ज्योतिष समाधान

Tuesday, 18 October 2016

करवा चौथ ब्रत महुर्त एबं सोलह श्रंगार कौन कौन से है

आईये जानते हैं कि करवाचौथ पर इस बार भारत में कहां-कहां कितने बजे दिखेगा चांद?

दिल्ली: करवा चौथ पूजा मुहूर्तरात 8:29 बजे
चंडीगढ़: रात 8:46 बजे
जयपुर: रात 8:58 बजे
जोधपुर: रात 9:10 बजे
मुंबई:रात 9:22 बजे
बंगलुरु: रात 9:12 बजे
हैदराबाद: रात 9:22 बजे
देहरादून: रात 8:44
पटियाला: रात 8:50 बजे
लुधियाना: रात 8:50 बजे
पटना: रात 8:46 बजे
लखनऊ: रात 8:37
वाराणसी: रात 8:37
कोलकाता: रात 8:13 बजे

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गुना ग्वालियर भोपाल इंदौर उज्जैन आदि क्षेत्रो मेंपूजा का शुभ मुहूर्त
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करवा चौथ पूजा मुहूर्त = 05:46 से 07:02

करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय = 08:57 अर्घ्य देने का समय

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ = 18/अक्टूबर/2016 को रात्रि 10:47बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त = 19/अक्टूबर/2016को 07:32बजे करवा चौथ के दिन

कार्तिक कृष्ण पक्ष में करक चतुर्थी अर्थात करवा चौथ का लोकप्रिय व्रत सुहागिन और अविवाहित स्त्रियां पति की मंगल कामना एवं दीर्घायु के लिए निर्जल रखती हैं।

इस दिन न केवल चंद्र देवता की पूजा होती है अपितु शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है।

इस दिन विवाहित महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए गौरी पूजन का भी विशेष महात्म्य है।

इस वर्ष, यह व्रत विशेष रूप से फलदायी होगा क्योंकि 100 साल बाद करवाचौथ का

महासंयोग बना है।

१】रोहिणी नक्षत्र, चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र

२】बुधवार, गणेश जी का प्रिय दिन

३】सर्वार्थ सिद्धि योग एवं गणेश चतुर्थी का संयोग इसी दिन है जो ज्योतिषीय दृष्टि से बहुत अच्छा माना जाता है।

गणेश जी की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा।

४】चंद्रमा स्वयं, शुक्र की राशि वृष में उच्च के होंगे।

५】बुध स्वराशि कन्या में

६】और शुक्र व शनि एक ही राशि में विराजमान होंगे।

७】यही नहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी शुक्र प्रेम का परिचायक है। इस दिन शुक्र ग्रह, मंगल की राशि वृश्चिक में है जिससे संबंधों में उष्णता रहेगी।

मंगलवार की रात्रि 11 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी और इसके बाद से चतुर्थी तिथि आरंभ होकर बुधवार की सायं 07.33 बजे तक रहेगी ।

पंडित भुबनेश्वर पर्णकुटी गुना का मानना है की 2016 में करवाचौथ का व्रत रखने से 100 व्रतों का वरदान प्राप्त होगा।

अक्सर कहा जाता है कि करवा चौथ में सुहागिनों को 16 श्रृंगार करके पूजा करनी चाहिए, लेकिन क्या आपको पता है कि 16 श्रृंगार सही में होते क्या हैं। करवाचौथ: हाथों में पूजा की थाली... आई रात सुहागों वाली... आईये जानते हैं 16 श्रृंगार के बारे में... मांग टीका: यह पति द्वारा प्रदान किये गये सिंदूर का रक्षक होता है। बिंदिया: इसे इस तरह से लगाया जाता है कि मांगटीका का एक छोर इसे स्पर्श करे। काजल: काजल अशुभ नजरों से बचाव करता है वहीं ये आपकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है। नथुनी: नाक में पहना जाने वाला यह आभूषण अपनी अपनी परंपरा व रस्मों रिवाज में छोटा-बड़ा होता है। सिंदूर: इस श्रृंगार के माध्यम से प्रथम बार कोई पुरूष किसी स्त्री को अपनी संगिनी बनाता है। मंगलसूत्र: ये भी सुहाग सूचक है, जिसके बिना हर शादी अधूरी है। कर्णफूल: श्रृंगार नंबर 7 को कर्णफूल या ईयर रिंग कहते हैं। मेंहदी: श्रृंगार में नंबर 8 का स्थान 'मेंहदी' का है। कंगन या चूड़ी: इसके बिना हर श्रृंगार अधूरा है। करवाचौथ में क्यों होती है चंद्रमा की पूजा? गजरा बालों को संवार कर उसमें गजरा सजानेे के पीछे कारण ये है कि जब तक बालों में सुगंध नहीं होगी तब तक आपका घर नहीं महकेगा। दुल्हन वो ही अच्छी मानी जाती है जिसके बाल पूरी तरह से व्यवस्थित होते हैं। बाजूबंद कुछ इतिहासकारों ने बाजूबंद मुगलकाल की देन माना है लेकिन पौराणिक कथाओं में इसकी खूब चर्चा है। यह बड़ी उम्र में पेशियों में खिंचाव और हड्डियों में दर्द को नियंत्रित करता है। 'अंगुठी' हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 12 यानी 'अंगुठी' के बारें में। वैसे 11 वां श्रृंगार 'आरसी' के रूप में जाना जाता है। आरसी आइने को कहते हैं लेकिन यहां ये भाव नहीं है। आरसी एक सीसा लगी हुई अंगुठी होती है जो कि दायें हाथ की अनामिका में पहनीं जाती हैं। कमरबंद कमरबंद को तगड़ी भी कहते हैं। काम में उत्साह और शरीर में स्फूर्ति का संचार बना रहे। उत्तम स्वास्थ्य के लिए कमरबंद स्वास्थ्य कारकों से भी आवश्यक और उत्तम माना जाता है। पायल या पाजेब श्रृंगार में 14 वां नंबर है पायल या पाजेब का। दुल्हन अपने घर की गृहलक्ष्मी होती है। उसका संचारण और सुभागमन बहुत शुभ माना जाता है। बिछिया पैरों में अंतिम आभूषण के रूप में बिछिया पहनी जाती है। दोनों पांवों की बीच की तीन उंगलियो में बिछिया पहनने का रिवाज है। परिधान यानी कपड़ा अंतिम और 16वां सबसे महत्वपूर्ण श्रृंगार होता है परिधान। शारीरिक आकार प्रकार के अनुसार परिधान में रंगो का चयन स्त्री के तंत्रिका तंत्र को मजबूत और व्यवस्थित करता है।

Monday, 10 October 2016

विजया दशमी महुर्त और शमी पूजा कैसे करे

  पंडित भुबनेश्वर
कस्तूरवानगर पर्णकुटी गुना
संपर्क 09893946810

विजयदशमी पूजा का समय विजय मुहूर्त

दशहरा मुहूर्त 11 अक्टूबर 2016
विजय मुहूर्त – 11.59 से 12.23 तक है।
शुभ कार्य हैतू यह समय उत्तम है।
कुल समय 24 मीनिट का है।
इसमें विजय हैतू प्रसथान करना शुभ होगा।
यह समय भी अस्त्र शस्त्र पुजन हैतू उत्तम है। पूजा का समय – 12.11 से 13.34 लाभ का चैघड़िया है
इसके बाद अमृत 13.34 से 14.57 तक है।

दशहरे के उपाय ,
दशहरे के टोटके दशहरा हिन्दू धर्म का बहुत प्रमुख पर्व माना जाता है | शास्त्रों के अनुसार दशहरे के दिन किया गया उपाय अत्यंत श्रेष्ट एवं शीर्घ फल देने वाले होते है | इस दिन किए गए उपायों से समस्त सुखों की प्राप्ति होते है एवं सभी चेत्रो में सफलता मिलती है | दशहरे के दिन दोपहर के समय ईशान दिशा में शुद्ध भूमि पर चंदन, कुमकुम, पुष्प से अष्टदल कमल का निमार्ण करके अपराजित देवी एवं जया और विजया देवी का स्मरण कर उनका पूजन करें। इसके बाद शमी वृक्ष का पूजन करें। शमी वृक्ष के पास जाकर विधिपूर्वक सभी पूजा सामग्री को चढ़ाकर शमी वृक्ष की जड़ों में मिट्टी को अर्पित करें। फिर थोड़ी सी मिट्टी वृक्ष के पास से लेकर उसे किसी पवित्र स्थान पर रख दें। इस दिन शमी के कटे हुए पत्ते और डालियों की पूजा नहीं करनी चाहिए। रात्रि में देवी मां के मंदिर में जाकर दीपक जलाएं साथ ही पूरे घर में रोशनी रखें। नवरात्र में विजयादशमी के दिन शमी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि का स्थाई वास होता है। शमी का पौधा जीवन से टोने-टोटके के दुष्प्रभाव और नकारात्मक प्रभाव को दूर करता है। इस दिन संध्या के समय शमी के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से युद्ध और मुक़दमो में विजय मिलती है शत्रुओं का भय समाप्त होता है । आरोग्य व धन की प्राप्ति होती है। शमी वृक्ष तेजस्विता एवं दृढता का प्रतीक भी माना गया है, जिसमें अगि्न तत्व की प्रचुरता होती है। इसी कारण यज्ञ में अगि्न प्रकट करने हेतु शमी की लकडी के उपकरण बनाए जाते हैं। कहते हैं कि लंका पर विजय पाने के बाद राम ने भी शमी पूजन किया था। नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा भी शमी वृक्ष के पत्तों से करने का शास्त्र में विधान है। दशहरे पर शमी के वृक्ष की पूजन परंपरा हमारे यहां प्राचीन समय से चली आ रही है। ऎसी मान्यता है कि मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने के पूर्व शमी वृक्ष के सामने शीश नवाकर अपनी विजय हेतु प्रार्थना की थी। महाभारत के समय में पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्ष में अपने हथियार शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। संभवत: इन्हीं दो कारणों से शमी पूजन की परंपरा प्रारंभ हुई होगी। घर में ईशान कोण (पूर्वोत्तर) में स्थित शमी का वृक्ष विशेष लाभकारी माना गया है। आश्विन माह की विजयदशमी के दिन अपराह्न को शमी वृक्ष के पूजन की परंपरा विशेष कर क्षत्रिय व राजाओं में रही है वह लोग इसके साथ ही अपने अस्त्र शास्त्रों की भी पूजा करते थे । आज भी राजपूत, क्षत्रिय लोग यह परंपरा निभाते है। कहते हैं कि ऎसा करने से व्यक्ति की सभी जगह पर विजय होती है उसका अन्ताकरण पवित्र हो जाता है। इस दिन हमें अपने कार्यक्षेत्र के अस्त्र शास्त्र अर्थात अपने लैपटाप, कम्प्यूटर, अपनी तराजू या जो भी वस्तु हमारे कार्य क्षेत्र में सहायता प्रदान करती है उसकी भी पूजा करनी चाहिए । इससे कार्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता मिलती है । राम नवमी के दिन किसी पूजा की दुकान से 11 काली गूंजा ले आएं फिर दशहरा के दिन सुबह स्नान के पश्चात इन्हे गंगाजल और गाय के कच्चे दूध से धोकर पूजा घर में रखें । पूजा ख़त्म करने के बाद इनको अपने पास रख लें पूजा घर में ही या अपनी तिजोरी में रखे । काली गूंजा के पास होने से जीवन में कोई भी परेशानी नहीं आती है और यदि कोई संकट आया तो इसका रंग बदल जाता है उस समय इसको हटा कर बहते हुए पानी में विसर्जित कर देना चाहिए और फिर किसी शुभ मुहूर्त में पुन: स्थापित कर लेना चाहिए । दशहरा के दिन शाम को संध्या के समय ( अर्थात जब सूर्यास्त होने का और आकाश में तारे उदय होने का समय हो ) वो समय सर्व सिद्धिदायी विजय काल कहलाता है । जीवन में शत्रुओं पर , राजद्वार से, मुकदमो में विजय के लिए विजयादशमी के दिन संध्या के समय इसी सर्व सिद्धिदायी विजयकाल में विजय के लिए के नीचे दिए गए मंत्रो का जाप करे " ॐ अपराजितायै नमः ॥ ” की कम से कम 5 माला का जप करें । उसके पश्चात हनुमान जी का सिद्ध मन्त्र "ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्" ॥ की भी कम से कम दो माला का जप करें । इससे जीवन में दृढ़ता और शक्ति प्राप्त होती है। मनोबल ऊँचा रहता है शत्रु शांत हो जाते है, उसको हर जगह विजय की प्राप्ति होती है। दशहरा के दिन छोटी छोटी पर्चियों पर 'राम' नाम लिख कर उसे अलग अलग आटे की लोई में रखकर मछलियों को खिलाएं , इससे भगवान राजा राम की कृपा से जातक को जीवन में सभी सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है । राम नवमी और विजय दशमी दोनों ही दिन जीवन में शुभता, सफलता और सभी क्षेत्रो में विजय के लिए अपने घर और किसी मंदिर में लाल पताका अवश्य ही लगानी चाहिए । दशहरा के दिन से शुरू करते हुए लगातार 43 दिन तक बेसन के लड्डू कुत्ते को खिलाने चाहिए इससे धन लाभ के योग बनते है और धन में बरकत होने लगती है अर्थात घर कारोबार में धन रुकना भी शुरू हो जाता है । दशहरे से शरदपूर्णिमा तक चन्द्रमा की किरणों में अमृत होता है जो शरद पूर्णिमा के दिन अपने चरम पर होता है। अत: दशहरे से शरदपूर्णिमा तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चंद्रमा के आगे त्राटक (बिना पलकें झपकाये एकटक देखना) करें । इससे नेत्रों के विकार दूर होते है नेत्रों की ज्योति तेज होती है । नागकेसर एक बहुत ही पवित्र और प्रभावशाली वनस्पति है।यह कालीमिर्च के सामान गोल होती है, गेरू रंग का यह गोल फूल घुण्डीनुमा होता है और इसके दाने में डण्डी भी लगी होती है । यह फूल गुच्छो में फूलता है, पकने पर गेरू रंग का हो जाता है। नागकेसर भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है और तन्त्र शास्त्र में भी इसका बहुत ही ज्यादा महत्व है । रामनवमी या दशहरा के दिन नागकेसर का पौधा लाएं और अपने घर में उसे दशहरा के दिन लगा कर नियमपूर्वक उसकी देखभाल करें । मान्यता है कि जैसे जैसे यह पौधा बढ़ता जायेगा आपकी भी उन्नति होती जाएगी । शास्त्रों के अनुसार दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन इनके दर्शन करने से समस्त सुखो की प्राप्ति होती है |

Friday, 7 October 2016

दशहरे पर शमी का पूजन देगा आपको धन और बैभव

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का अपना एक अलग महत्व है। हर एक पर्व हमें यह संदेश देता है कि हम जीवन को किस प्रकार समृद्ध बना सकते हैं। विजयादशमी पर रावण दहन के बाद कई प्रांतों में शमी के पत्ते को सोना समझकर देने का प्रचलन है,तो कई जगहों पर इसके वृक्ष की पूजा का प्रचलन। आओ जानते हैं कि क्यों पूजनीय है यह वृक्ष। अश्विन मास के शारदीय नवरात्र में शक्ति पूजा के नौ दिन बाद दशहरा अर्थात विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक इस पर्व के दौरान रावण दहन और शस्त्र पूजन के साथ शमीवृक्ष का भी पूजन किया जाता है। संस्कृत साहित्य में अग्नि को 'शमी गर्भ'के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष का पूजन करते आए हैं। खासकर क्षत्रियों में इस पूजन का महत्व ज्यादा है। महाभारत के युद्ध में पांडवो ने इसी वृक्ष के ऊपर अपने हथियार छुपाए थे और बाद में उन्हें कौरवों से जीत प्राप्त हुई थी। गुजरात के कच्छ जिले,भुज शहर में करीबन साढ़े चार सौ साल पूराना एक शमीवृक्ष है। भविष्यवक्ता शमी : विक्रमादित्य के समय में सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य वराहमिहिर ने भी अपने 'बृहतसंहिता'नामक ग्रंथ के 'कुसुमलता'नाम के अध्याय में वनस्पति शास्त्र और कृषि उपज के संदर्भ में जो जानकारी प्रदान की है उसमें शमीवृक्ष अर्थात खिजड़े का उल्लेख मिलता है। वराहमिहिर के अनुसार जिस साल शमीवृक्ष ज्यादा फूलता-फलता है उस साल सूखे की स्थिति का निर्माण होता है। विजयादशमी के दिन इसकी पूजा करने का एक तात्पर्य यह भी है कि यह वृक्ष आने वाली कृषि विपत्ती का पहले से संकेत दे देता है जिससे किसान पहले से भी ज्यादा पुरुषार्थ करके आनेवाली विपत्ती से निजात पा सकता है। शमी वृक्ष से लाभ : भारत में खासकर गुजरात में कई किसान अपने खेतों में शमीवृक्ष बोते हैं जिसे उन्हें कई सारे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ भी हुए है। यह वृक्ष पानखर जैसा काँटेदार वृक्ष है जिसके पत्ते सूख जाने के बाद उसमें छोटेःछोटे पीले फूल आते हैं। उसकी जड़ जमीन में बहुत गहराई तक जाती है जिससे उपज के सूखने का भय नहीं रहता। यह वृक्ष हर साल कई प्राणियों के लिए चारे का काम करता है। गर्मियों के दिनों में वह बहुत ही फूलता-फलता है और उसमें ढ़ेर सारे पत्ते आते हैं। खेत की मेढ़ पर उसे बोने से फसल पर पड़ने वाले वायु के अधिक दबाव को भी वह कम कर देता है। जिससे खेतों की फसलों को तूफान से होने वाले नुकसान नहीं होते। इस वृक्ष की लकड़ियों से आज भी कई गाँवों में घर के चूल्हे जलते हैं। विदेशों के कृषि विशेषज्ञों ने भी यह बात मान ली है कि जिस खेत में शमी वृक्ष बोया जाता है उस खेत के किसान को देर-सबेर कई सारे फायदे होते हैं। शायद इसलिए ही हिंदू धर्म में बरगद,पीपल,तुलसी और बिल्व पत्र जैसे पवित्र वृक्षों की तरह ही इस शमी वृक्ष (खीजड़ा)को भी पूजनीय माना जाता है।

Monday, 3 October 2016

दुर्गा पूजन में हवन सामग्री लिस्ट लिंक ओपन करे


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  हमारे संस्थान में समस्त प्रकार की जटिल
समस्यायो का निदान ज्योतिष द्वारा सरल उपाय बताकर    किया  जाता है ।   कुंडली न होने पर

जन्म दिनांक
जन्म समय
जन्म स्थान   तीनों जानकारी  देवे
परामर्श सुल्क "फोन द्वारा सम्पर्क करने पर निश्चत किया जावेगा

पंडित =परमेश्वर दयाल शर्मा
तिलक चौक मक्सूदन गढ़
जिला =गुना =m.p
Contect no.=9893397835

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पंडित =भुवनेश्वर शास्त्री
कस्तूरबा नगर पर्णकुटी
महेन्द्रा शोरूम के सामने
    जिला गुना :मध्यप्रदेश
संपर्क सूत्र "09893946810

संगीतमय
श्री मदभागवत कथा एबं श्री रामकथा  श्री शिव पुराण  प्रवचन आदि कार्य के लिए संपर्क  करे 

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पंडित =घनश्याम शस्त्री
इन्दिरा कालोनी
भोपाल रोड मकसुदंगण
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समस्त प्रकार के अद्द्यात्मिक कर्मकांड से सम्बन्धित
जैसे =महामृत्युंजय अनुष्ठान
सतचण्डि पाठ  समस्त प्रकार के यज्ञ
सन्तान प्राप्ति अनुष्ठान
दाम्पत्य सुख हेतु उपाय
लक्ष्मी प्राप्ति अनुष्ठान  आदि कार्य के लिए सम्पर्क करे

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१】तिल
२】चावल
३】जौ
४】शकर
५】हवन सामग्रि
६】खोपरा गोला
७】घी
८】लौंग
९】इलायची
१०】मिश्री
११】कमल गट्टा
१२】खड़े उड़द
१३】राल
१४】समुद्र फेन
१५】खड़ी हल्दी
१६】पिसी हल्दी
१७】लाजा
१८】सहदेवी
१९】जायफल
२०】भाँग
२१】गांजा
२२】रक्त गुंजा
२३】सफेद गुंजा
२४】कपूर
२५】शंख पुश्पी
२६】गूगल
२७】भोज पत्र
२८】शहद
२९】गोल सुपाड़ी
३०】जटामासी
३१】विष्णु क्रान्ता
३२】लाल चन्दन
३३】सफेद चन्दन
३४】हर्ताल
३५】पीली सर्सो
३६】काली सर्सो
३७】मैनसिल
३८】शिलाजीत
३९】वच
४०】राजान
४१】मधुआसव
४२】ग़ोखरु
४३】कालीमिर्च
४४】गुलाल
४५】अबीर
४६】इत्र
४७】अष्टांग धूप्
४८】पंचमेवा
४९】दारू हल्दी
५०】ब्राह्मी
५१】सतावरी
५२】सोंठ
५३】केसर
५४】जावित्री
५५】दालचीनी
५६】मसूर
५७】कुमकुम
५८】लाजवंती
५९】चिरोंजी
६०】काली हल्दी
६१】कस्तूरी
६२】वज्रदंती
६३】शिवलिंगी बीज
६४】आमी हल्दी
६५】कन गूगल
६६】इंद्र जो
६७】मैनफल
६८】मालकांगनी
६९】बहेड़ा
७०】दाल चीनी
७१】मजीठ
७२】नाग केसर
७३】आशापुरी धूप्
७४】सर्वोखधी
७५】खोपरा बूरा
७६】अगर
७७】हिंगुल
७८】नारियल
<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<:<<<<<<<<<<
        >>>अन्य जगह का सामान >>>
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१】दूध
२】दही
३】फूल
४】दूर्वा
५】अनेक प्रकार के फूल
६】नवग्रह समीधा
७】पीपल के पत्ते
८】अशोक के पत्ते
९】केला
१०】केंथ
११】खिन्नी
१२】नीम गिलोय
१३】बीलफल
१४】आंवला
१५】आम्रफल
१६】कटहल
१७】कागजी नीबू
१८】सिंघाड़ा
१९】लोकी
२०】गुड़
२१】लाल कनेर फूल
२२】लाल कनेर के पत्ता
२३】शमी पत्र
२४】अर्कपुष्प
२५】दाड़िम के फूल
२६】अशोक पुष्प
२७】कमल पुष्प
२८】पलाशपत्र
२९】खेर के पत्ते
३०】सरफोक
३१】सीताफल
३२】गुलकंद
३३】खाजा
३४】काजल डिब्बी
३५】हीगुल
३६】गन्ना
३७】नारंगी
३८】नारीकेलफल
३९】मोर के पंख
४०】बड़ के पत्ते
४१】माँतुलिंग
४२】मक्खन
४३】हरी सब्जी
४४】फूल प्रियंगु
४५】अनार के पत्ते
४६】अनार छिलके
४७】अनार
४८】कुष्मांड
४९】गिलकी
५०】ताड के पत्ते
५१】पालक
५२】मिठाई
५३】ऋतुफल
५४】पान
५५】कन्या के वस्त्र
५६】भैरव के वस्त्र

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========महा आहुति सामग्री =======
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१】प्रथम अध्याय

             (महाआहुति सामग्री)

एक पान पर देशी घी में भिगोकर
कपिथ्य फल (केंथ)
1 कमलगटटा,
1 सुपारी,
2 लौंग,
2 छोटी इलायची,
गुग्गुल,
शहद
पुष्प
यह सब चीजें सुरवा में रखकर खडे होकर आहुति देना।

२】द्वितीय अध्याय

               (महाआहुति सामग्री)

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
,गुग्गुल विशेष।
कमलगट्टा
नारियल फलखंड
पुष्प
लौंग
इलायची
सुपारी

३】त़ृतीय अध्याय

         (महाआहुति सामग्री )

शहद विशेष।
विजोरा नीबू
चन्दन
नीमगिलोय
गुगुल
कमलगट्टा
पेठा
लौंग
इलायची
सुपारी
भोजपत्र
पुष्प
फल

४】चतुर्थ अध्याय

              ( महाआहुति सामग्री )

पान के पत्ते पर
साकल्य्
पायस
कमलगट्टा
विल्वपत्र
लौंग
इलायची
गुगुल
पुष्प

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार, श्लोक सं 1 से 11 मिश्री व खीर विशेष, चतुर्थ अध्याय के मंत्र संख्या 24 से 27 तक इन 4 मंत्रों की आहुति नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से देह नाश होता है। इस कारण इन चार मंत्रों के स्थान पर ओंम नम: चण्डिकायै स्वाहा बोलकर आहुति देना तथा मंत्रों का केवल पाठ करना चाहिए इनका पाठ करने से सब प्रकार का भय नष्ट हो जाता है।

५】पंचम अध्‍याय

            (महाआहुति सामग्री)

पान के पत्ते पर
साकल्य्
लौंग
इलायची
सुपारी
गुगुल
कमलगट्टा
कपूर
स्वेतचन्दन
पुष्प
फल
बिजोरा

६】षष्टम अध्याय

               (महाआहुति सामग्री )

पान  का पत्ता
साकल्य्
कमलगट्टा
गुगुल
भोजपत्र
कुष्मांड
नारंगी
नारीकेलफल
ऋतुफल

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार श्लोक सं 23 भोजपत्र।

७】सप्तम अध्याय

              ( महाआहुति सामग्री )

पान
शाकल्य
लौंग
इलायची
चिरोंजी
लाजवंती
पुष्प
कमलगट्टा 2
जायफल 2
कुष्मांड फलखंड
कर्पूर

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक सं 10 दो जायफल
श्लोक संख्या 19 में सफेद चन्दन
श्लोक संख्या 27 में इन्द्र जौं।

८】अष्टम अध्याय

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 54 एवं 62 लाल चंदन।

              ( महाआहुतिसामग्री)

पान
कमलगट्टा
इलायची
सूपारी
लौंग
गुगुल
कुष्मांड फल खंड
लाल चन्दन
मधु
साकल्य

९】नवम अध्याय

प्रथम अध्याय की सा मग्री अनुसार
श्लोक संख्या
श्लोक संख्या 37 में 1 बेलफल 40 में गन्ना।

               (महाआहुतिसामग्री)

पान
साकल्य
लॉंग
सुपारी
इलायची
कमलगट्टा
विजोरा नीबू
कुष्मांड खंड
इच्छु खंड ( गन्ना)
विल्वफल
मैन फल

१०】दशम अध्याय

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 5 में समुन्द्र झाग 31 में कत्था।

             (  महाआहुति सामग्री)
पान
साकल्य्
लॉंग
इलायची
सुपारी
कस्तूरी
कमलगट्टा
गुगुल
विल्वफल
कुष्मांड खंड
फल
पुष्प मैनसिल
मातुलिंग

११】एकादश अध्याय

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 2 से 23 तक पुष्प व खीर
श्लोक संख्या 29 में गिलोय
31 में भोज पत्र
39 में पीली सरसों
42 में माखन मिश्री
44 में अनार व अनार का फूल
श्लोक संख्या 49 में पालक
श्लोक सं54 एवं 55 में फूल चावल और सामग्री।

              (महाहुति सामग्री)

पान
लौंग
इलायची
कपूर
शकर
पत्र
पुष्प
फल
कमलगट्टा
सुपारी
मिश्री
पायस
गुगुल
इच्छुखंड (गन्ना)
दाणीम् के  फल और फूल
साकल्य्

१२】द्वादश अध्याय

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक संख्या 10 में नींबू काटकर रोली लगाकर और पेठा
श्लोक संख्या 13 में काली मिर्च
श्लोक संख्या
16 ममें बाल खाल
श्लोक संख्या 18 में कुशा
श्लोक संख्या
19 में जायफल और कमल गटटां
श्लोक संख्या 20 में ऋीतु फल फूल चावल और चन्दन
श्लोक संख्या 21 पर हलवा और पुरी
श्लोक संख्या 40 पर कमल गटटा मखाने और बादाम
श्लोक संख्या 41 पर इत्र, फूल और चावल ।

                  (महाहुति सामग्री)
पान
साकल्य्
लौंग
इलायची
सुपारी
अगर
केशर
कस्तूरी
कमलगट्टा
पत्र
पुष्प
फल
जायफल
विल्वफल
मिश्री

१३】त्रयोदश अध्याय

प्रथम अध्याय की सामग्री अनुसार
श्लोक सर्‍ंख्या 27 से 29 तक फल व फूल।

             (   महाआहुति   सामग्री)
पान
साकल्य्
लौंग
इलायची
सुपारी
विल्वफल
गुगुल
कमलगट्टा
फल
शमीपत्र
केशर
स्वेत पुष्प
केशर
कपूर
अर्कपुष्प
नारिकेल खंड

Saturday, 1 October 2016

गणपति जी की चमत्कारी आरती लिंक ओपन करे

हे गणपति तेरी आरती गाऊँ
               सिद्ध विनायक तेरी आरती गाऊँ।

1】विघ्न विनायक रूप तुम्हारो
               हमरे गणपति कष्ट निवारो ।
    प्यारी छवि तेरी मन में बसाऊँ
              है गणपति तेरी आरती गाऊँ।।

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2】मोदक प्रिय है भोग तुम्हारो
                   दूर्वा करती कुल उजियारो।
        एकदंत रूप में ह्रदय में बसाऊँ
                 है गणपति  तेरी आरती गाऊँ।।

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3】प्रथम् पूज्य हो आके विराजो
               हमरे गणपति काज सवारो।
      तेरे चरणों में विनती सुनाऊँ
             है गणपति तेरी आरती गाऊँ।।

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4】शिवजी के हो तुम प्राणपियारे
              माँ गौरा के अखियन के तारे ।
       तुमरी शरण में बार बार आऊँ
              है गणपति तेरी आरती गाऊँ।।

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       गड़पति जी की सिद्ध आरती
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जय गौरी नन्दा देवा जय गौरी नंदा
    गणपति आनंद कन्दा मै चरनन बन्दा ।

1】सूँड़ सूडालो नयन विसालो
                         कुंडल झल कन्दा।।
   कुम कुम केसर चन्दन
                       सिंदूर बद नंदा।।

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2】  मुकुट सुघड़ शोभन्ता
                           मस्तक शोभन्ता।
       बहिया बाजू बन्दा
                    पहुंचे गिरिखन्दा।।

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3】   रतन जड़ित सिंहासन
                           शोभत आनंदा।
        गल मूतियन की माला
                      सुर नर मुनि बन्दा ।।

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4】   मूसक बाहन राजत
                     शिव सुत आनंदा।
          भजत शिवानंद स्वामी
                           मेटत भव फन्दा।।

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