पर्णकुटी ज्योतिष केंद्र
अध्यात्मिक एवं' सामाजिक
Tuesday, 27 June 2017
काम और क्रोध से जुडी 18 बुरी आदतें, इनसे रहना चाहिए बच कर रन चाहिए भी इंसान कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो, उसकी कुछ न कुछ बुरी आदतें जरूर होती हैं। यही बुरी आदतें उसके पतन का कारण बनती हैं। आज हम आपको मनु स्मृति में बताई गई कुछ बुरी आदतों के बारे में बता रहे हैं। मनु स्मृति के अनुसार काम से संबंधित 10 तथा क्रोध से संबधित 18 बुरी आदतें होती हैं- श्लोक दश काम समुत्थानि तथाष्टौ क्रोधजानि च। व्यसनानि दुरंतानि प्रयत्नेन विवर्जयेत्।।
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काम और क्रोध से जुडी 18 बुरी आदतें, इनसे रहना चाहिए बच कर रन चाहिए कोई भी इंसान कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो, उसकी कुछ न कुछ बुरी आदतें ज...
मनु स्मृति के अनुसार, विद्या यानी ज्ञान जहां से भी, जिस किसी भी व्यक्ति से, चाहे वो अच्छा हो या बुरा लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। ज्ञान से हम अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं। ज्ञान प्राप्त होने पर हमारे लिए कुछ भी पाना ज्यादा कठिन नहीं रह जाता, लेकिन इसके लिए जरूरी है उस ज्ञान को अपने चरित्र में उतारना। ज्ञान सिर्फ सुनने तक ही सीमित नहीं है, उसे अपने आचार-विचार, व्यवहार व जीवन में उतारने पर ही हम अपने लक्ष्य को आसानी से पा सकते हैं। ज्ञान ही हमें देश-दुनिया में लगातार हो रहे बदलावों के बारे में बताता है। इन बातों को जानकर ही हमारी मानसिकता भी बड़ी होती है। इसलिए विद्या जहां से भी मिले, उसे लेने का प्रयास करना चाहिए।
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श्लोक स्त्रियो रत्नान्यथो विद्या धर्मः शौचं सुभाषितम्। विविधानि च शिल्पानि समादेयानि सर्वतः।। अर्थ- जहां कहीं या जिस किसी से (अच्छे या ...
मनु स्मृति के अनुसार कुछ लोगों को कभी मेहमान नहीं बनाना चाहिए और यदि ऐसे लोग दिख भी जाएं तो उनसे नमस्ते भी नहीं करना चाहिए। ये लोग कौन हैं और इन्हें क्यों मेहमान नहीं बनाना चाहिए, जानिए-
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भारतीय संस्कृति के अनुसार अगर कोई अनजान व्यक्ति भी भूले-भटके हमारे घर आ जाए तो उसे भी मेहमान ही समझना चाहिए और यथासंभव उसका सत्कार करना चाहि...
मनुस्मृति के एक श्लोक में बताया गया है कि किन लोगों के सामने आ जाने पर स्वयं मार्ग से हटकर इन्हें पहले जाने देना चाहिए।
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मनुस्मृति के एक श्लोक में बताया गया है कि किन लोगों के सामने आ जाने पर स्वयं मार्ग से हटकर इन्हें पहले जाने देना चाहिए। श्लोक चक्रिणो दशम...
Monday, 26 June 2017
विद्यार्थी के पाँच लक्षण होते हैं : कौवे जैसी दृष्टि , बकुले जैसा ध्यान , कुत्ते जैसी निद्रा , अल्पहारी और गृहत्यागी । अनभ्यासेन विषम विद्या । बिना अभ्यास के विद्या बहुत कठिन काम है सुखार्थी वा त्यजेत विद्या , विद्यार्थी वा त्यजेत सुखम ।सुखार्थिनः कुतो विद्या , विद्यार्थिनः कुतो सुखम ॥
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स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान सर्वत्र पूज्यते । राजा अपने देश में पूजा जाता है , विद्वान की सर्वत्र पूजा होती है काकचेष्टा वकोध्यानं श्वा...
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