Monday, 27 October 2025

दीपावली पर पांच दिन के मुहूर्त 2025

गुरुदेव भुवनेश्वर जी महाराज पर्णकुटी आश्रम गुना के अनुसार पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भाई दूज पर। इन पांच दिनों में मुख्य आकर्षण माता महालक्ष्मी की पूजा होती है, जो कार्तिक अमावस्या की रात में की जाती है। इस दिन लोग घर-आंगन में दीप जलाकर अंधकार को दूर करते हैं और धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। आइए जानते हैं, इस साल धनतेरस, छोटी दिवाली, महालक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के शुभ मुहूर्त 
 इस साल धनतेरस शनिवार 18 अक्टूबर को है।

त्रयोदशी के दिन क्षीर सागर से प्रकट हुयीं थीं तथा उन्होंने दीवाली के दिन अपने पति के रूप में भगवान विष्णु का वरण किया था। इसीलिये दीवाली अमावस्या को धन और समृद्धि की देवी को प्रसन्न करने हेतु सर्वाधिक उपयुक्त दिन माना जाता है। इस दिन लोहे के सामान नहीं खरीदना चाहिए गुरुदेव भुवनेश्वर जी के अनुसार इस दिन धातु खरीदना चाहिए जैसे सोना, चांदी तांबा पीतल आदि लोहे के बरतन भी नहीं खरीदना चाहिए 

सभी प्रकार की खरीदारी का शुभ समयः दोपहर 12:00बजे से दोपहर 03:00 बजे तक
 एवं अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:43 तक
 विजय मुहूर्त के अनुसार 
अपरान्ह काल 02:01 बजे से 02:43 तक शुभ रहेगा
 धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल, तांबे के बर्तन, झाडू, गोमती चक्र, सूखा धनिया, नमक और लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, घर की सजावट की वस्तुएँ खरीदना बहुत शुभ माना जाता है।
 X क्या न खरीदेंः धनतेरस पर चाकू, कैंची, पिन या कोई भी धारदार वस्तु खरीदना अशुभ माना जाता है।



धनतेरस पर शाम के समय भगवान धन्वंतरि, कुबेर महाराज और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। 


त्रयोदश्यां तु या रात्रिः शनिवारे विशेषतः।
धन्वन्तरिप्रसादेन दरिद्र्यं तस्य नश्यति॥”

अर्थात —
जब त्रयोदशी तिथि (धनतेरस) शनिवार को आए,
तो उस दिन धन्वंतरि पूजन से दरिद्रता सदा के लिए नष्ट हो जाती है।


शनिवारे जगद्धात्रि कोट्यावृत्तिफलं ध्रुवम्॥” 


त्रयोदश्यां यमदीपं तु कुर्यादायुर्यमोदितम्।
दारिद्र्यनाशनं सर्वं सौभाग्यं तत् प्रयच्छति॥



अर्थ:
कार्तिक मास की त्रयोदशी (धनतेरस) के दिन यदि यमराज के लिए दीपदान किया जाए,
तो वह आयु और सौभाग्य प्रदान करता है तथा दारिद्र्य का नाश करता है।


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🌕 २. धर्मसिंधु (दीपमालिका विधिः)

> धनत्रयोदश्यां दीपदानं यमदीपं विशेषतः।
कृत्वा प्रातःस्नानसमये धनं धान्यं च वर्धते॥



अर्थ:
धनत्रयोदशी के दिन दीपदान (विशेषकर यमराज हेतु) करने से धन और धान्य की वृद्धि होती है।


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🌕 ३. कालिकापुराण (दीपदान फलवर्णन)

> यः कुर्याद् दीपदानं तु धनत्रयोदश्यां निशि।
तस्य धन्यं च आयुश्च भवेत् संततिवर्धनम्॥



अर्थ:
जो धनत्रयोदशी की रात्रि में दीपदान करता है,
उसका धन, आयु और संतति (वंश) तीनों बढ़ते हैं।





धनतेरस पर मृत्यु के देवता यमराज का सम्मान भी किया जाता है।
 शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाकर यमराज से लंबी आयु की कामना की जाती है।

त्रयोदशी तिथि आरंभ: 18 अक्टूबर दोपहर 12:18 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर दोपहर 1:51 बजे

दीपदान समय:::::::::::

(1)धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 7:16 से 8:20 बजे तक  शुभ रहेगा
(2)प्रदोष काल: सायंकाल 5:48  –रात्रि  8:20 तक शुभ रहेगा

(3)वृषभ लग्न :सायंकाल 7:16 – रात्रि 9:11 तक शुभ रहेगा 

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भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर पर विजय का प्रतीक। 
 2025 में छोटी दिवाली सोमवार 19 अक्टूबर को पड़ेगी।

अभ्यंग स्नान मुहूर्त - प्रात: 05:13 से प्रात: 06:25  

नरक चतुर्दशी के दिन चन्द्रोदय का समय - : प्रात:05:13 

अभ्यंग स्नान महत्व
शास्त्रों के अनुसार, नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय के पूर्व शरीर पर उबटन लगाकर स्नाने करने की प्रक्रिया को अभ्यंग स्नान कहा जाता है. जिसमें हल्दी, दही, तिल का तेल, बेसन, चंदन, जड़ी-बूटियों का लेप किया जाता है. इस लेप से पूरे शरीर की मालिश की जाती है.

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दिवाली का आवश्यक अंग, श्राद्ध कर्म भी है जोकि 20 तारीख़ को कुतुप काल में संभव नहीं है इसलिए 20 में कर्म का लोप हो रहा है। इस स्थिति में 20 में  दिवाली मनाए और 21 में अभ्यंग स्नान, श्राद्ध और पूर्वजो को मशाल प्रज्वलित करके पितरों को मार्ग का दर्शन अवश्य करायें। जिससे शात्र विधि पूरी हो सके
दीपावली शाम को लक्ष्मी और गणेश पूजा होती है। 2025 में महालक्ष्मी पूजन सोमवार 20 अक्टूबर को होगा।

अमावस्या तिथि आरंभ:

 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त:

 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे


गुरुदेव भुवनेश्वर जी महाराज पर्णकुटी वालो के अनुसार अमावस्या की रात स्थिर लग्न में महालक्ष्मी की पूजा करने से घर में मां लक्ष्मी की स्थिरता बनी रहती है। वैसे तो चार स्थिर लग्न है, 

वृष, सिंह, वृश्चिक, और कुंभ।

  1. वृश्चिक लग्न - दीवाली के दिन प्रातःकाल वृश्चिक लग्न प्रबल होता है। मन्दिरों, अस्पतालों, होटलों, विद्यालयों और महाविद्यालयों के लिये वृश्चिक लग्न के समय लक्ष्मी पूजा सर्वाधिक उपयुक्त होती है। विभिन्न टीवी और फिल्म कलाकारों, शो एन्करों, बीमा अभिकर्ताओं तथा जो लोग सार्वजनिक मामलों एवं राजनीति से जुड़े हैं, उन्हें भी वृश्चिक लग्न के दौरान देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिये।
  2. कुम्भ लग्न - दीवाली के दिन मध्यान्ह के समय कुम्भ लग्न प्रबल होता है। जो रोगग्रस्त एवं ऋणग्रस्त हैं, भगवान शनि के दुष्प्रभाव से मुक्ति प्राप्त करने के इच्छुक हैं, जिनके व्यापार में धन हानि हो रही है तथा व्यापार में भारी ऋण में है, उनके लिये कुम्भ लग्न में लक्ष्मी पूजा करना उत्तम होता है।
  3. वृषभ लग्न - दीवाली के दिन सायाह्नकाल में वृषभ लग्न प्रबल होता है। गृहस्थ, विवाहित, सन्तानवान, मध्यम वर्गीय, निम्न वर्गीय, ग्रामीण, किसान, वेतनभोगी तथा जो सभी प्रकार के व्यवसायों में संलिप्त व्यापारी हैं, उनके लिये वृषभ लग्न लक्ष्मी पूजा का सर्वोत्तम समय है। वृषभ लग्न को दीवाली पर लक्ष्मी पूजा हेतु सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है।
  4. सिंह लग्न - दीवाली के दिन मध्य रात्रि के समय सिंह लग्न प्रबल होता है। सिंह लग्न का मुहूर्त, साधु-सन्तों, सन्यासियों, विरक्तों एवं तान्त्रिकों के लिये लक्ष्मी पूजा एवं देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम मुहूर्त होता है।
Settingलक्ष्मी पूजा मुहूर्त स्थिर लग्न पर आधारित गुना, मध्यप्रदेश, भारत के लिये

इनमें से किसी भी  लग्न का उपयोग लक्ष्मी पूजा व्यापार पूजा में कर सकते है

(1)वृश्चिक लग्न मुहूर्त 
प्रात:- 08:28 से 10:45 तक

(2)कुम्भ लग्न मुहूर्त
 (अपराह्न) - 03:44 से 04:06 

(3)वृषभ लग्न मुहूर्त
 (सन्ध्या) - 07:14 से 09:12 

(4)निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर  41 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

(5)सिंह लग्न मुहूर्त
 (मध्यरात्रि) - 01:43  से 03:56 21 अक्टूबर 



चोघडिया, मुहूर्त दुकान फैक्ट्री व्यापार के लिए उपयोग कर सकते हो

प्रात: काल अमृत 06:22 से 07:48 शुभ

प्रात: काल  शुभ 09:14 से 10:40 शुभ

मध्यान्ह काल चर 01:31 से 02:57 शुभ

दोपहर      लाभ 02:57 से- 04:23 शुभ

सायंकाल।  अमृत 04:23 से 05:48 शुभ

संध्याकाल लक्ष्मी पूजा के लिए विशेष मुहूर्त

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दिन ओर रात्रि के संक्रमण काल को गो धूली बेला कहते है

(1)गोधूली मुहूर्त सायंकाल 5:50से सायंकाल 06:15 तक

(2)लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 7:08 से 8:18 बजे तक 

(3)प्रदोष काल: सायंकाल 5:46  –से  रात्रि 8:18  तक

4)वृषभ काल: सायंकाल 7:14से – रात्रि 9:012 अति शुभ मुहूर्त

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प्रदोष काल कब होता है

(1)प्रदोषोऽस्तसमयादूर्ध्वं घटिकाद्वयमिष्यते।त्र्यंशेन तस्य कालस्य यः पूज्यः स प्रदोषकः

अस्त (सूर्यास्त) के समय से ऊपर (बाद में) दो घटी का जो समय होता है, वही प्रदोषकाल कहलाता है। उस काल के तृतीयांश (एक तिहाई भाग) में जो लक्ष्मी की पूजा की जाती है, वही प्रदोषपूजा मानी जाती है।

(2)सूर्यास्तं यावत् कालं प्रदोषः संप्रकीर्तितः।

तस्य तृतीयभागस्थे पूजां कुर्यात् प्रदोषिकाम्॥

(3)अस्ताचलगतादर्कात् पूर्वं द्विघटिकापर्यन्तं च प्रदोषकालः।

अथास्तमितभानोरनन्तरं द्विघटीकान्तः स प्रदोषः परिकीर्तितः

जब सूर्य अस्ताचल (पश्चिम पर्वत) की ओर अग्रसर होता है, तो सूर्यास्त से दो घटी (लगभग 48 मिनट) पहले से लेकर सूर्यास्त के दो घटी बाद तक का जो काल होता है, वही प्रदोषकाल कहलाता है।

➡️ सूर्यास्त से 48 मिनट पूर्व आरंभ होकर

➡️ सूर्यास्त के 48 मिनट बाद तक

कुल चार घटी (लगभग 1 घंटा 36 मिनट) का काल प्रदोषकाल माना गया है।

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प्रतिपदा तिथि आरंभ: 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे

प्रतिपदा तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे

(1)गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त: 6:26 से प्रात:  09:14तक

(2)प्रात: काल 10:39से से 12:05 तक 

सायाह्नकाल मुहूर्त: 3:29 – से सायंकाल 5:44 

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भाई दूज:  भाई दूज गुरुवार 23 अक्टूबर को है।

द्वितीया तिथि आरंभ: 22 अक्टूबर रात 8:16 बजे

द्वितीया तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर रात 10:46 बजे

प्रात: काल 10;39से अपरान्ह 02:56 तक

+++++++++++++++++++++++++++++गुरुदेव 

भुवनेश्वर जी महाराज 
पर्णकुटी आश्रम गुना 
9893946810

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