ज्योतिष समाधान

Tuesday, 21 November 2023

श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रम्

श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रम् 

आधाररूपे चाधेये धृतिरूपे धुरन्धरे ।
ध्रुवे ध्रुवपदे धीरे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १॥
शिवाकारे शक्तिरूपे शक्तिस्थे शक्तिविग्रहे ।
शक्ताचारप्रिये देवि जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ २॥
जयदे जगदानंदे जगदेकप्रपूजिते ।
जय सर्वगते दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ३॥
सूक्ष्मातिसूक्ष्मरूपे च प्राणापानादिरूपिणि ।
भावाभावस्वरूपे च जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ४॥
कालाधिरूपे कालेशे कालाकालविभेदिनि ।
सर्वस्वरूपे सर्वज्ञे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ५॥
महाविघ्ने महोत्साहे महामाये वरप्रदे ।
प्रपञ्चसारे साध्वीशे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ६॥
आगम्ये जगतामाद्ये माहेश्वरि वराङ्गने ।
अशेषरूपे रूपस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ७॥
तीर्थयज्ञ -तपोदान-योगसारे जगन्मयि ।
त्वमेव सर्वं सर्वस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ८॥
दयारूपे दयादृष्टे दयार्द्रे दुःखमोचनि ।
सर्वापत्तारिके दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ९॥
आगम्यधाम-धामस्थे महायोगीश-हृत्पुरे ।
अमेयभावकूटस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १०॥

इति श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

शुभमऽस्तु   ! 
हेमवत्यै नम:। भुवनेश्वर्यै नम:। अह्लादिन्यै नम:।

नक्षत्र ज्ञान

श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रम् 

आधाररूपे चाधेये धृतिरूपे धुरन्धरे ।
ध्रुवे ध्रुवपदे धीरे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १॥
शिवाकारे शक्तिरूपे शक्तिस्थे शक्तिविग्रहे ।
शक्ताचारप्रिये देवि जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ २॥
जयदे जगदानंदे जगदेकप्रपूजिते ।
जय सर्वगते दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ३॥
सूक्ष्मातिसूक्ष्मरूपे च प्राणापानादिरूपिणि ।
भावाभावस्वरूपे च जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ४॥
कालाधिरूपे कालेशे कालाकालविभेदिनि ।
सर्वस्वरूपे सर्वज्ञे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ५॥
महाविघ्ने महोत्साहे महामाये वरप्रदे ।
प्रपञ्चसारे साध्वीशे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ६॥
आगम्ये जगतामाद्ये माहेश्वरि वराङ्गने ।
अशेषरूपे रूपस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ७॥
तीर्थयज्ञ -तपोदान-योगसारे जगन्मयि ।
त्वमेव सर्वं सर्वस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ८॥
दयारूपे दयादृष्टे दयार्द्रे दुःखमोचनि ।
सर्वापत्तारिके दुर्गे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ ९॥
आगम्यधाम-धामस्थे महायोगीश-हृत्पुरे ।
अमेयभावकूटस्थे जगद्धात्रि नमोऽस्तु ते ॥ १०॥

इति श्रीजगद्धात्रीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

शुभमऽस्तु   ! 
हेमवत्यै नम:। भुवनेश्वर्यै नम:। अह्लादिन्यै नम:।

Thursday, 2 November 2023

करवा चौथ ब्रत

ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक महिलाओं तक सभी नारियाँ करवाचौथ का व्रत बडी़ श्रद्धा एवं उत्साह के साथ रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए। पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी के जैसे दिन भर उपवास रखकर रात में चन्द्रमा को अ‌र्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में करवाचौथ व्रतोत्सव अधिकतर महिलाएं अपने परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं लेकिन अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं।

यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक निरंतर प्रति वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन करें।


काल से चली आ रही है. जब पांडवों पर संकट के बादल मंडराए थे तो श्रीकृष्ण के कहे अनुसार द्रोपदी ने करवा चौथ का व्रत पूजन किया था. जिसके प्रभाव से पांडवों पर आई विपदा टल गई थी. मान्यता है जो सुहागिन स्त्री इस दिन अन्न-जल का त्याग कर व्रत रखती हैं उसके सुहाग पर कभी कोई आंच नहीं आती.



कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर निराहार रहें। [2]


पूजन

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उस दिन भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चन्द्रमा का पूजन करें। पूजन करने के लिए बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर उपरोक्त वर्णित सभी देवों को स्थापित करें।[3]


नैवेद्य

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शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य हेतु बनाएँ।


करवा

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काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से बनाये गए मिट्टी के करवे अथवा तांबे के बने हुए करवे।


संख्‍या

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10 अथवा 11 करवे अपनी सामर्थ्य अनुसार रखें।


कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं।


पूजन विधि

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चौथ पूजा के दौरान एक समूह में बैठ सुहागिने, गीत गाते हुए थालियों की फेरी करती हुई

बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर नाड़ा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें।[4]


पूजन हेतु निम्न मंत्र बोलें

-

'ॐ शिवायै नमः' से पार्वती का, 'ॐ नमः शिवाय' से शिव का, 'ॐ षण्मुखाय नमः' से स्वामी कार्तिकेय का, 'ॐ गणेशाय नमः' से गणेश का तथा 'ॐ सोमाय नमः' से चंद्रमा का पूजन करें।


करवों में लड्डू का नैवेद्य रखकर नैवेद्य अर्पित करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित कर पूजन समापन करें। करवा चौथ व्रत की कथा पढ़ें अथवा सुनें।


सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर चंद्रमा का पूजन कर अर्घ्य प्रदान करें। इसके पश्चात ब्राह्मण, सुहागिन स्त्रियों व पति के माता-पिता को भोजन कराएँ। पति की माता (अर्थात अपनी सासूजी) को उपरोक्त रूप से अर्पित एक लोटा, वस्त्र व विशेष करवा भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि वे जीवित न हों तो उनके तुल्य किसी अन्य स्त्री को भेंट करें। इसके पश्चात स्वयं व परिवार के अन्य सदस्य भोजन करें।

Sunday, 29 October 2023

लक्ष्मी पूजन सामग्री

16
महा लक्ष्मीपूजन सामग्री लिस्ट 

सामग्री आव्यशकतानुसार   कम ज्यादा ला सकते है 
  
पाना लक्ष्मी व श्री गणेश की मूर्तियां (बैठी हुई मूर्ति

१】धूप बत्ती (अगरबत्ती) 
२】चंदन
३】 कपूर 
४】केसर 
५】यज्ञोपवीत 5 
६】कुंकु 
७】चावल 
८】अबीर 
९】गुलाल, 
१०】अभ्रक 
११】हल्दी 
१२】सौभाग्य द्रव्य-
१३】मेहँदी 
१४】चूड़ी, 
१५】काजल, 
१६】बिछुड़ी आदि आभूषण 
१७】आंटी (कलावा)
१८】रुई 
१९】रोली,
२०】 सिंदूर 
२१】सुपारी, 
२२】पान के पत्ते 
२३】पुष्पमाला, 
२४】कमलगट्टे 
२५】धनिया खड़ा 
२६】 कुशा व दूर्वा
२७ पंच मेवा 
२८】गंगाजल
२९】शहद (मधु) 
३०】शकर
३१】 घृत (शुद्ध घी) 
३२】दही 
३३】दूध 
३४】ऋतुफल(गन्ना, सीताफल, सिंघाड़े इत्यादि) 
३५】नैवेद्य या मिष्ठान्न (पेड़ा, मालपुए इत्यादि) ३६】इलायची (छोटी)
३७】लौंग 
३८】मौली
३९】इत्र की शीशी 
४०】तुलसी दल 
४१】सिंहासन (चौकी, आसन) 
४२】पंच पल्लव(बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते)  सम्भब हो तो

४३】 लक्ष्मीजी का पाना (अथवा मूर्ति) 
४४】गणेशजी की मूर्ति सरस्वती का चित्र 
४५】चाँदी का सिक्का  श्रद्धानुसार 
४६】लक्ष्मीजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र  श्र्द्धा अनुसार 
४७】गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र श्रद्धाअनुसार 
४८】अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र श्रद्धानुसार 
४९】जल कलश (ताँबे या मिट्टी का) 
५०】सफेद कपड़ा (आधा मीटर)
५१】लाल कपड़ा (आधा मीटर) 
५२】दीपक बड़े दीपक के लिए तेल
५३】 ताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा) 
५४】श्रीफल (नारियल)
५५】धान्य (चावल, गेहूँ)

५६】लेखनी (कलम) 
५७】बही-खाता, 
५८】स्याही की दवात
५९】तुला (तराजू)  अगर संभव हो तो 
६०】 पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल) 
६१】एक नई थैली में हल्दी की गाँठ, खड़ा धनिया व दूर्वा आदि खील-बताशे अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र

संपर्क
पंडित =भुबनेश्वर 
कस्तूरवानगर पर्णकुटी गुना 
मोबाइल =०९८९३९४६८१०

Sunday, 22 October 2023

दुर्गा सप्तशती सम्पूर्ण हवन सामाग्री







जौ 
चावल 
इलायची 
शकर 
मिश्री 
उड़द 
राल 
समुद्र फेन 
कमल गट्टा 
हल्दी 
सरसों 
जायफल 
विजया 
रक्त गूंजा 
कपूर 
शंख  पुष्प 
गूगल 
शहद 
लोंग 
सुपारी 
लाजा 
शहदेवी 
भेशा गूगल 
नीमगिलोय 
जटा मांसी 
विष्णुकान्ता 
रक्त  चंदन 
हर ताल 
मेनसील 
गुड़ 
बच 
अम चूर 
राजान
मधु आसब
गोखरू 
 काली मिर्च 
गुलाल 
चंदन 
स्वेतचंदन 
ब्राह्मी 
 इत्र 
अष्टगंध 
पंचमेवा 
गुलकन्द 
भोजपत्र 
आवला 
धूप 
दारु हल्दी 
सताबरी 
सोठ 
अबीर 
केशर 
जाबत्रि
दालचीनी 
गूंजा 
काजल 
ख़ाजा
हिंगुल 
मसूर 
कालीहल्दी 
कस्तूरी 
कुमकुम 
वज्र दांति
चिरौंजी 
लाजवंती 
आमी हल्दी 
इन्द्र  जो 
मोर पंखी
बेला गिरी 
मेन फल  
मातू लिंग 
माल कंगनी
बहेड़ा 
मजीठ
नाग केशर 
प्रियगूं 
आशापूरी  धूप 
सर्व औषधी 
अगर 
खोपरा बूरा 
सफेद  केशर 
शिलाजीत 
सफेद  गूंजा 
मोर पंखें 
शिव लिंगी  के बीज 
कण गूगल 

=========================
=========================
पत्ते  पीपल 
फूल
फल 
अतर झाड़ा 
शमी 
कुश  
दूर्वा 
पान 
केला 
आवला 
कटहल 
बील फल 
नारियल  खंड 
काग़ज़ी  नींबु 
काँच 
खींरनी 
सिंघाडा
दूध 
इत्र 
हलूआ 
विजोरा नींबु 
लाल  कनेर 
सीता फल 
पंच मेवा 
रक्त नीर 
काजल 
खाजा 
गन्ना 
पेठा 
नारंगी 
कुमकुम 
मोर पंख 
कबीठ 
दही 
माखन 
दाडीम के  फूल
अनार 
अनार  के  छिलके 
पेड़ा 



 







Friday, 20 October 2023

शिव पुराण कथा सामग्री


हल्दीः--------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------10गोले ग
३】गुलावजल--------    100ग्राम
४】कपूर---------------------   50 ग्राम
५】केसर-------------------------   1डिव्वि
६】चंदन पेस्ट ------------------ 50 ग्राम
७】यज्ञोपवीत -----------------   2 मुुठा
८】चावल---------------------- 15 किलो
९】अबीर-------------------------50 ग्राम
१०】गुलाल,------1000ग्राम,{पांच प्रकार की }
११】अभ्रक-------------------100 ग्राम
१२】सिंदूर --------------------100 ग्राम
१३】रोली, --------------------100ग्राम
१४】सुपारी, ( बड़ी)--------  200 ग्राम
१५】नारियल -----------------  21 नग्
१६】सरसो पीली---------------50 ग्राम
१७】पंच मेवा--------------100 ,100 ग्राम ({अलग ,अलग}
१८】शहद (मधु)--------------- 100 ग्राम
१९】शकर-----------------------0 3 किलो
२०】घृत (शुद्ध घी)------------  03 किलो
२१】इलायची (छोटी)-----------10ग्राम
२२】लौंग मौली-------------------10ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२४】रंग लाल----------------------20ग्राम
२५】रंग काला --------------------20ग्राम
२६】रंग हरा -----------------------20ग्राम
२७】रंग पिला ---------------------20ग्राम
२८】चंदन मूठा--------------------1 नग्
२९】धुप बत्ती ----------     2 पैकेट
30】तिल का तेल -------------2 लीटर 
(31)दाख {बड़ी}-----------------50 ग्राम
32】आँवला --------------------50ग्राम
(32)मूँग बडी--------------------200ग्राम
(33)पापाड़थेली------------------01थैली
 


Gurudev Bhubaneswar:
Parnkuti ashram guna
9893946810
 ==================

========================
३२】सप्त धान्य-कुलबजन--------100ग्राम
१】 जौ-----------
२】गेहूँ-
३】चावल-
४】तिल-
५】काँगनी-
६】उड़द-
७】मूँग
=============================
३३】कुशा 
३४】दूर्वा
35】पुष्प कई प्रकार के 
३६】गंगाजल
३७】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो
38】पंच पल्लव
१】बड़,
२】 गूलर,
३】पीपल,
४】आम 
५】पाकर के पत्ते)
=========================
३९】बिल्वपत्र
४०】शमीपत्र
४१】सर्वऔषधि 
४२】अर्पित करने हेतु पुरुष बस्त्र
४३】मता जी को अर्पित करने हेतु  
सौ भाग्यवस्त्र 

बर्तन
(1)जल कलश तांबे 
मिट्टी के कलश ढक्कन सहित 5 नग
खप्पर 5 


१】सफेद कपड़ा 3मीटर
२】लाल कपड़ा 2मीटर
(3)पीला कपड़ा3मीटर
४】हरा कपड़ा 1मीटर
(5) काला कपडा 1मीटर
     पीला चद्दर 1
     छींट का कपड़ा 2मीटर



पान के पत्ते ------------11 नग
भस्म 100 ग्राम
बन्दनवार
पान के पत्ते ------------11


 ब्राह्मणों के लिए उपयोगी 
सावुन नहाने के---------------
सावुन कपड़े धोने के --------
सर्फ कपडे धोने का ---------
मंजन -------------------------
तेल ----------------------------

Gurudev
Bhubneshwar
Parnkuti aashram
Guna
9893946810

Monday, 9 October 2023

एकादशी मे श्राद्ध करे या न करे

🌼 श्राद्ध पक्ष 🌼
एकादशी के दिन श्राद्ध नहीं होता।
शास्त्र की आज्ञा है कि एकादशी के दिन श्राद्ध नहीं करना चाहिये। पुष्कर खंड में भगवान शंकर ने पार्वतीजी को स्पष्ट रूप से कहा है ,जो एकादशीके दिन श्राद्ध करते हैं तो श्राद्ध को खाने वाला और श्राद्ध को खिलाने वाला और जिसके निमित्त वह श्राद्ध हो रहा है वह पितर, तीनों नर्क गामी होते हैं। उसके लिए ठीक तो यही होगा कि वह उस दिन के निमित्त द्वादशी को श्राद्ध करें। तो हमारे महापुरुषों का कहना है  कि अगर द्वादशी को श्राद्ध नहीं करें और एकादशी को करना चाहे तो पितरों का पूजन कर निर्धन ब्राह्मण को केवल फलाहार करावे। भले ही वह ब्राह्मण एकादशी करता हो या ना करता हो। लेकिन हमें उस दिन उसे फलाहार ही करवाना चाहिए।
एकादशी के दिन अन्न का निषेध वाक्य मिलता है ,इस नियम अनुसार श्राद्ध का भी मना कह दिया गया है श्राद्ध का अन्न से गहरा संवंध है व्रत के दिन वैकल्पिक व्यवस्था एकादशी नियम की जो कहीहै उसी नियम से श्राद्ध की व्यवस्था कही गई है। अतः श्राद्ध करना आवश्यक ही है यदि पिण्डदान भी करना है तो फल आदि की पिष्टी का भी वर्णन श्रीराम के  द्वारा किये गए श्राद्ध में मिलता है।