ज्योतिष समाधान

Sunday, 4 November 2018

चुनाव के समय अपनी जन्म कुण्डली के योग और बलाबल, भलीभांति देखकर ही कोई कार्य (नामांकन आदि) करें। शुभ मुहूर्त आपके भविष्य को बदले या न बदले, परंतु जीवन के प्रमुख कार्य शुभ मुहूर्त में करते हैं तो आपका जीवन निश्चित ही आनंददायक बन जाएगा। अत: हमें अवश्य ही शुभ समय का चयन करना चाहिए। कैसे बनता है शुभ  मुहूर्त

शुभ मुहूर्त आपके भविष्य को बदले या न बदले, परंतु जीवन के प्रमुख कार्य शुभ मुहूर्त में करते हैं तो आपका जीवन निश्चित ही आनंददायक बन जाएगा।
अत: हमें अवश्य ही शुभ समय का चयन करना चाहिए।

कैसे बनता है शुभ  मुहूर्त

 अनुसार शुभ मुहूर्त निकालने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है-

तिथि,
वार,
नक्षत्र,
योग,
करण,
नवग्रहों की स्थिति,
मलमास,
अधिकमास,
शुक्र और गुरु अस्त,
अशुभ योग,
भद्रा,
शुभ लग्न,
शुभ योग
तथा राहूकाल आदि
इन्हीं के योग से शुभ मुहूर्त निकाला जाता है। यथा सर्वार्थसिद्धि योग।
यदि सोमवार के दिन रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा तथा श्रवण नक्षत्र हो तो सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण होता है। 

शुभ मुहूर्तों में सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त इनको माना जाता है-

गुरु-पुष्य योग -- यदि गुरुवार को चन्द्रमा पुष्य नक्षत्र में हो तो इससे पूर्ण सिद्धिदायक योग बन जाता है।

जब चतुर्दशी सोमवार को और पूर्णिमा या अमावस्या मंगलवार को हो तो सिद्धिदायक मुहूर्त होता है।

इस योग में किया गया कार्य शीघ्र ही पूरा हो जाता है।
अर्थात शुभ योगों की गणना कर उनका उचित समय पर जीवन में इस्तेमाल करना ही शुभ मुहूर्त पर किया गया कार्य कहलाता है। 

दिन के अनुसार शुभ मुहूर्त ये--(उज्जैन के अनुसार)..
02 नवंबर (शुक्रवार)- इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है।
सुबह 9 बजकर 23 मिनिट से 10.47 मिनट बजे तक अमृत बेला रहेगी।
दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 13.34 बजे तक शुभ बेला रहेगी।
इस दिन चंद्रमा, सिंह राशि में रहेगा।
दशमी तिथि रहेगी।
मघा नक्षत्र रहेगा।
विजय मुहूर्त 14 बजकर 02 मिनिट से 14 बजकर 46 मिनिट तक रहेगा।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनिट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनिट तक रहेगा।
इस दिन दिशाशूल पश्चिम में रहेगा।
अग्निवास पृथ्वी पर होगा।
03 नवंबर (शनिवार)- रमा एकादशी का दिन है।
त्रिपुष्कर योग रहेगा।
इस दिन दोपहर 1.34 बजे 4.20 बजे तक का समय लाभ और अमृत का चौघड़िया है।
अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 48 मिनिट से 12 बजकर 33 मिनिट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त 14 बजकर 01 मिनिट से 14 बजकर 46 मिनिट तक रहेगा।
चन्द्रमा सिंह राशि में ओर पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा।
दिशाशूल पूर्व दिशा में ओर अग्निवास पाताल में होगा।

05 नवंबर (सोमवार)- इस दिन धनतेरस ओर स्वार्थ सिद्धि योग एवम अमृत सिद्धि योग रहेगा।

सुबह नौ बजकर 24 मिनिट से 10 बजकर 47 मिनिट तक शुभ का चौघड़िया रहेगा।

दोपहर 14 बजकर 57 मिनट से दोपहर 14 बजकर 20 मिनिट तक लाभ की बेला रहेगी।चन्द्रमा कन्या राशि में रहेगा

और इस दिन हस्त नक्षत्र प्रभावी होगा।

इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनिट से दोपहर12 बजकर 32 मिनिट तक रहेगा।

इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 14 बजकर 1 मिनिट से 14 बजकर 45 मिनिट तक रहेगा।

अग्निवास पृथ्वी पर होगा।
दिशाशूल पूर्वदिशा मेंरहेगा।
भद्रा पाताल में होगी।
इस दिन नामांकन करना
कन्या,
धनु,
मकर,
वृश्चिक,
मीन,
मेष,
वृषभ,
कर्क
ओर सिंह राशि वालों के शुभ और लाभकारी होगा।

08 नवंबर (गुरुवार)- इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है।
इस दिन अन्नकूट ओर गोवर्धन पूजन रहेगा।
इस दिन दोपहर 12 बजकर 10 मिनिट से 14 बजकर 56 मिनिट तक लाभ ओर अमृत बेला (चौघड़िया) है।
इस दिन चन्द्रमा 13 बजकर 43 मिनिट तक तुला राशि में रहेगा
उसके बाद वृश्चिक राशि में आ जायेगा।
नक्षत्र विशाखा रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 48 मिनिट से 12 बजकर 33 मिनिट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त 14 बजकर 01 मिनिट से 14 बजकर 45 मिनिट तक रहेगा।
अग्निवास पृथ्वी पर ओर दिशाशूल दक्षिण में रहेगा।

09 नवंबर (शुक्रवार)- इस दिन भाईदूज ओर सर्वार्थ सिद्धि योग है।

सुबह 9 बजकर 25 मिनिट से 10.48 मिनट तक अमृत बेला रहेगी। दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 13.33 बजे तक शुभ बेला रहेगी।

इस दिन चंद्रमा, वृश्चिक राशि में रहेगा।

द्वितीय तिथि रहेगी।
अनुराधा नक्षत्र रहेगा।
विजय मुहूर्त 14 बजकर 01 मिनिट से 14 बजकर 45 मिनिट तक रहेगा।
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनिट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनिट तक रहेगा।
इस दिन दिशाशूल पश्चिम में रहेगा।
अग्निवास आकाश में होगा।
इस दिन नामांकन करना
वृश्चिक,
मीन,
मिथुन,
कुम्भ,
मकर,
वृषभ,
कर्क
एवम तुला ओर सिंह राशि वालों के शुभ
और लाभकारी होगा।
नोट : कोई भी शुभ कार्य करने के लिए उस दिन आपका चन्द्रमा मजबूत होना चाहिए
एवं आपको अपने कार्य स्थिर लग्न में करने चाहिए।
चुनाव के समय अपनी जन्म कुण्डली के योग और बलाबल,
भलीभांति देखकर ही कोई कार्य (नामांकन आदि) करें।

समृद्धि और सामर्थ्य प्रदान करने वाला आयुष्मान-सौभाग्य और स्वाति नक्षत्र का मंगलकारी त्रिवेणी संयोग बनने जा रहा है। इस संयोग में मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना से धन वर्षा होगी। इसका सकारात्मक असर लंबी अवधि तक रहेगा। श्री महालक्ष्मी पूजा किस लग्न कौन कौन सी पूजा किस समय करे हमारा ब्लाग अवश्य ओपन करे स्थिर लक्ष्मी की पूजा किस लग्न में करे लक्ष्मी पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं  क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं।गादी स्थापना मुहूर्त /स्याही भरने का मुहूर्त / कलम दवात सवारने का मुहूर्त /

दिनांक ०७/११/२०१८

गादी स्थापना मुहूर्त /स्याही भरने का मुहूर्त / कलम दवात सवारने का मुहूर्त /

प्रता:०६:५४से०९:३८ तक लाभ अमृत बेला/

दोपहर /११:००से१२:००/तक शुभ वेला

दोपहर/ १२से१:३०/बजे तक राहु काल रहेगा

दोपहर /०३:०५से ०४/२७तक चंचल बेला

सायंकाल/ ०४:२७से०५:४८तक लाभ वेला

प्रदोष काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = ०५:४८से ०८:१२
प्रदोष काल = सायंकाल ०५:२७ से ०८:०६
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लग्नानुसार मुहूर्त =======

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वृषभ लग्न
– यह दिवाली के दिन शाम का समय होता है.
यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.

वृषभ   लग्न काल
=सायंकाल०६:१९ /से०८:१५तक

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सिंहलग्न –
यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.

महानिशिता काल में तांत्रिक और पंडित लोग पूजा करते है, ये वे लोग होते है, जिन्हें लक्ष्मी पूजा के बारे में अच्छे से जानकारी होती है.

लक्ष्मी प्राप्ति मंत्र : ॐ हिम् महालक्ष्मै च विदमहै, विष्णु पत्नये च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात

सिंह लग्न=
अर्ध रात्रि काल१२:४६से/०३:०२तक
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वृश्चिक लग्न –
यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है. वृश्चिक लग्न में मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज में पूजा होती है. राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.

बृश्चिक लग्न=
प्रता:०७:३८से/0९:५५ तक 
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धनु लग्न
प्रता: ०९:३८ से दोपहर ११:४२ तक,

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कुम्भ लग्न –
यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है.
कुम्भ लग्न में वे लोग पूजा करते है, जो बीमार होते है,
जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है,
जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है.

कुम्भ लग्न दोपहर   = ०१:४३ से  ०३:४३ तक भी उपयोग में ले सकते  है 
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अमावस्या तिथि प्रारम्भ = ६/नवम्बर/२०१८ को रात्रि १०:२७ बजे
अमावस्या तिथि समाप्त = ७/नवम्बर/२०१८ को सायंकाल ०६:३१ बजे

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लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है 
और लगभग २ घण्टे २४ मिनट तक रहता है।
कुछ स्त्रोत लक्ष्मी पूजा को करने के लिए महानिशिता काल भी बताते हैं। 
हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों, जो इस विशेष समय के दौरान लक्ष्मी पूजा के बारे में अधिक जानते हैं,
उनके लिए यह समय ज्यादा उपयुक्त होता है।

सामान्य लोगों के लिए हम प्रदोष काल मुहूर्त उपयुक्त बताते हैं।

लक्ष्मी पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं 
क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं।

लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है 
जब स्थिर लग्नप्रचलित होती है।
ऐसा माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है। 
इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है।
 वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है 
और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह
अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है। 

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संपर्क
Gurudev bhubneshwar
पर्णकुटी आश्रम गुना
०९८९३९४६८१०
०६२६२९४६८१०

【【【【【【【०४】】】】】】】

श्री महा लक्ष्मी पूजन के लिए लगने वाली आवश्यक सामग्री एबं महा लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 【 गादी स्थापना मुहूर्त /स्याही भरने का मुहूर्त / कलम दवात सवारने का मुहूर्त 】 लिए हमारा ब्लाग ओपन करे

दिनांक ०७/११/२०१८

गादी स्थापना मुहूर्त /स्याही भरने का मुहूर्त / कलम दवात सवारने का मुहूर्त /

प्रता:०६:५४से०९:३८ तक

लाभ अमृत बेला/ दोपहर /११:००से१२:००/तक
दोपहर/ १२से१:३०/बजे तक राहु काल रहेगा
दोपहर /०३:०५से ०४/२७तक चंचल बेला
सायंकाल/ ०४:२७से०५:४८तक लाभ वेला

प्रदोष काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = ०५:४८से ०८:१२
प्रदोष काल = सायंकाल ०५:२७ से ०८:०६
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वृषभ काल =सायंकाल०६:१९ /से०८:१५तक
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सिंह लग्न=अर्ध रात्रि काल१२:४६से/०३:०२तक
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बृश्चिक लग्न=प्रता:०७:३८से/0९:५५ तक 
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धनु लग्न प्रता: ०९:३८ से दोपहर ११:४२ तक,
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कुम्भ लग्न दोपहर   = ०१:४३ से  ०३:४३ तक भी उपयोग में ले सकते  है 
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अमावस्या तिथि प्रारम्भ = ६/नवम्बर/२०१८ को रात्रि १०:२७ बजे
अमावस्या तिथि समाप्त = ७/नवम्बर/२०१८ को सायंकाल ०६:३१ बजे

महानिशिता काल  तंत्र साधना या विशेष पाठ के लिए  है।

रात्रि = ११:३८ से १२:३१+
सिंह काल 
= रात्रि१२:४६+ से रात्रि०३:०२+

सामग्री आव्यशकतानुसार
कम ज्यादा ला सकते है
पाना लक्ष्मी व श्री गणेश की मूर्तियां (बैठी हुई मूर्ति

१】धूप बत्ती (अगरबत्ती)
२】चंदन
३】 कपूर
४】केसर
५】यज्ञोपवीत 5
६】कुंकु
७】चावल
८】अबीर
९】गुलाल,
१०】अभ्रक
११】हल्दी
१२】सौभाग्य द्रव्य-
१३】मेहँदी
१४】चूड़ी,
१५】काजल,
१६】बिछुड़ी आदि आभूषण
१७】आंटी (कलावा)
१८】रुई
१९】रोली,
२०】 सिंदूर
२१】सुपारी,
२२】पान के पत्ते
२३】पुष्पमाला,
२४】कमलगट्टे
२५】धनिया खड़ा
२६】 कुशा व दूर्वा
२७ पंच मेवा
२८】गंगाजल
२९】शहद (मधु)
३०】शकर
३१】 घृत (शुद्ध घी)
३२】दही
३३】दूध
३४】ऋतुफल(गन्ना, सीताफल, सिंघाड़े इत्यादि)
३५】नैवेद्य या मिष्ठान्न (पेड़ा, मालपुए इत्यादि)
३६】इलायची (छोटी)
३७】लौंग
३८】मौली
३९】इत्र की शीशी
४०】तुलसी दल
४१】सिंहासन (चौकी, आसन)
४२】पंच पल्लव
(बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते) सम्भब हो तो

४३】 लक्ष्मीजी का पाना (अथवा मूर्ति)
४४】गणेशजी की मूर्ति सरस्वती का चित्र
४५】चाँदी का सिक्का श्रद्धानुसार
४६】लक्ष्मीजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र श्र्द्धा अनुसार
४७】गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र श्रद्धाअनुसार
४८】अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र श्रद्धानुसार
४९】जल कलश (ताँबे या मिट्टी का)
५०】सफेद कपड़ा (आधा मीटर)
५१】लाल कपड़ा (आधा मीटर)
५२】दीपक बड़े दीपक के लिए तेल
५३】 ताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा)
५४】श्रीफल (नारियल)
५५】धान्य (चावल, गेहूँ)
५६】लेखनी (कलम)
५७】बही-खाता,
५८】स्याही की दवात
५९】तुला (तराजू) अगर संभव हो तो
६०】 पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल)
६१】एक नई थैली में
हल्दी की गाँठ,
खड़ा धनिया
व दूर्वा आदि खील-बताशे अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र

संपर्क पंडित =
गुरुदेब
भुबनेश्वर
कस्तूरवानगर पर्णकुटी गुना
मोबाइल =०९८९३९४६८१० 
६२६२९४६८१०

धनतेरस शुभ मुहूर्त में ही सामान खरीदे किस समय क्या खरीदें जानने के लिए हमारी लिंक ओपन करे =धनतेरस के दिन 13 की संख्या भी हो जाती है शुभ, =जानिए 13 सिक्के,= 13 कौ‍डियां =और 13 दीप के खास उपाय = धनतेरस पर जो भी उपाय आजमाए जाते हैं सामान्यत: उनसे मिलने वाला फल धनतेरस पर 13 गुना बढ़ जाता है। इस दिन 13 की संख्या शुभ मानी जाती है।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व पूरी श्रद्धा व विश्वास से मनाया जाता है.
देव धनवन्तरी के अलावा इस दिन, देवी लक्ष्मी जी और धन के देवता कुबेर के पूजन की परम्परा है.
इस दिन कुबेर के अलावा यमदेव को भी दीपदान किया जाता है.
इस दिन यमदेव की पूजा करने के विषय में एक मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से घर में असमय मृ्त्यु का भय नहीं रहता है.
धन त्रयोदशी के दिन यमदेव की पूजा करने के बाद घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक पूरी रात्रि जलाना चाहिए.
इस दीपक में कुछ पैसा व कौडी भी डाली जाती है.

【【【【【धनतेरस का महत्व 】】】】
साथ ही इस दिन नये उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है

शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है.

सात धान्य गेंहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है.

सात धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है.

इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्ध के रुप में श्वेत मिष्ठान्न का प्रयोग किया जाता है.

साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है.

धन त्रयोदशी के दिन देव धनवंतरी देव का जन्म हुआ था.

धनवंतरी देव, देवताओं के चिकित्सकों के देव है.

यही कारण है कि इस दिन चिकित्सा जगत में बडी-बडी योजनाएं प्रारम्भ की जाती है.

धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ रहता है.

धनतेरस के दिन 13 की संख्या भी हो जाती है शुभ, जानिए 13 सिक्के, 13 कौ‍डियां और 13 दीप के खास उपाय

धनतेरस पर जो भी उपाय आजमाए जाते हैं सामान्यत: उनसे मिलने वाला फल धनतेरस पर 13 गुना बढ़ जाता है। इस दिन 13 की संख्या शुभ मानी जाती है।

धन तेरस पूजा मुहूर्त

1. प्रदोष काल:- सूर्यास्त के बाद के 2 घण्टे 24 की अवधि को प्रदोषकाल के नाम से जाना जाता है.

दिनांक ०५/११/२०१८

धनतेरस पूजा मुहूर्त = ०६:०५ से ०८:०
प्रदोष काल = सायंकाल ०५:५०से ०८:१४
वृषभ काल = सायंकाल ०६:०५ से ०८:०१

शुभ ०९:२३से १०:४७
चंचल०१:३४ से ०२:५८
लाभ ०२:५८ से ०४ :२२
अमृत०४:२२ से ०५: ४५

Gurudevbhubnesh sharma:

किस समय क्‍या खरीदें

धनतेरस पर महज सामान लाने का ही महत्‍व नहीं होता बल्कि सही समय पर उपयुक्त सामान लेना भी महत्‍वपूर्ण होता है।

आइये जाने क‍ि किस सामान के लिए कौन सा मुहूर्त इस बार होगा सर्वोत्‍मा

सबसे पहले बात पूजन सामग्री की, इसे खरीदने का सही मुहूर्त है

प्रात 11:46 से 12:14 तक,
1:30 से 3:00 बजे तक
और 5:52 मिनट से 8:58 तक।

यदि वाहन खरीदने जा रहे हैं तो मुहूर्त इस प्रकार है

3:30 से 4:19 तक
और 4:46 से 5:16 तक।

धातु खरीदने और बर्तन आदि लेने का मुहूर्त इस प्रकार है

12:14 से 1:29 तक,
4:40 से 6:19 तक
और 9:30 से 1:39 तक।

ज्वेलरी खरीदें
12:14 से 1:44 तक,
4:00 बज करके 44 मिनट से 6:00 बज करके 14 मिनट तक,
7: 16 मिनट से 8:48 तक
और 9:30 से 12:30 तक

इलेक्ट्रॉनिक खरीदने का मुहूर्त इस प्रकार है
11:48 से 1:10 तक,
4:46 से 6:11 तक,
6:31 से 10:45 तक
और 12:14 से 1:30 तक।
4:24 से 6:00 बज करके 14 मिनट तकप्रॉपर्टी खरीदने का समय रहेगा।

वही कपड़े खरीदने का समय इस प्रकार है

12:11 से 1:45 तक,
4:44 से 6:14 तक
और 9:14 से 10:44 तक।

पूजन हेतु मूर्ति

प्रातः काल 10:15 से 4:30 तक,
10:15 से 12:00 बज करके 14 तक,
12:46 से 1:30 तक,
2:20 से 4:10 तक
और 5:00 बज करके 7 मिनट से 6:11 तक।

इस अवधि में मुहूर्त के अनुसार यदि आप खरीददारी करते हैं तो निश्चित रूप से आप और आपके परिवार पर धनवंतरी की कृपा बरसेगी।

Gurudevbhubnesh sharma
: धनतेरस के लिए धन की माता लक्ष्मी घर में आती हैं और वो सिर्फ साफ घर में ही प्रवेश करती हैं. इसीलिए इस दिन झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है.

Gurudev bhubnesh sharma22:
अगर हो सके तो धनतेरस पर तीन झाडू खरीदें. तीन झाडू साथ में खरीदना शुभ माना जाता है. दो या चार के जोड़े में झाडू की खरीद न करें. वहीं धनतेरस पर खरीदी गई झाडू को दिवाली के दिन सूर्योदय से पहले मंदिर में दान करने से घर में लक्ष्मी आती है.

प्रदोषकाल में दीपदान व लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहता है.
लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय,. व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है.
इस दिन भगवान धनवन्तरी समुद्र से कलश लेकर प्रकट हुए थे,
इसलिये इस दिन खास तौर से बर्तनों की खरीदारी की जाती है.
इस दिन बर्तन, चांदी खरीदने से इनमें 13 गुणा वृ्द्धि होने की संभावना होती है.

इसके साथ ही इस दिन सूखे धनिया के बीज खरीद कर घर में रखना भी परिवार की धन संपदा में वृ्द्धि करता है.

दीपावली के दिन इन बीजों को बाग/ खेतों में लागाया जाता है ये बीज व्यक्ति की उन्नति व धन वृ्द्धि के प्रतीक होते है.

धन तेरस पूजन
धन तेरस की पूजा शुभ मुहुर्त में करनी चाहिए. सबसे पहले तेरह दीपक जला कर तिजोरी में कुबेर का पूजन करना चाहिए.

धूप, दीप, नैवैद्ध से पूजन करें. और निम्न मंत्र का जाप करें.

'【यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्य अधिपतये
धन-धान्य समृद्धि मे देहि दापय स्वाहा ।'】

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे
संपर्क सूत्र
Gurudev bhubneshwar
Parnkuti ashram guna
9893946810
6262946810

Saturday, 3 November 2018

दीपावली के पांचों दिनो के लिए लग्न औऱ चौघड़िया मुहूर्त हमारे ब्लाग को ओपन करे (((धनतेरस/ नरक चौदस【 काली चौदस】/ दीपावली=【 गादी स्थापना स्याही भरना क़लम दवात सवारना आदि 】/गोवर्धन पूजा / भैयादूज )) आदी के मुहूर्त हमारे ब्लाग से प्राप्त करे एबं आगे भी शेयर भी करे।।

  
【【【【  【【०१】】】】】】】】

दिनांक ०५/११/२०१८

धनतेरस पूजा मुहूर्त = ०६:०५ से ०८:०
प्रदोष काल = सायंकाल ०५:५०से ०८:१४
वृषभ काल = सायंकाल ०६:०५ से ०८:०१

शुभ ०९:२३से १०:४७
चंचल०१:३४ से ०२:५८
लाभ ०२:५८ से ०४ :२२
अमृत०४:२२ से ०५: ४५

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ = ५/नवम्बर/२०१८ को  दोपहर ०१:२४ बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त = ५/नवम्बर/२०१८ को  रात्रि ११:४६ बजे

धनत्रयोदशी या धनतेरस के दौरान लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए
जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है
और लगभग २ घण्टे २४ मिनट तक रहता है।

धनतेरस पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं
क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं।

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【【【【【【०२】】】】】】】
दिनांक ०६/११/२०१८

काली चौदस निशिता पूजा का समय
= रात्रि ११:३८ से १२:३१+ त

चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ = ५/नवम्बर/२०१८ को रात्रि ११:४६ बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त = ६/नवम्बर/२०१८ को रात्रि१०:२७ बजे
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【【【【【【【【०३】】】】】】】

दिनांक ०७/११/२०१८

गादी स्थापना मुहूर्त /स्याही भरने का मुहूर्त / कलम दवात सवारने का मुहूर्त /

प्रता:०६:५४से०९:३८ तक

लाभ अमृत बेला/ दोपहर /११:००से१२:००/तक
दोपहर/ १२से१:३०/बजे तक राहु काल रहेगा
दोपहर /०३:०५से ०४/२७तक चंचल बेला
सायंकाल/ ०४:२७से०५:४८तक लाभ वेला

प्रदोष काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त = ०५:४८से ०८:१२
प्रदोष काल = सायंकाल ०५:२७ से ०८:०६
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वृषभ काल =सायंकाल०६:१९ /से०८:१५तक
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सिंह लग्न=अर्ध रात्रि काल१२:४६से/०३:०२तक
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बृश्चिक लग्न=प्रता:०७:३८से/0९:५५ तक
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कुम्भ लग्न दोपहर   = ०१:४३ से  ०३:४३ तक भी उपयोग में ले सकते  है
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अमावस्या तिथि प्रारम्भ = ६/नवम्बर/२०१८ को रात्रि १०:२७ बजे
अमावस्या तिथि समाप्त = ७/नवम्बर/२०१८ को सायंकाल ०६:३१ बजे

महानिशिता काल  तंत्र साधना या विशेष पाठ के लिए  है।

रात्रि = ११:३८ से १२:३१+
सिंह काल
= रात्रि१२:४६+ से रात्रि०३:०२+

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लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है
और लगभग २ घण्टे २४ मिनट तक रहता है।
कुछ स्त्रोत लक्ष्मी पूजा को करने के लिए महानिशिता काल भी बताते हैं।
हमारे विचार में महानिशिता काल तांत्रिक समुदायों और पण्डितों, जो इस विशेष समय के दौरान लक्ष्मी पूजा के बारे में अधिक जानते हैं,
उनके लिए यह समय ज्यादा उपयुक्त होता है।

सामान्य लोगों के लिए हम प्रदोष काल मुहूर्त उपयुक्त बताते हैं।

लक्ष्मी पूजा को करने के लिए हम चौघड़िया मुहूर्त को देखने की सलाह नहीं देते हैं
क्योंकि वे मुहूर्त यात्रा के लिए उपयुक्त होते हैं।

लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है
जब स्थिर लग्नप्रचलित होती है।
ऐसा माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाये तो लक्ष्मीजी घर में ठहर जाती है।
इसीलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है।
 वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है
और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह
अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है। 
दिवाली की पूजा के लिए
प्रदोष काल एबं चार लग्न मुहूर्त होते है –

(१)वृश्चिक लग्न – यह दिवाली के दिन की सुबह का समय होता है. वृश्चिक लग्न में मंदिर, हॉस्पिटल, होटल्स, स्कूल, कॉलेज में पूजा होती है. राजनैतिक, टीवी फ़िल्मी कलाकार वृश्चिक लग्न में ही लक्ष्मी पूजा करते है.

(2)कुम्भ लग्न – यह दिवाली के दिन दोपहर का समय होता है. कुम्भ लग्न में वे लोग पूजा करते है, जो बीमार होते है, जिन पर शनि की दशा ख़राब चल रही होती है, जिनको व्यापार में बड़ी हानि होती है.

(३)वृषभ लग्न – यह दिवाली के दिन शाम का समय होता है. यह लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय होता है.

(४)सिम्हा लग्न – यह दिवाली की मध्य रात्रि का समय होता है. संत, तांत्रिक लोग इस दौरान लक्ष्मी पूजा करते है.

महानिशिता काल में तांत्रिक और पंडित लोग पूजा करते है, ये वे लोग होते है, जिन्हें लक्ष्मी पूजा के बारे में अच्छे से जानकारी होती है.

लक्ष्मी प्राप्ति मंत्र : ॐ हिम् महालक्ष्मै च विदमहै, विष्णु पत्नये च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात

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【【【【【【【०४】】】】】】】】
दिनांक ०८/११/२०१८

वामन जो कि भगवान विष्णु के एक अवतार है,
उनकी राजा बलि पर विजय और बाद में बलि को पाताल लोक भेजने के कारण इस दिन उनका पुण्यस्मरण किया जाता है।
यह माना जाता है कि भगवान वामन द्वारा दिए गए वरदान के कारण असुर राजा बलि इस दिन पातल लोक से पृथ्वी लोक आता है।
इस दिन नया कार्य प्रारंभ किया जाता है

गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त 
= ०६:५५ से ०८:१७
शुभ वेला दोपहर /११:००से१२:२१तक
चंचल वेला दोपहर/१२/से१२:४३तक अभिजित
लाभवेला दोपहर /१२:२१से १:३०/तक

गोवर्धन पूजा दोपहर वाद 

मुहूर्त = ०३:१८ से ०५:२७

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ = ७/नवम्बर/२०१८ को ०६:३१ बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त = ८/नवम्बर/२०१८ को शाम ०६:०७ बजे

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【【【【【【【०५】】】】】】】】

दिनांक /०९/११/२०१८

भाई दूज तिलक का समय

भाई दूज टीका मुहूर्त  दोपहर = ०१:०९ से ०३:१७

द्वितीय तिथि प्रारम्भ = ८/नवम्बर/२०१८ को रात्रि ०९:०७ बजे
द्वितीय तिथि समाप्त = ९/नवम्बर/२०१८ को रात्रि ०९:२० बजे

भाई दूज के दिन का चौघड़िया मुहूर्त
चंचल ०६:३८ से ०८:०१ तक
लाभ ०८:०१से०९:२४ तक
अमृत ०९:२४से १०:४७ तक
शुभ १२:११ से०१:३४ तक

हमारी ओर से दीपावली की  ढेरसारी शुभकामनाओ  सहित  आपको दीपावली मंगलमय हो

मुहूर्त  बहुत ही सावधानी पूर्वक   बनाये गए है।
फिर भी अपने पण्डित जी का आशीर्वचन लेकर ही पूजन करे  ।

= आपके अपने=
गुरुदेव  भुबनेश्वर
[पर्णकुटी आश्रम गुना ]
{= संपर्क सूत्र =}
【०९८९३९४६८१०】
【०६२६२९४६८१०】

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