ज्योतिष समाधान
Friday, 7 October 2016
दशहरे पर शमी का पूजन देगा आपको धन और बैभव
Monday, 3 October 2016
दुर्गा पूजन में हवन सामग्री लिस्ट लिंक ओपन करे
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हमारे संस्थान में समस्त प्रकार की जटिल
समस्यायो का निदान ज्योतिष द्वारा सरल उपाय बताकर किया जाता है । कुंडली न होने पर
जन्म दिनांक
जन्म समय
जन्म स्थान तीनों जानकारी देवे
परामर्श सुल्क "फोन द्वारा सम्पर्क करने पर निश्चत किया जावेगा
पंडित =परमेश्वर दयाल शर्मा
तिलक चौक मक्सूदन गढ़
जिला =गुना =m.p
Contect no.=9893397835
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पंडित =भुवनेश्वर शास्त्री
कस्तूरबा नगर पर्णकुटी
महेन्द्रा शोरूम के सामने
जिला गुना :मध्यप्रदेश
संपर्क सूत्र "09893946810
संगीतमय
श्री मदभागवत कथा एबं श्री रामकथा श्री शिव पुराण प्रवचन आदि कार्य के लिए संपर्क करे
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पंडित =घनश्याम शस्त्री
इन्दिरा कालोनी
भोपाल रोड मकसुदंगण
संपर्क सूत्र =09893983084
समस्त प्रकार के अद्द्यात्मिक कर्मकांड से सम्बन्धित
जैसे =महामृत्युंजय अनुष्ठान
सतचण्डि पाठ समस्त प्रकार के यज्ञ
सन्तान प्राप्ति अनुष्ठान
दाम्पत्य सुख हेतु उपाय
लक्ष्मी प्राप्ति अनुष्ठान आदि कार्य के लिए सम्पर्क करे
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१】तिल
२】चावल
३】जौ
४】शकर
५】हवन सामग्रि
६】खोपरा गोला
७】घी
८】लौंग
९】इलायची
१०】मिश्री
११】कमल गट्टा
१२】खड़े उड़द
१३】राल
१४】समुद्र फेन
१५】खड़ी हल्दी
१६】पिसी हल्दी
१७】लाजा
१८】सहदेवी
१९】जायफल
२०】भाँग
२१】गांजा
२२】रक्त गुंजा
२३】सफेद गुंजा
२४】कपूर
२५】शंख पुश्पी
२६】गूगल
२७】भोज पत्र
२८】शहद
२९】गोल सुपाड़ी
३०】जटामासी
३१】विष्णु क्रान्ता
३२】लाल चन्दन
३३】सफेद चन्दन
३४】हर्ताल
३५】पीली सर्सो
३६】काली सर्सो
३७】मैनसिल
३८】शिलाजीत
३९】वच
४०】राजान
४१】मधुआसव
४२】ग़ोखरु
४३】कालीमिर्च
४४】गुलाल
४५】अबीर
४६】इत्र
४७】अष्टांग धूप्
४८】पंचमेवा
४९】दारू हल्दी
५०】ब्राह्मी
५१】सतावरी
५२】सोंठ
५३】केसर
५४】जावित्री
५५】दालचीनी
५६】मसूर
५७】कुमकुम
५८】लाजवंती
५९】चिरोंजी
६०】काली हल्दी
६१】कस्तूरी
६२】वज्रदंती
६३】शिवलिंगी बीज
६४】आमी हल्दी
६५】कन गूगल
६६】इंद्र जो
६७】मैनफल
६८】मालकांगनी
६९】बहेड़ा
७०】दाल चीनी
७१】मजीठ
७२】नाग केसर
७३】आशापुरी धूप्
७४】सर्वोखधी
७५】खोपरा बूरा
७६】अगर
७७】हिंगुल
७८】नारियल
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>>>अन्य जगह का सामान >>>
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१】दूध
२】दही
३】फूल
४】दूर्वा
५】अनेक प्रकार के फूल
६】नवग्रह समीधा
७】पीपल के पत्ते
८】अशोक के पत्ते
९】केला
१०】केंथ
११】खिन्नी
१२】नीम गिलोय
१३】बीलफल
१४】आंवला
१५】आम्रफल
१६】कटहल
१७】कागजी नीबू
१८】सिंघाड़ा
१९】लोकी
२०】गुड़
२१】लाल कनेर फूल
२२】लाल कनेर के पत्ता
२३】शमी पत्र
२४】अर्कपुष्प
२५】दाड़िम के फूल
२६】अशोक पुष्प
२७】कमल पुष्प
२८】पलाशपत्र
२९】खेर के पत्ते
३०】सरफोक
३१】सीताफल
३२】गुलकंद
३३】खाजा
३४】काजल डिब्बी
३५】हीगुल
३६】गन्ना
३७】नारंगी
३८】नारीकेलफल
३९】मोर के पंख
४०】बड़ के पत्ते
४१】माँतुलिंग
४२】मक्खन
४३】हरी सब्जी
४४】फूल प्रियंगु
४५】अनार के पत्ते
४६】अनार छिलके
४७】अनार
४८】कुष्मांड
४९】गिलकी
५०】ताड के पत्ते
५१】पालक
५२】मिठाई
५३】ऋतुफल
५४】पान
५५】कन्या के वस्त्र
५६】भैरव के वस्त्र
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========महा आहुति सामग्री =======
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१】प्रथम अध्याय
(महाआहुति सामग्री)
एक पान पर देशी घी में भिगोकर
कपिथ्य फल (केंथ)
1 कमलगटटा,
1 सुपारी,
2 लौंग,
2 छोटी इलायची,
गुग्गुल,
शहद
पुष्प
यह सब चीजें सुरवा में रखकर खडे होकर आहुति देना।
२】द्वितीय अध्याय
(महाआहुति सामग्री)
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
,गुग्गुल विशेष।
कमलगट्टा
नारियल फलखंड
पुष्प
लौंग
इलायची
सुपारी
३】त़ृतीय अध्याय
(महाआहुति सामग्री )
शहद विशेष।
विजोरा नीबू
चन्दन
नीमगिलोय
गुगुल
कमलगट्टा
पेठा
लौंग
इलायची
सुपारी
भोजपत्र
पुष्प
फल
४】चतुर्थ अध्याय
( महाआहुति सामग्री )
पान के पत्ते पर
साकल्य्
पायस
कमलगट्टा
विल्वपत्र
लौंग
इलायची
गुगुल
पुष्प
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक सं 1 से 11 मिश्री व खीर विशेष, चतुर्थ अध्याय के मंत्र संख्या 24 से 27 तक इन 4 मंत्रों की आहुति नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से देह नाश होता है। इस कारण इन चार मंत्रों के स्थान पर ओंम नम: चण्डिकायै स्वाहा बोलकर आहुति देना तथा मंत्रों का केवल पाठ करना चाहिए इनका पाठ करने से सब प्रकार का भय नष्ट हो जाता है।
५】पंचम अध्याय
(महाआहुति सामग्री)
पान के पत्ते पर
साकल्य्
लौंग
इलायची
सुपारी
गुगुल
कमलगट्टा
कपूर
स्वेतचन्दन
पुष्प
फल
बिजोरा
६】षष्टम अध्याय
(महाआहुति सामग्री )
पान का पत्ता
साकल्य्
कमलगट्टा
गुगुल
भोजपत्र
कुष्मांड
नारंगी
नारीकेलफल
ऋतुफल
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं 23 भोजपत्र।
७】सप्तम अध्याय
( महाआहुति सामग्री )
पान
शाकल्य
लौंग
इलायची
चिरोंजी
लाजवंती
पुष्प
कमलगट्टा 2
जायफल 2
कुष्मांड फलखंड
कर्पूर
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक सं 10 दो जायफल
श्लोक संख्या 19 में सफेद चन्दन
श्लोक संख्या 27 में इन्द्र जौं।
८】अष्टम अध्याय
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 54 एवं 62 लाल चंदन।
( महाआहुतिसामग्री)
पान
कमलगट्टा
इलायची
सूपारी
लौंग
गुगुल
कुष्मांड फल खंड
लाल चन्दन
मधु
साकल्य
९】नवम अध्याय
प्रथम अध्याय की सा मग्री अनुसार
श्लोक संख्या
श्लोक संख्या 37 में 1 बेलफल 40 में गन्ना।
(महाआहुतिसामग्री)
पान
साकल्य
लॉंग
सुपारी
इलायची
कमलगट्टा
विजोरा नीबू
कुष्मांड खंड
इच्छु खंड ( गन्ना)
विल्वफल
मैन फल
१०】दशम अध्याय
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 5 में समुन्द्र झाग 31 में कत्था।
( महाआहुति सामग्री)
पान
साकल्य्
लॉंग
इलायची
सुपारी
कस्तूरी
कमलगट्टा
गुगुल
विल्वफल
कुष्मांड खंड
फल
पुष्प मैनसिल
मातुलिंग
११】एकादश अध्याय
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 2 से 23 तक पुष्प व खीर
श्लोक संख्या 29 में गिलोय
31 में भोज पत्र
39 में पीली सरसों
42 में माखन मिश्री
44 में अनार व अनार का फूल
श्लोक संख्या 49 में पालक
श्लोक सं54 एवं 55 में फूल चावल और सामग्री।
(महाहुति सामग्री)
पान
लौंग
इलायची
कपूर
शकर
पत्र
पुष्प
फल
कमलगट्टा
सुपारी
मिश्री
पायस
गुगुल
इच्छुखंड (गन्ना)
दाणीम् के फल और फूल
साकल्य्
१२】द्वादश अध्याय
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 10 में नींबू काटकर रोली लगाकर और पेठा
श्लोक संख्या 13 में काली मिर्च
श्लोक संख्या
16 ममें बाल खाल
श्लोक संख्या 18 में कुशा
श्लोक संख्या
19 में जायफल और कमल गटटां
श्लोक संख्या 20 में ऋीतु फल फूल चावल और चन्दन
श्लोक संख्या 21 पर हलवा और पुरी
श्लोक संख्या 40 पर कमल गटटा मखाने और बादाम
श्लोक संख्या 41 पर इत्र, फूल और चावल ।
(महाहुति सामग्री)
पान
साकल्य्
लौंग
इलायची
सुपारी
अगर
केशर
कस्तूरी
कमलगट्टा
पत्र
पुष्प
फल
जायफल
विल्वफल
मिश्री
१३】त्रयोदश अध्याय
प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक सर्ंख्या 27 से 29 तक फल व फूल।
( महाआहुति सामग्री)
पान
साकल्य्
लौंग
इलायची
सुपारी
विल्वफल
गुगुल
कमलगट्टा
फल
शमीपत्र
केशर
स्वेत पुष्प
केशर
कपूर
अर्कपुष्प
नारिकेल खंड
Saturday, 1 October 2016
गणपति जी की चमत्कारी आरती लिंक ओपन करे
हे गणपति तेरी आरती गाऊँ
सिद्ध विनायक तेरी आरती गाऊँ।
1】विघ्न विनायक रूप तुम्हारो
हमरे गणपति कष्ट निवारो ।
प्यारी छवि तेरी मन में बसाऊँ
है गणपति तेरी आरती गाऊँ।।
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2】मोदक प्रिय है भोग तुम्हारो
दूर्वा करती कुल उजियारो।
एकदंत रूप में ह्रदय में बसाऊँ
है गणपति तेरी आरती गाऊँ।।
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3】प्रथम् पूज्य हो आके विराजो
हमरे गणपति काज सवारो।
तेरे चरणों में विनती सुनाऊँ
है गणपति तेरी आरती गाऊँ।।
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4】शिवजी के हो तुम प्राणपियारे
माँ गौरा के अखियन के तारे ।
तुमरी शरण में बार बार आऊँ
है गणपति तेरी आरती गाऊँ।।
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गड़पति जी की सिद्ध आरती
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जय गौरी नन्दा देवा जय गौरी नंदा
गणपति आनंद कन्दा मै चरनन बन्दा ।
1】सूँड़ सूडालो नयन विसालो
कुंडल झल कन्दा।।
कुम कुम केसर चन्दन
सिंदूर बद नंदा।।
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2】 मुकुट सुघड़ शोभन्ता
मस्तक शोभन्ता।
बहिया बाजू बन्दा
पहुंचे गिरिखन्दा।।
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3】 रतन जड़ित सिंहासन
शोभत आनंदा।
गल मूतियन की माला
सुर नर मुनि बन्दा ।।
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4】 मूसक बाहन राजत
शिव सुत आनंदा।
भजत शिवानंद स्वामी
मेटत भव फन्दा।।
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Wednesday, 28 September 2016
शंख कितने प्रकार के होते है और शंख के क्या फायदे है
तुलसी करेगी आपके रोगों को ठीक
भगवान कृष्ण को अति प्रिय मानी जाने वाली तुलसी लगभग सभी हिन्दुओं के आंगनों में देखी जा सकती है। तुलसी मुख्यतया दो प्रकार की होती है, श्यामा एवं रामा। श्यामा तुलसी के पत्ते हल्का काला रंग लिये हुये होते हैं, जबकि रामा तुलसी के पत्ते हरे एवं भूरे रंग के होते हैं। तुलसी के बारे में एक कथा प्रचलित है कि एक बार जब युधिष्ठर राजसूय यज्ञ कर रहे थे उस समय सभी राजा जीते जा चुके थे पर जरासंध को जीतना मुश्किल हो रहा था क्योंकि उसकी पत्नी वृंदा पतिव्रता थी उसके पतिव्रत धर्म के कारण वह मारे नहीं मरता था। वृंदा का पतिवृत धर्म नष्ट करने के लिये कृष्ण ने कपट से जरासंध का रूप धारण कर लिया और वृंदा का पतिवृत धर्म नष्ट कर दिया। जब वृंदा को अपने साथ हुये इस धोखे का पता चला तो उसने कृष्ण को श्राप दिया कि तुम पत्थर हो जाओ जिससे कृष्ण सालिगराम बन गये। उसी समय वहां लक्ष्मी जी आ गईं उन्होंने गुस्से में वृंदा को श्राप दिया कि तुम जड़ हो जाओ जिससे वृंदा तुलसी रूपी पौधा बन गई। झगड़ा बढ़ता देखकर भगवान कृष्ण ने अपनी गलती स्वीकार करते हुये बीच-बिचाव कराया और वृंदा को वरदान दिया कि आज से मैं किसी भी पूजन में कोई भी भोग बिना तुलसी के स्वीकार नहीं करूंगा। तभी से भगवान के पूजन में तुलसी दल का प्रयोग अनिवार्य हो गया। यह तो हुई पौराणिक बात। इस संबंध में विज्ञानियों का कहना है कि तुलसी को धर्म को जोड़ने का उद्देश्य इस छोटे से पौधे को लुप्त होने से बचाना था, भारत के प्राचीन ऋषि मुनि काफी विद्वान थे उन्हें मालूम था कि तुलसी असंख्य गुणों वाला पौधा है अतः इसे धर्म से जोड़ दिया तो यह अन्य वनस्पतियों की तरह विलुप्त नहीं होगा। सच भी है यदि इस पौधे को धर्म से न जोड़ा गया होता तो शायद तमाम अन्य वनस्पतियों की तरह यह भी लुप्त हो गया होता अथवा लुप्त होने की कगार पर होता। तुलसी की जड़, पत्ती, तना, बीज (मंजरी) आदि हर भाग किसी न किसी रोग की औषधि है, आइये एक नजर डालते हैं तुलसी के औषधीय गुणों पर:-
1.】 प्रातः खाली पेट 2-3 चम्मच तुलसी के रस का सेवन किया जाये तो शारीरिक बल एवं स्मरण शक्ति में वृद्धि के साथ-साथ व्यक्तित्व भी प्रभावशाली बनता है।
2. 】शरीर के बजन को नियंत्रित करने हेतु भी तुलसी गुणकारी है, इसके नियमित सेवन से भारी व्यक्ति का बजन घटता है एवं दुबले का बढ़ता है।
3. 】यदि तुलसी की पत्तियों को काली मिर्च के साथ सेवन किया जाये तो मलेरिया एवं मियादी बुखार में आराम मिलता है।
4. 】चाय बनाते समय कुछ पत्ती तुलसी की डाल दी जाये ंतो सर्दी बुखार एवं मांस पेशियों के दर्द में राहत मिलती है।
5.】 तुलसी के रस में खड़ी शक्कर मिला कर पीने से सीने के दर्द एवं खांसी में राहत मिलती है।
6. 】दूषित पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां डालने से पानी शुद्ध हो जाता है।
7. 】पेट में दर्द होने पर तुलसी रस और अदरक रस को समान मात्रा में लेकर दिन भर में तीन चार बार पीने से दर्द का नाश होता है।
8. 】10 ग्राम तुलसी के साथ 5 ग्राम शहद एवं 5 ग्राम पिसी काली मिर्च का सेवन किया जाये तो पाचन शक्ति बढ़ती है।
9. 】चर-पांच भुने हुये लौंग के साथ तुलसी की पत्ती चूसने से सभी प्रकार की खांसी से राहत मिलती है।
10. 】तुलसी की पत्तियां चबाने से मुंह से आने वाली दुर्गंध समाप्त होती है।
11.】 तुलसी के ताजे पत्तों को गर्मकर नमक के साथ खाने से बंद गला खुल जाता है।
12.】 तुलसी की पत्तियां प्रत्येक सुबह पानी के साथ पीसकर लगाने से एक्जिमा एवं खुजली से राहत मिलती है।
13. 】तुलसी रस की गरम बंूदें कान में डालने से कान के दर्द में राहत मिलती है।
14.】 मुंहासों पर तुलसी का लेप करने से मुंहासे समाप्त होते हैं।
15.】 तुलसी के ताजे रस का सेवन उल्टी को रोकने में काफी कारगर है। इस प्रकार इस नन्हे से पौधे का प्रत्येक भाग अत्यंत गुणकारी है।
तुलसी करे पुराने से पुराना रोग ठीक
धार्मिक महत्व के अलावा तुलसी को एक औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है. इसका इस्तेमाल कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है. सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है तुलसी. आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय गुणों का एक विशेष स्थान है. तुलसी को संजीवनी बूटी के समान भी माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सा में तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद बताया गया है. तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना-अपना अलग महत्व है. आमतौर पर घरों में दो तरह की तुलसी देखने को मिलती है, एक जिसकी पत्तियों का रंग थोड़ा गहरा होता है और दूसरा, जिसकी पत्तियों का रंग हल्का होता है. तुलसी शरीर का शोधन करने के साथ-साथ वातावरण का भी शोधन करती है तथा पर्यावरण संतुलित करने में भी मदद करती है. आइये आज आपको बताते हैं तुलसी के कुछ घरेलू नुस्खों से होने वाले फायदे के बारे में, जिन्हें अपनाकर आपको कई पुराने रोगों से निजात मिल सकती है.
1. 】टीबी के रोग को दूर भगाने में बेहद कारगर है तुलसी तुलसी, दमा और टीबी रोग में बहुत लाभकारी है. रोज़ाना तुलसी खाने से दमा और टीबी नहीं होता. तुलसी के औषधीय गुण के कारण यह बीमारी के लिए ज़िम्मेदार जीवाणु को बढ़ने से रोकती है. शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है.
2. 】मलेरिया को रखे दूर तुलसी की 11 पत्तियों का 4 खड़ी काली मिर्च के साथ सेवन करने से, मलेरिया और टाइफाइड को ठीक किया जा सकता है. मच्छरों के काटने से होने वाली ज़्यादातर बीमारियों का इलाज तुलसी के सेवन के द्वारा किया जा सकता है.
3. 】बुखार में 'पैरासिटामॉल’ की जगह खायें तुलसी सभी प्रकार के बुखार को जड़ से खत्म करने के लिए तुलसी कारगर साबित होती है. 20 तुलसी दल और 10 काली मिर्च मिलाकर बनाए गए काढ़े को पीने से पुराने से पुराना बुखार छू-मंतर हो जाता है. तुलसी की मदद से किसी भी तरह के बुखार को बगैर पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक के उपयोग के भी ठीक किया जा सकता है.
4. 】कुष्ठ रोग में लाभकारी होती है तुलसी की जड़ तुलसी की जड़ को पीसकर, सोंठ मिलाकर जल के साथ रोज़ सुबह-सुबह पीने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है. कुष्ठ रोग में तुलसी के पत्तों का रस निकालकर पीने से लाभ फायदा मिलता है. आयुर्वेदाचार्यों के मुताबिक़, तुलसी के बगीचे के आस-पास रहने वाले लोगों को ‘कुष्ठ’ रोग होने की संभावना न के बराबर होती है.
5. 】माइग्रेन और साइनस में मिलती है राहत तुलसी का काढ़ा पीने से माइग्रेन और साइनस में आराम मिलता है. अगर आप पुराने सिर दर्द से परेशान हैं, तो रोज़ सुबह और शाम को एक चौथाई चम्मच तुलसी के पत्तों का रस, एक चम्मच शुद्ध शहद के साथ लेने से 15 दिनों में आपका दर्द पूरी तरह से ठीक हो सकता है.
6. 】आंखों के रोगों के लिए रामबाण औषधि है तुलसी श्यामा तुलसी के पत्तों का दो-दो बूंद रस 14 दिनों तक आंखों में डालने से रतौंधी ठीक हो जाती है. आंखों का पीलापन ठीक होता है. आंखों की लाली दूर करता है. तुलसी के पत्तों का रस काजल की तरह आंख में लगाने से आंख की रौशनी बढ़ती है.
7.】 सभी वात रोगों को दूर करने में है सहायक गठिया के दर्द में तुलसी की जड़, पत्ती, डंठल, फल और बीज को मिलाकर उसका चूर्ण बनाएं. इसमें पुराना गुड़ मिलाकर 12-12 ग्राम की गोलियां बना लें. सुबह-शाम गाय या बकरी के दूध के साथ सेवन करने से गठिया व जोड़ों के दर्द में लाभ होता है.
8.】 किडनी के रोगों में भी है लाभकारी किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाए गए जूस को शहद के साथ 6 महीनों तक रोज़ाना पीने से पथरी खत्म होकर बाहर निकल जाती है.
9. 】सांप के काटने पर लगाएं तुलसी का लेप अगर किसी को सांप ने काट लिया है, तो पीड़ित व्यक्ति को तुरंत तुलसी खिलानी चाहिए. ऐसा करने से उसकी जान बच सकती है. जिस स्थान पर सांप ने काटा हो, उस पर तुलसी की जड़ को मक्खन या घी में घिसकर लेप कर देना चाहिए. जैसे-जैसे ज़हर खिंचता चला जाता है, इस लेप का रंग सफ़ेद से काला हो जाता है. तुलसी के हर हिस्से को सांप के ज़हर में उपयोगी माना गया है.
10.】 दिल को मजबूत बनाती है तुलसी तुलसी के दस पत्ते, पांच काली मिर्च और चार बादाम को पीसकर आधा गिलास पानी में एक चम्मच शहद के साथ लेने से सभी प्रकार के हृदय रोग ठीक हो जाते हैं. तुलसी की 4-5 पत्तियां, नीम की दो पत्ती के रस को 2-4 चम्मच पानी में पीसकर 5-7 दिन रोज़ सुबह ख़ाली पेट खाने से हाई ब्लड प्रेशर ठीक हो जाता है.
11】. यौन रोगों के इलाज में कारगर है पुरुषों में शारीरिक कमजोरी होने पर तुलसी के बीज का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है. इसके अलावा यौन-दुर्बलता और नपुंसकता में भी इसके बीज का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद रहता है.
12】. अनियमित पीरियड्स की समस्या को करे दूर अकसर महिलाओं को पीरियड्स में अनियमितता की शिकायत हो जाती है. ऐसे में तुलसी के बीज का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है. पीरियड्स की अनियमितता को दूर करने के लिए तुलसी के पत्तों का नियमित रूप से सेवन किया जा सकता है.