ज्योतिष समाधान

Sunday, 21 January 2024

यज्ञ ऐबं प्रतिष्ठा पूजन सामग्री पर्णकुटी गुना

Gurudev Bhubneshwar Guna:
(पूजन समग्री कम  और  ज्यादा कर  सकते है )
=================================
1】हल्दीः--------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------100 ग्राम
३】अगरबत्ती-------------------     3पैकिट
४】कपूर-------------------------   50 ग्राम
५】केसर-------------------------   1डिव्वि
६】चंदन पेस्ट ------------------ 50 ग्राम
७】यज्ञोपवीत -----------------   11नग्
८】चावल------------------------ 05 किलो
९】अबीर-------------------------50 ग्राम
१०】गुलाल, -----------------10 0ग्राम
११】अभ्रक-------------------
१२】सिंदूर --------------------100 ग्राम
१३】रोली, --------------------100ग्राम
१४】सुपारी, ( बड़ी)--------  200 ग्राम
१५】नारियल -----------------  11 नग्
१६】सरसो----------------------50 ग्राम
१७】पंच मेवा------------------100 ग्राम 
१८】शहद (मधु)--------------- 50 ग्राम
१९】शकर-----------------------0 1किलो
२०】घृत (शुद्ध घी)------------  01किलो
२१】इलायची (छोटी)-----------10ग्राम
२२】लौंग मौली-------------------10ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२४】रंग लाल----------------------10ग्राम
२५】रंग काला --------------------10ग्राम
२६】रंग हरा -----------------------10ग्राम
२७】रंग पिला ---------------------10ग्राम
२८】चंदन मूठा--------------------1 नग्
२९】धुप बत्ती ---------------------2 पैकिट
(30)आवला
(31)दाख
(32)मूँग बडी
(33)पापाड़थेली
34)तेल तिली का
(35)हवन सामग्री हवन अनुसार
(36)घी
(37)तिल 
(38)जौ 
  (39)चावल



=============================
३०】सप्तमृत्तिका
1】 हाथी के स्थान की मिट्टि-----------50ग्राम
२】घोड़ा बांदने के स्थान की मिटटी--50ग्राम
३】बॉबी की मिटटी---------------------50ग्राम
४】दीमक की मिटटी-------------------50ग्राम
५】नदी संगम की मिटटी---------------50ग्राम
६】तालाब की मिटटी-------------------50ग्राम
७】गौ शाला की मिटटी-----------------50ग्राम
राज द्वार की मिटटी-----------------------50ग्राम
============================
३१】पंचगव्य
१】 गाय का गोबर -----------------50 ग्राम
२】गौ मूत्र-----------------------------50ग्राम
३】गौ घृत------------------------------50ग्राम
4】गाय दूध----------------------------50ग्राम
५】गाय का दही ---------------------50ग्राम
=============================
३२】सप्त धान्य-कुलबजन--------100ग्राम
१】 जौ-----------
२】गेहूँ-
३】चावल-
४】तिल-
५】काँगनी-
६】उड़द-
७】मूँग
=============================
३३】कुशा 
३४】दूर्वा
35】पुष्प कई प्रकार के 
३६】गंगाजल
३७】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो
38】पंच पल्लव
१】बड़,
२】 गूलर,
३】पीपल,
४】आम 
५】पाकर के पत्ते)
=============================
३९】बिल्वपत्र
४०】शमीपत्र
४१】सर्वऔषधि 
४२】अर्पित करने हेतु पुरुष बस्त्र
४३】मता जी को अर्पित करने हेतु  
सौ भाग्यवस्त्र 
बर्तन
44】
(1)जल कलश तांबे के 7
(2)मिट्टी के 41
(3)थाली प्रधान यजमान को बडी 
(4)कटोरी 11 
(5)जीतने कुंड हो उतने ही यजमानौ को थाली लोटा आसन 
(6)जीतने कुंड हो उतनी  भगोनी
(7)जीतने कुंड हो उतने ब्रह्मा पात्र 
(8)मन्दिर के कलश 
(9)मन्दिर के पूजन पात्र 
(10)चांदी का तार डोरा  के लिये 
(11)सोने का तार नेत्र उन्मीलन  के लिये 
(12)प्रधान कुंड पर लटकाने के लिये पात्र 
(13) सह्त्र छिद्र कलश 
(14) कुमडा  
(15) दर्पण भगवान का चेहरा  देखने के लिये 

४५】      बस्त्र
१】सफेद कपड़ा 5 मीटर
२】लाल कपड़ा 5 मीटर
(3)पीला कपड़ा 5 मीटर
४】हरा कपड़ा 2मीटर
(5) काला कपडा 3 मीटर
(6)चन्दौवा प्रधान कुंड पर 


४६】पंच रत्न ( जितनी मूर्ती हो)
४७】दीपक
४८】तुलसी दल 
४८】केले के पत्ते
(यदि उपलब्ध हों तो खंभे सहित)
49】बन्दनवार
50】पान के पत्ते ------------11 नग
51】रुई
५२】भस्म
53】ध्वजालाल-1   -

  यज्ञ शाला बनाने के लिये 

(1)बल्ली 10 फिट की  40 नग
(2)बल्ली 12 फिट की 08
(3)सुतली  या नट  40 छ इन्च
(4)ईंटे  3500
(5) मिट्टी पुरने के लिये 10 ट्राली 
(6)मिट्टी छाबने  के लिये 1 ट्राली
(7) भूसा  25 बोरा 
(8)कलई  लाईन खीचने के लिये 
(9)  छाया करने के लिये 2 ट्राली घास
(10)बांस   20  =24 फिट का ऐक 
(11) तोरण के लिये पीपल पाकर गूलर

ध्वजा  =1हाथ हाथ चौडी और 3,5,7,हाथ लम्बी होना चाहिये ।

पताका =1हाथ चौड़ी 3,5,7,हाथ लम्बी हो 

महाध्वज=का बांस 10,16,21,या 23,का होबे

महाध्वज का नाप  3हाथ चौडा 5या 10हाथ लम्बा हो 

ध्वजा

3=पीली 

3=लाल

2=काली

1=हरी 

3=सफेद


 1=इन्द्र की पूर्व में पीली,  बाहन हाथी 

2=अग्नी की अग्निकोण में लाल, सफेद रंग का मेडा 

3=यम की दक्षिण में काली,बाहन लाल रँग का भेसा

 4= नैऋत्ययी नैऋत्य में नीली,  में सफेद,रंग का सिंह

5=बरुण की पश्चिम मे,बाहन हरे रंग की मछली 

 6=बायु की वायव्य में धूमिल, बाहन काले रंग का हिरन 

7=सोम की उत्तर में हरी,सुबर्ण के जैसा घोडा

 8=ईशान की ईशान में सफेद लगानी चाहिये ।लाल बैल 

 दो ध्वजाएँ ब्रह्मा और अनन्त की विशेष होती है,

 ब्रह्मा की सफेद या लाल ध्वजा ईशानकोण और पुर्व् के मध्य मे  में बाहन सफेद रंग  का हंस 

 और अनन्त की पीली सफेद या काली ध्वजा नैऋत कोण  और पश्चिम के मध्य में लगानी चाहिए । बाहन गरुण 

इन ध्वजाओं में सुविधानुसार वाहन और आयुध भी चित्रित किये जाते हैं । 

ध्वजा की ही तरह पताकाएं भी लगाई जाती है इन पताकाओं की दिशा और रङ्ग भी ध्वजाओं के समान ही हैं ।पताकाएं चौकोर होती है

पताका   

3=पीली

3=लाल

2=काली

1=हरी

3=सफेद


1=पूर्व की पताका मे आयुध बज्र होता है 

2=अग्नी कोण मे आयुध तलवार होता है 

3=दक्षिण मे आयुध दण्ड होता है 

4=नैऋत्यकोण की पताका मे आयुध खंग होता है 

5=पश्चिम दिशा मे आयुध पाश होता है 

6=वायव्यकोण की पताका मे आयुध अंकुश होता है 

7=उत्तर दिशा मे आयुध गदा होती है 

8=ईशान कोण की पताका मे आयुध त्रिशूल होता है

9=पूर्व और ईशान कोण के मध्य मे आयुध कमण्डलू 

10=पश्चिम और नैऋत्य मे आयुध चक्र होता है 

एक सबसे बड़ा महाध्वज सबसे उँचा होता है ।उसका बांस 10,16,21,या 23,हाथ का हो।उस पर घुगरू, चवर, घंटी हो 

तोरण 

=पूर्व मे पीपल

पश्चिम मे गूलर 

उत्तर मे पाकर

दक्षिण मे गूलर

आयुध 

पूर्व मे शंख बरगद 

पश्चिम मे गदा  पीपल

उत्तर मे पदम

दक्षिण मे चक्र गूलर 

============================
55】   ब्राहम्णो  के  द्वारा अनुष्ठान करवा रहे है तो   उनके लिए नित्य उपयोगी सामान
=================================
सावुन नहाने के---------------10
सावुन कपड़े धोने के --------10
सर्फ कपडे धोने का ---------1 किलो
मंजन -------------------------100ग्राम
तेल ----------------------------100ग्राम
-------------------------------------------------------------56】========ब्राह्मण बरण सामग्री=======
1】धोती 
२】दुपट्टा
३】आंगोछा
४】आसन
५】माला 
६】गौमुखी 
७】लोटा 
८】पंचपात्र 
९】चमची 
१०】तष्टा 
११】अर्घा 
१२】 डाभ अंगूठी 
=============================५७】=========नवग्रह समिधा=======
१】आक
२】 छोला
३】खैर 
४】आंधी झाड़ा
५】पीपल
६】उमर(गूलर)
७】शमी
८】दूर्वा
९】कुशा
============================
1=जलाधीवास
2=गन्धादी वास
4=पुष पादी वास
5=धान्यादी वास
6=फलादी वास
7=ओषध्यादी वास
8=बश्त्रादी वास
9=घ्रतादि वास
10=शक्रादी वास
11=मिष्ठानआदी वास
12=श्य्यादी वास

(1)मृतीका
(2)पंच पल्लव
(3)गौ मूत्र 
(4)गौमय 
(5)गन्धोदक
(6)दर्भोदक
(7)नारिकेलोदक
(8)क्षारोदक
(9)दूध
(11)स्वादुदक
(12)दधि 
(13)सुरोदक
(14)इक्षुरश
(15)घृत
(16)भस्म
(17)गौ घृत
(18)मधु
(19)शर्करल 
(20)पंचामृत 
(21)गन्ध
(22)पंच पल्लव
(23)सर्बोषधि 
(24)श्वेत पुष्प
(25)फलोदक
(26)अष्ट फ़ल
(27)स्वर्ण
(28)गौ श्र्ंगोदक
(29)सप्त धान्य 
(30)शह्स्त्र् छिद्र कलश 
(31)दिव्य औषधी 
(33)नवरत्न
(34)तीर्थोदक
(35)कदंब पत्र 
(36)शाल्मली पत्र
(37)जम्बू  पत्र 
(38)अशोकपत्र
(39)पीपलपत्र
(40)आम पत्र
(41)बट
(42)विल्व
(43)नाग पत्र
(44)पलाश पत्र
45=उबटन1)U

 पूर्ण आहुति के लिये 
केले के खंबे 
बांस की 3=3 फिट की चम्पट 
दही अग्नी 
कपडा लाल 

हमसे सम्पर्क करे 
Gurudev
Bhubneshwar 
Parnkuti guna 
9893946810

Friday, 15 December 2023

मुंडन संस्कार (चूड़ाकर्म)पूजा सामग्री 9893946810

1】हल्दीः-------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------2 गोले
३】अगरबत्ती-----------------     1पैकिट
४】कपूर-----------------------   50 ग्राम
5) चन्दन पेस्ट -------------50
6)धूप बत्ती ---------–-1 पैकिट
७】यज्ञोपवीत -----------------   05नग्
८】चावल---------------------- 01किलो
९】अबीर-------------------------10ग्राम
१०】गुलाल, -----------------50ग्राम
11)तिली-----––-–-100 ग्राम
१२】सिंदूर --------------------50 ग्राम
१३】रोली, --------------------20 ग्राम
१४】गोल सुपारी, ( बड़ी)--------  50 ग्राम
१५】नारियल -----------------  3 नग्
१६】जौ-----------------50ग्राम
१७】पंच मेवा------------------200 ग्राम
१८】शहद (मधु)--------------- 50 ग्राम
१९】शकर-----------------------100ग्रांम
२०】घृत (शुद्ध घी)----------  100 ग्राम
२१】इलायची (छोटी)-----------05ग्राम
२२】लौंग -----------------05ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२4) हवन सामग्री पैकिट --------200 ग्राम

=============
25】दूर्वा
26】पुष्प 
27】हार मोगरा के फूल के  5
28】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो
29)पान के पत्ते ,10
29)विल्व पत्र
30) शमी पत्र
31)केले के पत्ते
32)कलश पीतल का ------1
33)तुलसी दल 
34)हवन के लिये समिधा 01किलो
35) गंगा जल
36)आम के गुच्छे -------5
=============≠=======
1)सफेद कपड़ा (1मीटर)
२】लाल कपड़ा (1मीटर)
≠=====================

घर से उप्लब्ध करने का सामान】

1)आसन बैठने के लिये
2)चौकी2×2
3)थाली 2 पूजा के लिये 
4)कटोरी 11 
5)हाथ पोछ्ने के लिये टाविल 
6)दूध
7)दही
8)माचिस
10)रुई
11)आटा  चोक पूरने  के लिये 100 ग्राम
12)प्रशाद पंजीरी   (कसार आटे)
13)हलुआ 
14)पूडी
15)पूजा के लिये फुटकर पैसे
16) हल्दी चौक पूरने के लिऐ
17)नया उस्तरा बाल उतारने के लिए
18)नयी कैची बाल उतारने के लिऐ
19)हाथ की पिसी हुई हल्दी 50-ग्राम
20)

  1. मस्तक लेपन के लिए यथासम्भव गाय का दूध एवं दही पचास-पचास ग्राम भी बहुत है।
  2. कलावे के लिए लगभग छः छः इंच के तीन टुकड़ों के बीच में छोटे-छोटे कुश के टुकड़ों को बाँधकर रखना चाहिए।
  3. प्रज्ञा संस्थानों शाखाओं को इस उद्देश्य के लिए कैंची, छुरा अलग से रखना चाहिए। उन्हीं का पूजन कराकर नाई से केश उतरवाना चाहिए।
  4. बालक के लिए मुण्डन के बाद नवीन वस्त्रों की व्यवस्था रखनी चाहिए।
  5. बाल एकत्र करने के लिए गुँथे आटे या गोबर की व्यवस्था रखनी चाहिए।

Gurudev
Bhubneshwar
Parnkuti
Guna
9893946810

Tuesday, 21 November 2023

श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रम्

श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रम् 

आधाररूपे चाधेये धृतिरूपे धुरन्धरे ।
ध्रुवे ध्रुवपदे धीरे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १॥
शिवाकारे शक्तिरूपे शक्तिस्थे शक्तिविग्रहे ।
शक्ताचारप्रिये देवि जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ २॥
जयदे जगदानंदे जगदेकप्रपूजिते ।
जय सर्वगते दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ३॥
सूक्ष्मातिसूक्ष्मरूपे च प्राणापानादिरूपिणि ।
भावाभावस्वरूपे च जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ४॥
कालाधिरूपे कालेशे कालाकालविभेदिनि ।
सर्वस्वरूपे सर्वज्ञे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ५॥
महाविघ्ने महोत्साहे महामाये वरप्रदे ।
प्रपञ्चसारे साध्वीशे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ६॥
आगम्ये जगतामाद्ये माहेश्वरि वराङ्गने ।
अशेषरूपे रूपस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ७॥
तीर्थयज्ञ -तपोदान-योगसारे जगन्मयि ।
त्वमेव सर्वं सर्वस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ८॥
दयारूपे दयादृष्टे दयार्द्रे दुःखमोचनि ।
सर्वापत्तारिके दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ९॥
आगम्यधाम-धामस्थे महायोगीश-हृत्पुरे ।
अमेयभावकूटस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १०॥

इति श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

शुभमऽस्तु   ! 
हेमवत्यै नम:। भुवनेश्वर्यै नम:। अह्लादिन्यै नम:।

नक्षत्र ज्ञान

श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रम् 

आधाररूपे चाधेये धृतिरूपे धुरन्धरे ।
ध्रुवे ध्रुवपदे धीरे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १॥
शिवाकारे शक्तिरूपे शक्तिस्थे शक्तिविग्रहे ।
शक्ताचारप्रिये देवि जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ २॥
जयदे जगदानंदे जगदेकप्रपूजिते ।
जय सर्वगते दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ३॥
सूक्ष्मातिसूक्ष्मरूपे च प्राणापानादिरूपिणि ।
भावाभावस्वरूपे च जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ४॥
कालाधिरूपे कालेशे कालाकालविभेदिनि ।
सर्वस्वरूपे सर्वज्ञे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ५॥
महाविघ्ने महोत्साहे महामाये वरप्रदे ।
प्रपञ्चसारे साध्वीशे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ६॥
आगम्ये जगतामाद्ये माहेश्वरि वराङ्गने ।
अशेषरूपे रूपस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ७॥
तीर्थयज्ञ -तपोदान-योगसारे जगन्मयि ।
त्वमेव सर्वं सर्वस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ८॥
दयारूपे दयादृष्टे दयार्द्रे दुःखमोचनि ।
सर्वापत्तारिके दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ९॥
आगम्यधाम-धामस्थे महायोगीश-हृत्पुरे ।
अमेयभावकूटस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १०॥

इति श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

शुभमऽस्तु   ! 
हेमवत्यै नम:। भुवनेश्वर्यै नम:। अह्लादिन्यै नम:।

Thursday, 2 November 2023

करवा चौथ ब्रत

ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक महिलाओं तक सभी नारियाँ करवाचौथ का व्रत बडी़ श्रद्धा एवं उत्साह के साथ रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए। पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी के जैसे दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अ‌र्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में करवाचौथ व्रतोत्सव अधिकतर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं लेकिन अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं।

यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक निरंतर प्रति वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन करें।


काल से चली आ रही है. जब पांडवों पर संकट के बादल मंडराए थे तो श्रीकृष्ण के कहे अनुसार द्रोपदी ने करवा चौथ का व्रत पूजन किया था. जिसके प्रभाव से पांडवों पर आई विपदा टल गई थी. मान्यता है जो सुहागिन स्त्री इस दिन अन्न-जल का त्याग कर व्रत रखती हैं उसके सुहाग पर कभी कोई आंच नहीं आती.



कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें। [2]


पूजन

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उस दिन भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चन्द्रमा का पूजन करें। पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त वर्णित सभी देवों को स्थापित करें।[3]


नैवेद्य

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शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य हेतु बनाएँ।


करवा

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काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से बनाये गए मिट्टी के करवे अथवा तांबे के बने हुए करवे।


संख्‍या

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10 अथवा 11 करवे अपनी सामर्थ्य अनुसार रखें।


कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं।


पूजन विधि

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चौथ पूजा के दौरान एक समूह में बैठ सुहागिने, गीत गाते हुए थालियों की फेरी करती हुई

बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें।[4]


पूजन हेतु निम्न मंत्र बोलें

-

'ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें।


करवों में लड्डू का नैवेद्य रखकर नैवेद्य अर्पित करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित कर पूजन समापन करें। करवा चौथ व्रत की कथा पढ़ें अथवा सुनें।


सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर चंद्रमा का पूजन कर अर्घ्य प्रदान करें। इसके पश्चात ब्राह्मण, सुहागिन स्त्रियों व पति के माता-पिता को भोजन कराएँ। पति की माता (अर्थात अपनी सासूजी) को उपरोक्त रूप से अर्पित एक लोटा, वस्त्र व विशेष करवा भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि वे जीवित न हों तो उनके तुल्य किसी अन्य स्त्री को भेंट करें। इसके पश्चात स्वयं व परिवार के अन्य सदस्य भोजन करें।

Sunday, 29 October 2023

लक्ष्मी पूजन सामग्री

16
महा लक्ष्मीपूजन सामग्री लिस्ट 

सामग्री आव्यशकतानुसार   कम ज्यादा ला सकते है 
  
पाना लक्ष्मी व श्री गणेश की मूर्तियां (बैठी हुई मूर्ति

१】धूप बत्ती (अगरबत्ती) 
२】चंदन
३】 कपूर 
४】केसर 
५】यज्ञोपवीत 5 
६】कुंकु 
७】चावल 
८】अबीर 
९】गुलाल, 
१०】अभ्रक 
११】हल्दी 
१२】सौभाग्य द्रव्य-
१३】मेहँदी 
१४】चूड़ी, 
१५】काजल, 
१६】बिछुड़ी आदि आभूषण 
१७】आंटी (कलावा)
१८】रुई 
१९】रोली,
२०】 सिंदूर 
२१】सुपारी, 
२२】पान के पत्ते 
२३】पुष्पमाला, 
२४】कमलगट्टे 
२५】धनिया खड़ा 
२६】 कुशा व दूर्वा
२७ पंच मेवा 
२८】गंगाजल
२९】शहद (मधु) 
३०】शकर
३१】 घृत (शुद्ध घी) 
३२】दही 
३३】दूध 
३४】ऋतुफल(गन्ना, सीताफल, सिंघाड़े इत्यादि) 
३५】नैवेद्य या मिष्ठान्न (पेड़ा, मालपुए इत्यादि) ३६】इलायची (छोटी)
३७】लौंग 
३८】मौली
३९】इत्र की शीशी 
४०】तुलसी दल 
४१】सिंहासन (चौकी, आसन) 
४२】पंच पल्लव(बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते)  सम्भब हो तो

४३】 लक्ष्मीजी का पाना (अथवा मूर्ति) 
४४】गणेशजी की मूर्ति सरस्वती का चित्र 
४५】चाँदी का सिक्का  श्रद्धानुसार 
४६】लक्ष्मीजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र  श्र्द्धा अनुसार 
४७】गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र श्रद्धाअनुसार 
४८】अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र श्रद्धानुसार 
४९】जल कलश (ताँबे या मिट्टी का) 
५०】सफेद कपड़ा (आधा मीटर)
५१】लाल कपड़ा (आधा मीटर) 
५२】दीपक बड़े दीपक के लिए तेल
५३】 ताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा) 
५४】श्रीफल (नारियल)
५५】धान्य (चावल, गेहूँ)

५६】लेखनी (कलम) 
५७】बही-खाता, 
५८】स्याही की दवात
५९】तुला (तराजू)  अगर संभव हो तो 
६०】 पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल) 
६१】एक नई थैली में हल्दी की गाँठ, खड़ा धनिया व दूर्वा आदि खील-बताशे अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र

संपर्क
पंडित =भुबनेश्वर 
कस्तूरवानगर पर्णकुटी गुना 
मोबाइल =०९८९३९४६८१०

Sunday, 22 October 2023

दुर्गा सप्तशती सम्पूर्ण हवन सामाग्री







जौ 
चावल 
इलायची 
शकर 
मिश्री 
उड़द 
राल 
समुद्र फेन 
कमल गट्टा 
हल्दी 
सरसों 
जायफल 
विजया 
रक्त गूंजा 
कपूर 
शंख  पुष्प 
गूगल 
शहद 
लोंग 
सुपारी 
लाजा 
शहदेवी 
भेशा गूगल 
नीमगिलोय 
जटा मांसी 
विष्णुकान्ता 
रक्त  चंदन 
हर ताल 
मेनसील 
गुड़ 
बच 
अम चूर 
राजान
मधु आसब
गोखरू 
 काली मिर्च 
गुलाल 
चंदन 
स्वेतचंदन 
ब्राह्मी 
 इत्र 
अष्टगंध 
पंचमेवा 
गुलकन्द 
भोजपत्र 
आवला 
धूप 
दारु हल्दी 
सताबरी 
सोठ 
अबीर 
केशर 
जाबत्रि
दालचीनी 
गूंजा 
काजल 
ख़ाजा
हिंगुल 
मसूर 
कालीहल्दी 
कस्तूरी 
कुमकुम 
वज्र दांति
चिरौंजी 
लाजवंती 
आमी हल्दी 
इन्द्र  जो 
मोर पंखी
बेला गिरी 
मेन फल  
मातू लिंग 
माल कंगनी
बहेड़ा 
मजीठ
नाग केशर 
प्रियगूं 
आशापूरी  धूप 
सर्व औषधी 
अगर 
खोपरा बूरा 
सफेद  केशर 
शिलाजीत 
सफेद  गूंजा 
मोर पंखें 
शिव लिंगी  के बीज 
कण गूगल 

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पत्ते  पीपल 
फूल
फल 
अतर झाड़ा 
शमी 
कुश  
दूर्वा 
पान 
केला 
आवला 
कटहल 
बील फल 
नारियल  खंड 
काग़ज़ी  नींबु 
काँच 
खींरनी 
सिंघाडा
दूध 
इत्र 
हलूआ 
विजोरा नींबु 
लाल  कनेर 
सीता फल 
पंच मेवा 
रक्त नीर 
काजल 
खाजा 
गन्ना 
पेठा 
नारंगी 
कुमकुम 
मोर पंख 
कबीठ 
दही 
माखन 
दाडीम के  फूल
अनार 
अनार  के  छिलके 
पेड़ा