ज्योतिष समाधान

Tuesday, 28 September 2021

चोरी की दिशा जानना ऐबं नाम जानना 9893946810

आइये जानते हैं किस नक्षत्र का क्या परिणाम होता है:

1. रोहिणी, पुष्य, उत्तरा फाल्गुनी, विशाखा, पूर्वाषाढ़ा, धनिष्ठा और रेवती को ज्योतिष में अंध नक्षत्र माना गया है। इन नक्षत्रों में चोरी होने वाली वस्तु पूर्व दिशा में जाती है और जल्दी मिल जाती है। इन नक्षत्रों में यदि कोई वस्तु चोरी हुई है तो वह अधिक दूर नहीं जाती है उसे आसपास ही तलाशना चाहिए।

2. मृगशिरा, अश्लेषा, हस्त, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, शतभिषा, अश्विनी ये मंद नक्षत्र कहे गए हैं। इन नक्षत्रों में यदि कोई वस्तु चोरी होती है तो वह तीन दिन में मिलने की संभावना रहती है। इन नक्षत्रों में गई वस्तु दक्षिण दिशा में प्राप्त होती है। साथ ही वह वस्तु रसोई, अग्नि या जल के स्थान पर छुपाई होती है।

3. आर्द्रा, मघा, चित्रा, ज्येष्ठा, अभिजीत, पूर्वाभाद्रपद, भरणी ये मध्य लोचन नक्षत्र होते हैं। इन नक्षत्रों में चोरी गई वस्तुएं पश्चिम दिशा में मिल जाती हैं। वस्तु के संबंध में जानकारी 64 दिनों के भीतर मिलने की संभावना रहती है। यदि 64 दिनों में न मिले तो फिर कभी नहीं मिलती। इस स्थिति में वस्तु के अत्यधिक दूर होने की जानकारी भी मिल जाती है, लेकिन मिलने में संशय रहता है।

4. पुनर्वसु, पूर्वाफाल्गुनी, स्वाति, मूल, श्रवण, उत्तराभाद्रपद, कृतिका को सुलोचन नक्षत्र कहा गया है। इनमें गई वस्तु कभी दोबारा नहीं मिलती। वस्तु उत्तर दिशा में जाती है, लेकिन पता नहीं लगा पाता कि कहां रखी गई है या आप कहां रखकर भूल गए हैं।

भद्रा, व्यतिपात और अमावस्या में गया धन प्राप्त नहीं होता।

प्रश्न: लग्न के अनुसार भी चोरी गई वस्तु के संबंध में विचार किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति चोरी गई वस्तु के संबंध में जानने के लिए आए और प्रश्न करे तो जिस समय वह प्रश्न करे उस समय की लग्न कुंडली बना लेना चाहिए। या जिस समय वस्तु चोरी हुई है उस समय गोचर में जो लग्न चल रहा था उसके अनुसार फल कथन किया जाता है।

चोर ब्राह्मण वर्ग का व्यक्ति होता है

1. मेष लग्न मेष वस्तु चोरी हुई हो प्रश्नकाल में मेष लग्न हो तो चोरी गई वस्तु पूर्व दिशा में होती है। चोर ब्राह्मण वर्ग का व्यक्ति होता है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है। नाम में दो या तीन अक्षर होते है2. वृषभ लग्न में वस्तु चोरी हुई हो तो वस्तु पूर्व दिशा में होती है और चोर क्षत्रिय वर्ण का होता है। उसके नाम में आदि अक्षर म रहता है तथा नाम चार अक्षरों वाला होता है।

2. वृषभ लग्न में वस्तु चोरी हुई हो तो वस्तु पूर्व दिशा में होती है और चोर क्षत्रिय वर्ण का होता है। उसके नाम में आदि अक्षर म रहता है तथा नाम चार अक्षरों वाला होता है।

3. मिथुन लग्न में चोरी गई वस्तु आग्नेय कोण में होती है। चोरी करने वाला व्यक्ति वैश्य वर्ण का होता है और उसका नाम क ककार से प्रारंभ होता है। नाम में तीन अक्षर होते हैं।


4. कर्क लग्न में वस्तु चोरी होने पर दक्षिण दिशा में मिलती है और चोरी करने वाला शूद्र होता है। उसका नाम त अक्षर से प्रारंभ होता है और नाम में तीन वर्ण होते हैं।

वस्तु नैऋत्य कोण में होती है

5. सिंह लग्न में चोरी हो तो वस्तु नैऋत्य कोण में होती है। चोरी करने वाला नौकर, सेवक होता है। चोर का नाम न से प्रारंभ होता है और नाम तीन या चार अक्षरों का होता है।

6. प्रश्नकाल या चोरी के समय कन्या लग्न हो तो चोरी गई वस्तु पश्चिम दिशा में होती है। चोरी करने वाली कोई स्त्री होती है और उसका नाम म से प्रारंभ होता है। नाम में कई वर्ण हो सकते हैं।

7. चोरी के समय तुला लग्न हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में जानना चाहिए। चोरी करने वाला पुत्र, मित्र, भाई या अन्य कोई संबंधी होता है। इसका नाम म से प्रारंभ होता है और नाम में तीन वर्ण होते हैं। तुला लग्न में गई वस्तु बड़ी कठिनाई से प्राप्त होती है।

वस्तु नैऋत्य कोण में होती है

8. वृश्चिक लग्न में चोरी गई वस्तु पश्चिम दिशा में होती है। चोर घर का नौकर ही होता है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है। नाम चार अक्षरों वाला होता है। चोरी करने वाला उत्तम वर्ण का होता है।

9. प्रश्नकाल या चोरी के समय धनु लग्न हो तो चोरी गई वस्तु वायव्य कोण में होती है। चोरी करने वाली कोई स्त्री होती है और उसका नाम स अक्षर से प्रारंभ होता है। नाम में चार वर्ण पाए जाते हैं।

10. चोरी के समय मकर लग्न हो तो चोरी गई वस्तु उत्तर दिशा में समझनी चाहिए। चोरी करने वाला वैश्य जाति का होता है। नाम चार अक्षरों का होता है और वह स से प्रारंभ होता है।

11. प्रश्नकाल या चोरी के समय कुंभ लग्न हो तो चोरी गई वस्तु उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में होती है। इस प्रश्न लग्न के अनुसार चोरी करने वाला व्यक्ति कोई मनुष्य नहीं होता बल्कि चूहों या अन्य जानवरों के द्वारा इधर-उधर कर दी जाती है।

12. मीन लग्न में वस्तु चोरी हुई हो तो वस्तु ईशान कोण में होती है। चोरी करने वाला निम्न जाति का व्यक्ति होता है। वह व्यक्ति चोरी करके वस्तु को जमीन में छुपा देता है। ऐसे चोर का नाम व अक्षर से प्रारंभ होता है और उसके नाम में तीन अक्षर रहते हैं। चोर कोई परिचित महिला या नौकरानी भी हो सकती है।

Monday, 20 September 2021

श्राध्द कैसे करे 9893946810



पितृ पक्ष श्राद्ध तर्पण नियम
गरुड़ पुराण के अनुसार,
पितृ पक्ष में जिनकी माता या पिता अथवा दोनों इस धरती से विदा हो चुके हैं उन्हें आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से आश्विन अमावस्या तक जल, तिल, फूल से पितरों का तर्पण करना चाहिए।
जिस तिथि को माता-पिता की मृत्यु हुई हो उस दिन उनके नाम से अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए।

तर्पण पिता को जल देने का मंत्र
अपने गोत्र का नाम लेकर बोलें,

गोत्रे अस्मतपिता (पिता का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः

इस मंत्र को बोलकर गंगा जल या अन्य जल में दूध, तिल और जौ मिलकर 3 बार पिता को जलांजलि दें।

जल देते समय ध्यान करें कि वसु रूप में मेरे पिता जल ग्रहण करके तृप्त हों।
इसके बाद पितामह को जल जल दें। 

पितामह को जल जल दें।

तर्पण पितामह को जल देने का मंत्र

अपने गोत्र का नाम लेकर बोलें,

गोत्रे अस्मत्पितामह (पितामह का नाम) शर्मा वसुरूपत् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जलं वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः।

इस मंत्र से पितामह को भी 3 बार जल दें।


तर्पण माता को जल देने का मंत्र

जिनकी माता इस संसार के विदा हो चुकी हैं उन्हें माता को भी जल देना चाहिए।

माता को जल देने का मंत्र पिता और पितामह से अलग होता है।

इन्हें जल देने का नियम भी अलग है।

चूंकि माता का ऋण सबसे बड़ा माना गया है इसलिए इन्हें पिता से अधिक बार जल दिया जाता है।

माता को जल देने का मंत्रः-

(गोत्र का नाम लें)
गोत्रे अस्मन्माता (माता का नाम) देवी वसुरूपास्त् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जल वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः।

इस मंत्र को पढ़कर जलांजलि पूर्व दिशा में 16 बार, उत्तर दिशा में 7 बार और दक्षिण दिशा में 14 बार दें।

दादी के नाम पर तर्पण

(गोत्र का नाम लें)

गोत्रे पितामां (दादी का नाम)

देवी वसुरूपास्त् तृप्यतमिदं तिलोदकम गंगा जल वा तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः, तस्मै स्वधा नमः।

इस मंत्र से जितनी बार माता को जल दिया है दादी को भी जल दें।

श्राद्ध में श्रद्धा का महत्व सबसे अधिक है इसलिए जल देते समय मन में माता-पिता और पितरों के प्रति श्रद्धा भाव जरूर रखें।

श्रद्धा पूर्वक दिया गया अन्न जल ही पितर ग्रहण करते हैं। अगर श्राद्ध भाव ना हो तो पितर उसे ग्रहण नहीं करते हैं।


इन पांच अंशों का अर्पण करने को पंचबली कहा जाता है.

इन पांच जीवों का ही चुनाव क्यों किया गया है

कुत्ता जल तत्व का प्रतीक है ,
चींटी अग्नि तत्व का,
कौवा वायु तत्व का,
गाय पृथ्वी तत्व का
और देवता आकाश तत्व का प्रतीक है.
इस प्रकार इन पांचों को आहार देकर हम पंच तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं.
केवल गाय में ही एक साथ पांच तत्व पाए जाते हैं. इसलिए पितृ पक्ष में गाय की सेवा विशेष फलदाई होती है.
मात्र गाय को चारा खिलाने और सेवा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है
साथ ही श्राद्ध कर्म संपूर्ण होता है


पंचबली

1- गौ बली अर्थात- पहला भोग पवित्रता की प्रतीक गाय माता को खिलाएं।
मंत्र
ॐ सौरभेयः सर्वहिताः, पवित्राः पुण्यराशयः।।
प्रतिगृह्णन्तु में ग्रासं, गावस्त्रैलोक्यमातरः॥
इदं गोभ्यः इदं न मम्।।

2- कुक्कुर बली अर्थात- दूसरा भोग कत्तर्व्यष्ठा के प्रतीक श्वान (कुत्ता) को खिलाएं।
मंत्र
ॐ द्वौ श्वानौ श्यामशबलौ, वैवस्वतकुलोद्भवौ ।।
ताभ्यामन्नं प्रदास्यामि, स्यातामेतावहिंसकौ ॥
इदं श्वभ्यां इदं न मम ॥


3- काक बली अर्थात- तीसरा भोग मलीनता निवारक काक (कौआ) को खिलाएं।
मंत्र
ॐ ऐन्द्रवारुणवायव्या, याम्या वै नैऋर्तास्तथा ।।
वायसाः प्रतिगृह्णन्तु, भुमौ पिण्डं मयोज्झतम् ।।
इदं वायसेभ्यः इदं न मम ॥

4- देव बली अर्थात- चौथा भोग देवत्व संवधर्क शक्तियों के निमित्त- (यह भोग किसी छोटी कन्या या गाय माता को खिलाया जा सकता है)
मंत्र
ॐ देवाः मनुष्याः पशवो वयांसि, सिद्धाः सयक्षोरगदैत्यसंघाः।।
प्रेताः पिशाचास्तरवः समस्ता, ये चान्नमिच्छन्ति मया प्रदत्तम्॥
इदं अन्नं देवादिभ्यः इदं न मम्।।

5- पिपीलिकादि बली अर्थात- पांचवां भोग श्रमनिष्ठा एवं सामूहिकता की प्रतीक चींटियों को खिलाएं।
मंत्र
ॐ पिपीलिकाः कीटपतंगकाद्याः, बुभुक्षिताः कमर्निबन्धबद्धाः।।
तेषां हि तृप्त्यथर्मिदं मयान्नं, तेभ्यो विसृष्टं सुखिनो भवन्तु॥
इदं अन्नं पिपीलिकादिभ्यः इदं न मम।।
 
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Wednesday, 28 July 2021

महामृत्युन्जय अनुष्ठान पूजा सामग्री पर्णकुटी गुना 9893946810

(पूजन समग्री कम  और  ज्यादा कर  सकते है )
=================================
1】हल्दीः--------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------100 ग्राम
३】अगरबत्ती-------------------     3पैकिट
४】कपूर-------------------------   50 ग्राम
५】केसर-------------------------   1डिव्वि
६】चंदन पेस्ट ------------------ 50 ग्राम
७】यज्ञोपवीत -----------------   1 मूठा
८】चावल------------------------ 10किलो
९】अबीर-------------------------50 ग्राम
१०】गुलाल, -----------------10 0ग्राम
११) कच्चा सूत =====2 गोले
१२】सिंदूर --------------------100 ग्राम
१३】रोली, --------------------100ग्राम
१४】सुपारी, ( बड़ी)--------  200 ग्राम
१५】नारियल -----------------  21 नग्
१६】सरसो----------------------50 ग्राम
१७】पंच मेवा------------------100 ग्राम 
१८】शहद (मधु)--------------- 50 ग्राम
१९】शकर-----------------------0 1किलो
२०】घृत (शुद्ध घी)------------  02किलो
२१】इलायची (छोटी)-----------10ग्राम
२२】लौंग मौली-------------------10ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२४】रंग लाल----------------------20ग्राम
२५】रंग काला --------------------20ग्राम
२६】रंग हरा -----------------------20ग्राम
२७】रंग पिला ---------------------20ग्राम
२८】चंदन मूठा--------------------
२९】धुप बत्ती ---------------------2 पैकिट
(30)आवला 50 ग्राम
(31)दाख 50 ग्राम
(32)मूँग बडी 100 ग्राम
(33)पापाड़थेली 1 नग
34)तेल तिली का =2 किलो
35)गुलाब जल 100 ग्राम
36)खड़ी हल्दी 100ग्राम 
 37) माचिस पेकिट 1
38)नारियल गोले 2
=======///=====
ब्राहाम्णो के लिये 
छोटे साबुन नहाने के =8
कपडा धोने के =8
सर्फ कपडे धोने के लिये =1 किलो
मंजन === 100 ग्राम 
तेल शीशी ====100 ग्राम




   बस्त्र
१】सफेद कपड़ा 2मीटर सूती
२】लाल कपड़ा 2मीटर सूती
(3)पीला कपड़ा 2मीटर सूती
४】हरा कपड़ा 1मीटर सूती
(5) काला कपडा 1मीटर सूती


दीपक 10 मिट्टी के
मिट्टी के कलश 5 नग
मिट्टी के खप्पर 4
नागफनी कीलें 4 नग
रुई मेडिकल वाली 200 ग्राम
भस्म
ध्वजा पच रँगा

सप्तमृत्तिका
1】 हाथी के स्थान की मिट्टि-----------50ग्राम
२】घोड़ा बांदने के स्थान की मिटटी--50ग्राम
३】बॉबी की मिटटी---------------------50ग्राम
४】दीमक की मिटटी-------------------50ग्राम
५】नदी संगम की मिटटी---------------50ग्राम
६】तालाब की मिटटी-------------------50ग्राम
७】गौ शाला की मिटटी-----------------50ग्राम
राज द्वार की मिटटी-----------------------50ग्राम
============================
पंचगव्य
१】 गाय का गोबर -----------------50 ग्राम
२】गौ मूत्र-----------------------------50ग्राम
३】गौ घृत------------------------------50ग्राम
4】गाय दूध----------------------------50ग्राम
५】गाय का दही ---------------------50ग्राम
=============================
सप्त धान्य-कुलबजन--------100ग्राम
१】 जौ-----------
२】गेहूँ-
३】चावल-
४】तिल-
५】काँगनी-
६】उड़द-
७】मूँग
=============================
प्रतिदिन की सामग्री
कुशा 
1】दूर्वा
2】पुष्प कई प्रकार के 
3】गंगाजल
4】पान के पत्ते
5) दूध
6) दही
7) फ़ल
8) माला
9) बिल्वपत्र
10) शमीपत्र
11)तुलसी दल
मिठाई 20नग रोज
दोना पे 5नग


पंच पल्लव(पत्तो के गुच्छ)
१】बड़, का 1 =गुच्छा
२】 गूलर,1=गुच्छा
३】पीपल,1=गुच्छा
४】आम 30= गुच्छा
५】पाकर के पत्ते)गुच्छा
=============================
अर्पित करने हेतु पुरुष बस्त्र
मता जी को अर्पित करने हेतु  
सौ भाग्यवस्त्र  2 जोड़

बर्तन
(1)जल कलश तांबे के 7
2) पूजा की थाली 1
3)कटोरी छोटी 11
4)ब्रह्मा पात्र के लिये छोटा कमण्डल
5) मिट्टी पार्थिव बनाने के लिये 7 कट्टे
7 कंडे का चूरा ज्वारे बोने के लिये

हवन सामग्री
जीतने सदस्य हवन पर बेठेगे उसी हिसाब से मात्रा डाली जायेगी
तिली से आधे चावल चावल से आधे जौ

हवन के लिये समिधा 30 किलो
खैर की अथवा छोले की

=========नवग्रह समिधा=======
१】आक
२】 छोला
३】खैर 
४】आंधी झाड़ा
५】पीपल
६】उमर(गूलर)
७】शमी
८】दूर्वा
९】कुशा

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Bhubneshwar
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Saturday, 22 May 2021

यज्ञ शाला के लिए

यज्ञ शाला बनाने के लिये 

(1)बल्ली 10 फिट की  40 नग
(2)बल्ली 12 फिट की 08
(3)सुतली  या नट  40 छ इन्च
(4)ईंटे  3500
(5) मिट्टी पुरने के लिये 10 ट्राली 
(6)मिट्टी छाबने  के लिये 1 ट्राली
(7) भूसा  25 बोरा 
(8)कलई  लाईन खीचने के लिये 
(9)  छाया करने के लिये 2 ट्राली घास
(10)बांस   20  =24 फिट का ऐक 
(11) तोरण के लिये पीपल पाकर गूलर

1)अन्नादी वास
(2)गन्धादिवास
(3)पुष्पादी वास
(4)धान्यादी वास
(5)फलादिवास
(6)ओषध्यादिवास
(7)घ्रतादि वास
(8)धुपादिवास
(9)बस्त्रादिवास
(10)फलादिवास
(11)मिष्टानादिवास
(12)श्य्यादिवास

महा स्नान
(1)मृतीका
(2)पंच पल्लव
(3)गौ मूत्र 
(4)गौमय 
(5)गन्धोदक
(6)दर्भोदक
(7)नारिकेलोदक
(8)क्षारोदक
(9)दूध
(11)स्वादुदक
(12)दधि 
(13)सुरोदक
(14)इक्षुरश
(15)घृत
(16)भस्म
(17)गौ घृत
(18)मधु
(19)शर्करल 
(20)पंचामृत 
(21)गन्ध
(22)पंच पल्लव
(23)सर्बोषधि 
(24)श्वेत पुष्प
(25)फलोदक
(26)अष्ट फ़ल
(27)स्वर्ण
(28)गौ श्र्ंगोदक
(29)सप्त धान्य 
(30)शह्स्त्र् छिद्र कलश 
(31)दिव्य औषधी 
(33)नवरत्न
(34)तीर्थोदक
(35)कदंब पत्र 
(36)शाल्मली पत्र
(37)जम्बू  पत्र 
(38)अशोकपत्र
(39)पीपलपत्र
(40)आम पत्र
(41)बट
(42)विल्व
(43)नाग पत्र
(44)पलाश पत्र

Monday, 10 May 2021

प्रेत बाधा निवारक मन्त्र


प्रेत बाधा निवारक मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच शाकिनी डाकिनी यक्षणी पूतना मारी महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम् क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर हुं फट् स्वाहा। इस हनुमान मंत्र का पांच बार जाप करने से कभी भूत निकट नहीं आ सकते।

आप ऊपरी बाधा हटाने के उपाय के अंतर्गत ये उपाय करना न भूलें| काली सरसों, काले बकरे का दायाँ सींग, सर्प की केंचुली, गुग्गुल, नीम के पत्ते, अपामार्ग के पत्ते और बच को लेकर अच्छे से कूट पीस लें| इस चूर्ण को जलते कंडे पर डालकर धूनी करें और पीड़ित व्यक्ति को धूनी दें| ऐसा करने से प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है|

| आप 5 ग्राम कपूर, 5 ग्राम काली मिर्च और 5 ग्राम हींग ले लें| इसको पीसकर इसका पाउडर बनायें और फिर इसकी छोटी छोटी गोलियां बना लें| इन गोलियों को 2 बराबर भागों में बाँट दें और फिर एक हिस्से को सुबह और दूसरे को शाम को घर में जलाएं|

शनिवार के दिन इस प्रयोग को करें| इस दिन काले धतूरे की जड़ लेकर आयें और पीड़ित की भुजा पर बांध दें| ऐसा करने से भूत, प्रेत और पिशाच उसका पीछा करना छोड़ देंगे| यदि पीड़ित स्त्री है तो जड़ को उसकी बायीं भुजा में बांधना चाहिए, यदि वह पुरुष है तो उसे उसकी दाहिनी भुजा में बांधना चाहिए

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।

तू है वीर बड़ा हनुमान |
लाल लंगोटी मुख में पान |
ऐर भगावै |
बैर भगावै |
अमुक में शक्ति जगावै |
रहे इसकी काया दुर्बल |
तो माता अंजनी की आन |
दुहाई गौरा पार्वती की |
दुहाई राम की |
दुहाई सीता की |
ले इसके पिण्ड की खबर |
ना रहे इसमें कोई कसर |

यदि कोई अकारण ही दुर्बल होता जा रहा हो और कारण समझ में नहीं आये तो इस मंत्र का 7 बार जाप करते हुए प्रत्येक मंत्र के बाद रोगी पर फूँक लगाए और यही रोगी स्वयं करता है तो रोगी खुद को फूक लगाए इसके साथ ही रोगी को हनुमान जी के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा से उनके चरणों का सिन्दूर लाकर तिलक भी करें | रोगी किसी भी रोग से पीड़ित हो उसे स्वास्थ्य लाभ अवश्य मिलेगा ||

Gurudev 
Bhubneshwar 
Parnkuti  guna 
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Thursday, 22 April 2021

भूमी पूजन सामग्री ऐबं शिलान्यास सामग्री पर्णकुटी गुना


1=रोली 

2=चावल=500 ग्राम
3=गोल सुपारी =50 ग्राम
4=आँटि(कलावा) 50 ग्राम अथवा 2 गोले
5=नारियल  =5 नग 
6=जनेऊ =5नग
7=लौंग=10ग्राम
8=इलायची=10 ग्राम
9=सिन्दूर= 50 ग्राम
10=इत्र= 1 शीशी चंदन
11=सरसो = 50 ग्राम
12=गाय का घी 100 ग्राम
13=रुई = 20 ग्राम
14=माचिस=1 नग 
15=शहद = 50 ग्राम
16=अगरवात्ती
17=धुप बत्ती
18=शकर =100 ग्राम
19=गाय का गोवर =2 किलो
20=गाय का मूत्र=50 ग्राम
21=गाय का दही =50
22=गाय का  दूध =100 ग्राम
23= मिठाई =अनुमानित
24=आम के पत्ते
25=पान के पत्ते =11 
26=दूर्वा 
27=ऋतु फ़ल=अनुमानित
28=दोना=1 गड्डी 
29=
30=
31=लाल कपडा  =आधा मीटर 
32=सफेद कपडा =आधा मीटर 

घर से ले जाने वाला समान 
चटाई बैठने को 
गेहू =500 ग्राम
दिपक
पूजा की थाली
लोटा पूजा के लिये 
गंगा जल
आटा  हल्दी चोक पुरने  के लिये 
गठ्जोडा   
आसन 
पेपर
पाटा लकड़ी का 

कलश के अंदर चांदी के सर्प का जोड़ा, 
लोहे की चार नाग फ़नि कील 
कछुआ 
पंच रत्न
हल्दी की पांच गांठे, 
पान के 11 पत्तें, 
तुलसी की 35 पत्तियों, 
मिट्टी के 11 दीपक, 
तगाडसि /2
फड़ुआ  /2
गेंती /1  
पांच ईंटे  शिलान्यास के लिये 
पांच  कलश छोटे  मिट्टी के  
अथवा ताबे के छोटे कलश 
 
Gurudev 
Bhubneshwar 
Parnkuti  gunaa 
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Sunday, 18 April 2021

किस उम्र मे होगा आपका भाग्य उदय

 यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है. 

ग्रह फल के अनुसार बृहस्पति सबसे जल्दी किस्मत का कनेक्शन बनाते हैं. 

देवगुरु बृहस्पति 16 से 22 वर्ष की उम्र तक कुंडली में अच्छे होने पर फल देने लग जाते हैं. 

उच्च का योगकारक गुरु व्यक्ति का नवयुवा अवस्था में ही भाग्योदय करा देता है. 

ऐसे लोग समाज में बड़ा नाम और दाम कमाते हैं. दांपत्य जीवन की शुरुआत भी ऐसे लोगों की जल्द हो जाती है यानी शादी जल्दी हो जाती है.


न्याय के देवता शनिदेव 

पूर्ण अनुभव प्राप्त होने पर भाग्योदय का मार्ग प्रशस्त करते हैं. 

शनिदेव 36 से 42 वर्ष की उम्र में भाग्य उदित करते हैं. 

शनिदेव की प्रबलता और शुभता रखने वाले लोग 36 वर्ष की उम्र के बाद सफलता की सीढ़ियां तेजी से चढ़ते हैं.

 महत्वपूर्ण बात यह है कि शनिदेव की कृपा से बनी भाग्यकारक स्थिति ताउम्र बनी रहती है. 

कई बार तो व्यक्ति के कार्याें की छाप उसके बाद भी बनी रहती है.


शनिदेव के बाद सबसे देरी भाग्योदय देने वाले ग्रह राहु और केतु हैं. 

राहु 42 के बाद भाग्य की राह बनाते हैं. 

केतु राहु से भी देरी से भाग्योदय करते हैं.

 केतु 48 से 54 वर्ष की उम्र में भाग्यफल देते हैं. 

गुरु के बाद सबसे जल्दी फल सूर्यदेव देते हैं. 

सूर्यदेव 22 से 24 वर्ष के बीच भाग्योदय करते हैं.


चंद्रमा 

24 से 25 वर्ष के बीच भाग्योदय कराते हैं. 

शुक्रदेव

 25 से 28 के बीच भाग्य को प्रशस्त करते हैं.

 28 से 32 वर्ष के मध्य मंगल भाग्यकारक होते हैं. 

बुधदेव 32 से 36 वर्ष की उम्र में भाग्योदय कराते हैं.

जिस जातक की कुंडली में जो ग्रह बलवान और योगकारक होता है उससे संबंधित वर्षाें में व्यक्ति अच्छी उन्नति करता है.