्वितीया तिथि आरंभ: 22 अक्टूबर रात 8:16 बजे
द्वितीया तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर रात 10:46 बजे
प्रात: काल 10;39से अपरान्ह 02:56 तक
+++++++++++++++++++++++++++++गुरुदेव
एकादशी निर्णय 2025
Thursday, 16 October 2025
दीपावली निर्णय 2025
दीपावली पर पठाके का प्रमाण
Sunday, 12 October 2025
दीपावली पर दीपदान महत्व
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दीपदानात् सदा लक्ष्मीः स्थिरा भवति सर्वदा।
दीपैर्नीराजनं तस्मात् दीपावली स्मृता।।➤ अर्थ: दीपदान करने से लक्ष्मी स्थिर होती हैं। इसी कारण दीपों से आराधना कर इस तिथि को दीपावली कहा गया।
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पद्मपुराण, कार्तिकमाहात्म्य
यः कार्तिके मासि नरोऽभ्युपेतो
दीपं ददात्यायनवस्त्रसङ्गम्।
तेनाक्षयं पुण्यमवाप्य लोके
विष्णोः पदं याति सुखेन पुंसाः।।➤ अर्थ: जो कार्तिक मास में दीपदान करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और अंततः वह विष्णुलोक को प्राप्त करता है।
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नारदपुराण
दीपं यः प्रयतो दद्यात् कार्तिके मासि भक्तितः।
स याति विष्णुसायुज्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते।।➤ अर्थ: जो कार्तिक मास में भक्ति से दीपदान करता है, वह विष्णुसायुज्य को प्राप्त होता है और समस्त पापों से मुक्त होता है।
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गृह्यसूत्रवचन
दीपदानं तु यः कुर्यात् संध्यायां वा निशामुखे।
तस्य पापं विनश्येत् दीपवत् तिमिरं यथा।।➤ अर्थ: जो संध्या या रात्रि के आरंभ में दीपदान करता है, उसके पाप वैसे ही नष्ट होते हैं जैसे दीप से अंधकार