ज्योतिष समाधान

Wednesday, 28 July 2021

महामृत्युन्जय अनुष्ठान पूजा सामग्री पर्णकुटी गुना 9893946810

(पूजन समग्री कम  और  ज्यादा कर  सकते है )
=================================
1】हल्दीः--------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------100 ग्राम
३】अगरबत्ती-------------------     3पैकिट
४】कपूर-------------------------   50 ग्राम
५】केसर-------------------------   1डिव्वि
६】चंदन पेस्ट ------------------ 50 ग्राम
७】यज्ञोपवीत -----------------   1 मूठा
८】चावल------------------------ 10किलो
९】अबीर-------------------------50 ग्राम
१०】गुलाल, -----------------10 0ग्राम
११) कच्चा सूत =====2 गोले
१२】सिंदूर --------------------100 ग्राम
१३】रोली, --------------------100ग्राम
१४】सुपारी, ( बड़ी)--------  200 ग्राम
१५】नारियल -----------------  21 नग्
१६】सरसो----------------------50 ग्राम
१७】पंच मेवा------------------100 ग्राम 
१८】शहद (मधु)--------------- 50 ग्राम
१९】शकर-----------------------0 1किलो
२०】घृत (शुद्ध घी)------------  02किलो
२१】इलायची (छोटी)-----------10ग्राम
२२】लौंग मौली-------------------10ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२४】रंग लाल----------------------20ग्राम
२५】रंग काला --------------------20ग्राम
२६】रंग हरा -----------------------20ग्राम
२७】रंग पिला ---------------------20ग्राम
२८】चंदन मूठा--------------------
२९】धुप बत्ती ---------------------2 पैकिट
(30)आवला 50 ग्राम
(31)दाख 50 ग्राम
(32)मूँग बडी 100 ग्राम
(33)पापाड़थेली 1 नग
34)तेल तिली का =2 किलो
35)गुलाब जल 100 ग्राम
36)खड़ी हल्दी 100ग्राम 
 37) माचिस पेकिट 1
38)नारियल गोले 2
=======///=====
ब्राहाम्णो के लिये 
छोटे साबुन नहाने के =8
कपडा धोने के =8
सर्फ कपडे धोने के लिये =1 किलो
मंजन === 100 ग्राम 
तेल शीशी ====100 ग्राम




   बस्त्र
१】सफेद कपड़ा 2मीटर सूती
२】लाल कपड़ा 2मीटर सूती
(3)पीला कपड़ा 2मीटर सूती
४】हरा कपड़ा 1मीटर सूती
(5) काला कपडा 1मीटर सूती


दीपक 10 मिट्टी के
मिट्टी के कलश 5 नग
मिट्टी के खप्पर 4
नागफनी कीलें 4 नग
रुई मेडिकल वाली 200 ग्राम
भस्म
ध्वजा पच रँगा

सप्तमृत्तिका
1】 हाथी के स्थान की मिट्टि-----------50ग्राम
२】घोड़ा बांदने के स्थान की मिटटी--50ग्राम
३】बॉबी की मिटटी---------------------50ग्राम
४】दीमक की मिटटी-------------------50ग्राम
५】नदी संगम की मिटटी---------------50ग्राम
६】तालाब की मिटटी-------------------50ग्राम
७】गौ शाला की मिटटी-----------------50ग्राम
राज द्वार की मिटटी-----------------------50ग्राम
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पंचगव्य
१】 गाय का गोबर -----------------50 ग्राम
२】गौ मूत्र-----------------------------50ग्राम
३】गौ घृत------------------------------50ग्राम
4】गाय दूध----------------------------50ग्राम
५】गाय का दही ---------------------50ग्राम
=============================
सप्त धान्य-कुलबजन--------100ग्राम
१】 जौ-----------
२】गेहूँ-
३】चावल-
४】तिल-
५】काँगनी-
६】उड़द-
७】मूँग
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प्रतिदिन की सामग्री
कुशा 
1】दूर्वा
2】पुष्प कई प्रकार के 
3】गंगाजल
4】पान के पत्ते
5) दूध
6) दही
7) फ़ल
8) माला
9) बिल्वपत्र
10) शमीपत्र
11)तुलसी दल
मिठाई 20नग रोज
दोना पे 5नग


पंच पल्लव(पत्तो के गुच्छ)
१】बड़, का 1 =गुच्छा
२】 गूलर,1=गुच्छा
३】पीपल,1=गुच्छा
४】आम 30= गुच्छा
५】पाकर के पत्ते)गुच्छा
=============================
अर्पित करने हेतु पुरुष बस्त्र
मता जी को अर्पित करने हेतु  
सौ भाग्यवस्त्र  2 जोड़

बर्तन
(1)जल कलश तांबे के 7
2) पूजा की थाली 1
3)कटोरी छोटी 11
4)ब्रह्मा पात्र के लिये छोटा कमण्डल
5) मिट्टी पार्थिव बनाने के लिये 7 कट्टे
7 कंडे का चूरा ज्वारे बोने के लिये

हवन सामग्री
जीतने सदस्य हवन पर बेठेगे उसी हिसाब से मात्रा डाली जायेगी
तिली से आधे चावल चावल से आधे जौ

हवन के लिये समिधा 30 किलो
खैर की अथवा छोले की

=========नवग्रह समिधा=======
१】आक
२】 छोला
३】खैर 
४】आंधी झाड़ा
५】पीपल
६】उमर(गूलर)
७】शमी
८】दूर्वा
९】कुशा

Gurudev
Bhubneshwar
Parnkuti guna
9893946810

Saturday, 22 May 2021

यज्ञ शाला के लिए

यज्ञ शाला बनाने के लिये 

(1)बल्ली 10 फिट की  40 नग
(2)बल्ली 12 फिट की 08
(3)सुतली  या नट  40 छ इन्च
(4)ईंटे  3500
(5) मिट्टी पुरने के लिये 10 ट्राली 
(6)मिट्टी छाबने  के लिये 1 ट्राली
(7) भूसा  25 बोरा 
(8)कलई  लाईन खीचने के लिये 
(9)  छाया करने के लिये 2 ट्राली घास
(10)बांस   20  =24 फिट का ऐक 
(11) तोरण के लिये पीपल पाकर गूलर

1)अन्नादी वास
(2)गन्धादिवास
(3)पुष्पादी वास
(4)धान्यादी वास
(5)फलादिवास
(6)ओषध्यादिवास
(7)घ्रतादि वास
(8)धुपादिवास
(9)बस्त्रादिवास
(10)फलादिवास
(11)मिष्टानादिवास
(12)श्य्यादिवास

महा स्नान
(1)मृतीका
(2)पंच पल्लव
(3)गौ मूत्र 
(4)गौमय 
(5)गन्धोदक
(6)दर्भोदक
(7)नारिकेलोदक
(8)क्षारोदक
(9)दूध
(11)स्वादुदक
(12)दधि 
(13)सुरोदक
(14)इक्षुरश
(15)घृत
(16)भस्म
(17)गौ घृत
(18)मधु
(19)शर्करल 
(20)पंचामृत 
(21)गन्ध
(22)पंच पल्लव
(23)सर्बोषधि 
(24)श्वेत पुष्प
(25)फलोदक
(26)अष्ट फ़ल
(27)स्वर्ण
(28)गौ श्र्ंगोदक
(29)सप्त धान्य 
(30)शह्स्त्र् छिद्र कलश 
(31)दिव्य औषधी 
(33)नवरत्न
(34)तीर्थोदक
(35)कदंब पत्र 
(36)शाल्मली पत्र
(37)जम्बू  पत्र 
(38)अशोकपत्र
(39)पीपलपत्र
(40)आम पत्र
(41)बट
(42)विल्व
(43)नाग पत्र
(44)पलाश पत्र

Monday, 10 May 2021

प्रेत बाधा निवारक मन्त्र


प्रेत बाधा निवारक मंत्र- ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत पिशाच शाकिनी डाकिनी यक्षणी पूतना मारी महामारी, यक्ष राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकम् क्षणेन हन हन भंजय भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर हुं फट् स्वाहा। इस हनुमान मंत्र का पांच बार जाप करने से कभी भूत निकट नहीं आ सकते।

आप ऊपरी बाधा हटाने के उपाय के अंतर्गत ये उपाय करना न भूलें| काली सरसों, काले बकरे का दायाँ सींग, सर्प की केंचुली, गुग्गुल, नीम के पत्ते, अपामार्ग के पत्ते और बच को लेकर अच्छे से कूट पीस लें| इस चूर्ण को जलते कंडे पर डालकर धूनी करें और पीड़ित व्यक्ति को धूनी दें| ऐसा करने से प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है|

| आप 5 ग्राम कपूर, 5 ग्राम काली मिर्च और 5 ग्राम हींग ले लें| इसको पीसकर इसका पाउडर बनायें और फिर इसकी छोटी छोटी गोलियां बना लें| इन गोलियों को 2 बराबर भागों में बाँट दें और फिर एक हिस्से को सुबह और दूसरे को शाम को घर में जलाएं|

शनिवार के दिन इस प्रयोग को करें| इस दिन काले धतूरे की जड़ लेकर आयें और पीड़ित की भुजा पर बांध दें| ऐसा करने से भूत, प्रेत और पिशाच उसका पीछा करना छोड़ देंगे| यदि पीड़ित स्त्री है तो जड़ को उसकी बायीं भुजा में बांधना चाहिए, यदि वह पुरुष है तो उसे उसकी दाहिनी भुजा में बांधना चाहिए

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।

तू है वीर बड़ा हनुमान |
लाल लंगोटी मुख में पान |
ऐर भगावै |
बैर भगावै |
अमुक में शक्ति जगावै |
रहे इसकी काया दुर्बल |
तो माता अंजनी की आन |
दुहाई गौरा पार्वती की |
दुहाई राम की |
दुहाई सीता की |
ले इसके पिण्ड की खबर |
ना रहे इसमें कोई कसर |

यदि कोई अकारण ही दुर्बल होता जा रहा हो और कारण समझ में नहीं आये तो इस मंत्र का 7 बार जाप करते हुए प्रत्येक मंत्र के बाद रोगी पर फूँक लगाए और यही रोगी स्वयं करता है तो रोगी खुद को फूक लगाए इसके साथ ही रोगी को हनुमान जी के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा से उनके चरणों का सिन्दूर लाकर तिलक भी करें | रोगी किसी भी रोग से पीड़ित हो उसे स्वास्थ्य लाभ अवश्य मिलेगा ||

Gurudev 
Bhubneshwar 
Parnkuti  guna 
9893946810

Thursday, 22 April 2021

भूमी पूजन सामग्री ऐबं शिलान्यास सामग्री पर्णकुटी गुना


1=रोली 

2=चावल=500 ग्राम
3=गोल सुपारी =50 ग्राम
4=आँटि(कलावा) 50 ग्राम अथवा 2 गोले
5=नारियल  =5 नग 
6=जनेऊ =5नग
7=लौंग=10ग्राम
8=इलायची=10 ग्राम
9=सिन्दूर= 50 ग्राम
10=इत्र= 1 शीशी चंदन
11=सरसो = 50 ग्राम
12=गाय का घी 100 ग्राम
13=रुई = 20 ग्राम
14=माचिस=1 नग 
15=शहद = 50 ग्राम
16=अगरवात्ती
17=धुप बत्ती
18=शकर =100 ग्राम
19=गाय का गोवर =2 किलो
20=गाय का मूत्र=50 ग्राम
21=गाय का दही =50
22=गाय का  दूध =100 ग्राम
23= मिठाई =अनुमानित
24=आम के पत्ते
25=पान के पत्ते =11 
26=दूर्वा 
27=ऋतु फ़ल=अनुमानित
28=दोना=1 गड्डी 
29=
30=
31=लाल कपडा  =आधा मीटर 
32=सफेद कपडा =आधा मीटर 

घर से ले जाने वाला समान 
चटाई बैठने को 
गेहू =500 ग्राम
दिपक
पूजा की थाली
लोटा पूजा के लिये 
गंगा जल
आटा  हल्दी चोक पुरने  के लिये 
गठ्जोडा   
आसन 
पेपर
पाटा लकड़ी का 

कलश के अंदर चांदी के सर्प का जोड़ा, 
लोहे की चार नाग फ़नि कील 
कछुआ 
पंच रत्न
हल्दी की पांच गांठे, 
पान के 11 पत्तें, 
तुलसी की 35 पत्तियों, 
मिट्टी के 11 दीपक, 
तगाडसि /2
फड़ुआ  /2
गेंती /1  
पांच ईंटे  शिलान्यास के लिये 
पांच  कलश छोटे  मिट्टी के  
अथवा ताबे के छोटे कलश 
 
Gurudev 
Bhubneshwar 
Parnkuti  gunaa 
9893946810

Sunday, 18 April 2021

किस उम्र मे होगा आपका भाग्य उदय

 यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है. 

ग्रह फल के अनुसार बृहस्पति सबसे जल्दी किस्मत का कनेक्शन बनाते हैं. 

देवगुरु बृहस्पति 16 से 22 वर्ष की उम्र तक कुंडली में अच्छे होने पर फल देने लग जाते हैं. 

उच्च का योगकारक गुरु व्यक्ति का नवयुवा अवस्था में ही भाग्योदय करा देता है. 

ऐसे लोग समाज में बड़ा नाम और दाम कमाते हैं. दांपत्य जीवन की शुरुआत भी ऐसे लोगों की जल्द हो जाती है यानी शादी जल्दी हो जाती है.


न्याय के देवता शनिदेव 

पूर्ण अनुभव प्राप्त होने पर भाग्योदय का मार्ग प्रशस्त करते हैं. 

शनिदेव 36 से 42 वर्ष की उम्र में भाग्य उदित करते हैं. 

शनिदेव की प्रबलता और शुभता रखने वाले लोग 36 वर्ष की उम्र के बाद सफलता की सीढ़ियां तेजी से चढ़ते हैं.

 महत्वपूर्ण बात यह है कि शनिदेव की कृपा से बनी भाग्यकारक स्थिति ताउम्र बनी रहती है. 

कई बार तो व्यक्ति के कार्याें की छाप उसके बाद भी बनी रहती है.


शनिदेव के बाद सबसे देरी भाग्योदय देने वाले ग्रह राहु और केतु हैं. 

राहु 42 के बाद भाग्य की राह बनाते हैं. 

केतु राहु से भी देरी से भाग्योदय करते हैं.

 केतु 48 से 54 वर्ष की उम्र में भाग्यफल देते हैं. 

गुरु के बाद सबसे जल्दी फल सूर्यदेव देते हैं. 

सूर्यदेव 22 से 24 वर्ष के बीच भाग्योदय करते हैं.


चंद्रमा 

24 से 25 वर्ष के बीच भाग्योदय कराते हैं. 

शुक्रदेव

 25 से 28 के बीच भाग्य को प्रशस्त करते हैं.

 28 से 32 वर्ष के मध्य मंगल भाग्यकारक होते हैं. 

बुधदेव 32 से 36 वर्ष की उम्र में भाग्योदय कराते हैं.

जिस जातक की कुंडली में जो ग्रह बलवान और योगकारक होता है उससे संबंधित वर्षाें में व्यक्ति अच्छी उन्नति करता है.


Sunday, 11 April 2021

नक्षत्रो के स्वामी ग्रह

 राशि की तरह 27 नक्षत्रों के भी स्वामी ग्रह होते हैं जो इस प्रकार है 
अश्वनी, मघा और मूल नक्षत्रों के स्वामी केतु है। भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा का शुक्र, 
कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा का सूर्य, रोहिणी, हस्त और श्रवण का चंद्र,
 मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा का मंगल, 
आद्र्रा, स्वाती और शतभिषा का राहु, 
पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वा भाद्रपद का गुरु, 
पुष्य, अनुराधा और उत्तरा भाद्रपद का शनि 
और आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का बुध
 स्वामी ग्रह होता है। 
इन सभी 27 नक्षत्रों को आगे फिर चार चरणों में विभक्त किया गया है

Saturday, 10 April 2021

किस भाव से क्या देखे कुंडली परिक्षण

कुंडली के सभी बारह भावों से जीवन के विभिन्न विषयों की जानकारी ली जा सकती है। इसका विस्तार में वर्णन निम्नलिखित हैं-

प्रथम भाव (लग्न भाव)


प्रथम भाव से निम्नलिखित विषयों का विचार किया जाता है-

देह, तनु, शरीर रचना, व्यक्तित्व, चेहरा, स्वास्थ्य, चरित्र, स्वभाव, बुद्धि, आयु, सौभाग्य, सम्मान, प्रतिष्ठा और समृद्धि।

द्वितीय भाव (धन / कुतुम्ब भाव)


संपत्ति, परिवार, वाणी, दायीं आंख, नाखून, जिह्वा, नासिका, दांत, उद्देश्य, भोजन, कल्पना, अवलोकन, आभूषण, कीमती पत्थर, अप्राकृतिक मैथुन, ठगना और जीवनसाथियों के बीच हिंसा।

तृतीय भाव (पराक्रम / सहोदर भाव)


छोटे भाई और बहन, सहोदर भाई बहन, संबंधी, रिश्ते, पड़ोसी, साहस, निश्चितता, हमुरी, सीना, दाएं कान, हाथ, लघु यात्राएं, नाड़ी तंत्र, संचरण, संप्रेषण, लेखन, पुस्तक लेखन, समाचार पत्रों की सूचना, संवाद इत्यादि लिखें, शिक्षा, बुद्धि इत्यादि।

चतुर्थ भाव (सुख / मातृ भाव)


माता, संबंधी, वाहन, घरेलू वातावरण, सौन्दर्य, भूमि, आवास, शिक्षा, जमीन-जायदाद, वंशावली प्रकृति, जीवन का उत्तरार्ध भाग, छिपा हुआ, गुप्त प्रेम संबंध, सीना, वैवाहिक जीवन में ससुराल पक्ष और परिवार के हस्तक्षेप, गहने, कपड़े।

पंचम भाव (संतान / शिक्षा भाव)


संतान, बुद्धि, प्रसिद्धि, श्रेणी, उदर, प्रेम संबंध, आनंद, मनोरंजन, सट्टा, पूर्व जन्म, आत्मा, जीवन स्तर, पद, प्रतिष्ठा, कलात्मकता, हृदय, पीठ, खेल में निपुणता, प्रतियोगिता में सफलता।

षष्ठ भाव (रिपु भाव)


रोग, ऋण, विवाद, अभाव, अंक, मामा, मामी, शत्रु, सेवा, भोजन, कपड़े, चोरी, बदनामी, पालतू पशु, सरकारी कर्मचारी, मनोहर कर्मचारी, कमर

सप्तम भाव (कलत्र भाव)


पति / पत्नी का व्यक्तित्व, जीवनसाथी के साथ संबंध, इच्छाएं, काम शक्ति, साझेदारी, प्रत्यक्ष श्रतु, मुआवजा, यात्रा, कानून, जीवन के लिएone, विदेशों में प्रभाव और प्रतिष्ठा, जनता के साथ संबंध, यौन रोग, मूत्र रोग।

अष्टम भाव (आयु / मृत्यु भाव)


आयु, मृत्यु का प्रकार अर्थात मृत्यु कैसे होगी, जननांग, बाधाएं, दुर्घटना, आकस्मिक की संपत्ति, विरासत, बपति, पैतृक संपत्ति, वसीयत, पेंशन, परिधान, चोरी, डकैती, चिंता, रूकावट, युद्ध, शत्रु, विरासत में मिला धन, मानसिक वेदना, वैवाहिक जीवन।

नवम भाव (भाग्य / धर्म भाव)


सौभाग्य, धर्म, चरित्र, दादा-दादी, लंबी यात्राएं, पोता, बुजुर्गों और देवताओं के प्रति श्रद्धा व भक्ति, आध्यात्मिक उन्नति, स्वप्न, उच्च शिक्षा, पत्नी का छोटा भाई, भाई की पत्नी, तीर्थयात्रा, दर्शन, संपर्क से संपर्क करें।

दशम भाव (कर्म भाव)


व्यवसाय, कीर्ति, शक्ति, अधिकार, नेतृत्व, अधिकार, सम्मान, सफलता, रूतबा, स्नेह, चरित्र, कर्म, उद्देश्य, पिता, मालिक, नियोजक, अधिकारी, अधिकारियों से संबंध, व्यापार में सफलता, नौकरी में तरक्की, सरकार से सम्मान।

एकादश भाव (लाभ भाव)


लाभ, समृद्धि, कामनाओं की पूर्ति, मित्र, बड़ा भाई, तखने, बायां कान, परामर्शदाता, प्रिय, रोग मुक्ति, प्रत्याशा, पुत्रवधू, इच्छाएं, कार्यों में सफलता।

द्वादश भाव (व्यय भाव)


हानि, दण्ड, कारावास, व्यय, दान, विवाह, जलाश्रयों से संबंधित कार्य, वैदिक यज्ञ, अदा किया गया, विवाहेत्तर काम क्रीड़ा, काम क्रीड़ा और यौन संबंधों सेtyन्न रोग, काम क्रीड़ा, कमजोरी, शयन सुविधा, ऐय्याशी, भोग विलास , पत्नी की हानि, शादी में नुकसान, नौकरी छूटना, अपने लोगों से सिपाही, संबंध विद्या, लंबी यात्रा, विदेश में सुरक्षा।

Gurudev  bhubneshwar

Parnkuti guna

9893946810