ज्योतिष समाधान
Friday, 30 June 2023
वर्षा और घाघ भडरी
महा लिंग स्तुति
अनादिमलसंसार रोगवैद्याय शंभवे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ ॥
आदिमध्यान्तहीनाय स्वभावानालादीपतये।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 2॥
प्रलयार्नवसंस्थाय प्रलयोत्पत्तिहेतवे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 3॥
ज्वालामालावृताङगाय ज्वलनस्तंभरूपिणे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 4॥
महादेवाय महते ज्योतिषेऽनन्ततेजसे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 5॥
प्रधानपुरुषेषाय व्योमरूपाय वेधसे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 6॥
निर्विकाराय नित्याय सत्ययामलतेजसे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 7॥
वेदांतसाररूपाय कालरूपाय धीमते।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 8॥
इति श्रीकूर्मपुराणान्तर्गतं श्रीमहलिङ्गस्तुतिः समाप्त।Sunday, 14 May 2023
यज्ञ कुंडो का महत्व
योनि कुंड यज्ञ के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला यह कुंड योनि के आकार का होता है. इस कुण्ड कुछ पान के पत्ते के आकार का बनाया जाता है. इस यज्ञ कुंड का एक सिरा अर्द्धचन्द्राकार होता है तथा दूसरा त्रिकोणाकार होता है. इस तरह के कुण्ड का प्रयोग सुन्दर, स्वस्थ, तेजस्वी व वीर पुत्र की प्राप्ति हेतु विशेष रूप से किया जाता है.
अर्द्धचन्द्राकार कुण्ड
इस कुण्ड का आकर अर्द्धचन्द्राकार रूप में होता है. इस यज्ञ कुंड का प्रयोग पारिवारिक जीवन से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं के निराकरण के लिए किया जाता है. इस यज्ञ कुंड में हवन करने पर साधक को सुखी जीवन का पुण्यफल प्राप्त होता है
त्रिकोण कुण्ड
इस यज्ञ कुंड का निर्माण त्रिभुज के आकार में किया जाता है. इस यज्ञ कुण्ड का विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय पाने और उन्हें परास्त करने के लिए किया जाता है.
वृत्त कुण्ड
वृत्त कुण्ड गोल आकृति लिए हुए होता है. इस कुण्ड का विशेष रूप से जन-कल्याण, देश में सुख-शांति बनाये रखने आदि के लिए किया जाता है. इस प्रकार के यज्ञ कुण्ड का प्रयोग प्राचीन काल में बड़े-बड़े ऋषि-मुनि किया करते थे
अष्टास्त्र कुण्ड
इस प्रकार के अष्टाकार कुण्ड का प्रयोग रोगों के निदान की कामना लिए किया जाता है. सुखी, स्वस्थ्य, सुन्दर और निरोगी बने रहने के लिए ही इस यज्ञ कुण्ड में हवन करने का विधान है.
षडस्त्र कुण्ड
यह कुण्ड छः कोण लिए हुए होता है. इस प्रकार के यज्ञ कुण्डों का प्रयोग प्राचीन काल में बहुत अधिक होता था. प्राचीन काल में राजा-महाराजा शत्रुओं में वैमनस्यता का भाव जाग्रत करने के लिए इस प्रकार के यज्ञ कुण्डों का प्रयोग करते थे.
चतुष्कोणास्त्र कुण्ड
इस यज्ञ कुण्ड का प्रयोग साधक अपने अपने जीवन में अनुकूलता लाने के लिए विशेष रूप से करता है. इस यज्ञ कुण्ड में यज्ञ करने से व्यक्ति की भौतिक हो अथवा आध्यात्मिक दोनों ही प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति होती है.
पदम कुण्ड
कमल के फूल के आकार लिए यह यज्ञ कुंड अठारह भागों में विभक्त दिखने के कारण अत्यंत ही सुन्दर दिखाई देता है. इसका प्रयोग तीव्रतम प्रहारों व मारण प्रयोगों से बचने हेतु किया जाता है.
Tuesday, 2 May 2023
सबैया
Wednesday, 1 February 2023
विवाह पूजन सामग्री
Sunday, 23 October 2022
दीपावली पूजन सामग्री एवं शुभ मुहूर्त
दीपावली पूजन सामग्री
कुछ स्त्रोत लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशिता काल का सुझाव भी देते हैं।
हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों, जो इस विशेष समय के दौरान लक्ष्मी पूजा के बारे में अधिक जानते हैं,
के लिए अधिक उपयुक्त होता है।
सामान्य लोगों के लिए प्रदोष काल मुहूर्त ही उपयुक्त है।
लक्ष्मी पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं,
क्यूँकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं। लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान ही होता है,
जब स्थिर लग्न प्रचलित होती है।
ऐसा माना जाता है, कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये
तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है।
इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
वृषभ लग्न को स्थिर माना जाता है
और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होते है
व्यापारिक प्रतिष्ठानों में व्यापार में प्रयोग किए जाने वाले कल, पुर्जे, गद्दी, लक्ष्मी कुबेरादि सरस्वती पूजन हेतु शुभ मुहूर्त
प्रालेपन गादी स्थापना-स्याही भरना-कलम दवात सबारने के लिये ब्र्श्चीक लग्न मे कर सकते है
कुम्भ लग्न :
::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
वृषभ लग्न :
::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
सिंह लग्न –
महानिशिता काल में तांत्रिक और पंडित लोग पूजा करते है,
04 नबम्बर 2021
व्यापारियों के चोघड़िया मूहूर्त
चर =दोपहर 10:59 से- 12:21 =शुभ
लाभ=दोपहार 12:21=से - 01:30 =शुभ
04 नवम्बर 2021 को
प्रात: 06:03 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त -
05 नवम्बर 2021 को
रात्रि 02:44 बजे
::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::



