ज्योतिष समाधान

Monday, 9 July 2018

27 जुलाई को पड़ेगा सबसे लंबा ग्रहण, सभी शहरों में देगा दिखाई साल का सबसे बड़ा चन्द्र ग्रहण 27 और 28 जुलाई को होगा। गुरुदेब भुबनेश्वर पर्णकुटी वालो ने बताया कि यह चन्द्र ग्रहण साल का सबसे लंबा चन्द्र ग्रहण होगा और विक्रम सम्वत 2075 में एक मात्र खग्रास चन्द्र ग्रहण है जो भारत के सभी शहरों में दिखाई देगा।ग्रहण के दिन मंत्र सिद्धि का समय :- चन्द्र ग्रहण के दिन आप रात्रि 11 बजकर 56 मिनट से रात्रि 03 बजकर 48 मिनट तक लगातार मंत्र के जप करें | ऐसा करने से आपके द्वारा जप किये गये मंत्र में परिपक्वता आ जाएगी | अब मंत्र का प्रयोग आप किसी भी कार्य सिद्धि के लिए कर सकते है | मंत्र जप विधि : – 27 जुलाई रात्रि 11 बजकर 56 मिनट से पहले स्नान करके पूर्व दिशा की तरफ आसन बिछाकर बैठ जाये | एक घी का दीपक जलाये और हाथ में थोडा जल लेकर संकल्प ले | संकल्प लेने के पश्चात् मंत्र जप शुरू कर दे और रात्रि 03 बजकर 48 मिनट तक लगातार मंत्र जप करें | अब आप फिर से हाथ में थोडा जल लेकर संकल्प ले और अपने आसन को थोडा मोड़कर खड़े हो जाये | मंत्र जप के तुरंत बाद जो कपड़े आपने पहने हुए है, उनको पहने हुए ही स्नान करें |

जुलाई 2018 चंद्र ग्रहण राशि अनुसार प्रभाव चंद्रग्रहण – ज्योतिष अनुसार साल 2018 का दूसरा व अंतिम चंद्रग्रहण 27 व 28 जुलाई को दिखाई देगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा व भारत देश सहित कई देशो में देखने को मिलेगा.
साल का सबसे बड़ा चन्द्र ग्रहण 27 और 28 जुलाई को होगा। गुरूदेव भुबनेश्वर पर्णकुटी वालो ने बताया कि यह चन्द्र ग्रहण साल का सबसे लंबा चन्द्र ग्रहण होगा और विक्रम सम्वत 2075 में एक मात्र खग्रास चन्द्र ग्रहण है जो भारत के सभी शहरों में दिखाई देगा।
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यह चन्द्र ग्रहण आषाढ़ी पूर्णिमा 27-28 जुलाई को घटित होगा।

ग्रहण का समय भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 27 जुलाई को 11: 54 बजे प्रारम्भ होगा।

ग्रहण मध्य का समय 28 जुलाई को 1:52 बजे होगा

तथा ग्रहण समाप्त 3:49 बजे पर होगा।

इस सम्पूर्ण ग्रहण का पर्व काल 3 घण्टा 55 मिनट रहेगा।

ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर पश्चात 02:54 बजे प्रारम्भ होगा।
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ग्रहण एवं गुरू पूर्णिमा ग्रहण के बाद गुरु पूर्णिमा एवं अन्य पर्व का विशेष पूजन-अर्चन आदि आयोजित नहीं होंगे।

इसके पश्चात मन्दिरों में आरती नहीं की जाएगी और गर्भगृह के कपाट बन्द कर दिए जाएंगे।

ग्रहण का फल यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र में घटित होगा यह ग्रहण आषाढ़ मास में शुक्रवार के दिन घटित हो रहा है।

शास्त्रों में आषाढ़ मास में होने वाले ग्रहण से कहीं कुछ वर्षा, कहीं रोग, कहीं अन्य का लाभ तथा वर्ष में शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती हैै।

ग्रहण क्रूर ग्रह मंगल से युत है, इसलिए शासक वर्ग में परेशानी की सम्भावना हो सकती है।

ग्रहण शुक्रवार को होने के कारण शुभ फल प्राप्त होने की सम्भावना है।

चांदी, चावल, दूध, रूई इत्यादि वस्तुओं पर भी नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।

राशियों पर क्या होगा प्रभाव उत्तराषाढ़ एवं श्रवण नक्षत्र वाले एवं मकर राशि वाले व्यक्तियों के लिए यह ग्रहण अधिक अशुभफलदायक रहेगा।

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- ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान अवश्य करें।
- गर्भवती महिला ग्रहण खत्म होने पर स्नान करके वापस शुद्ध हो जाए।

- दूषित भोजन का सेवन किसी को भी नहीं करना चाहिए।
- ग्रहण से पहले का पका हुआ खाना भी नहीं खाना चाहिए।
- गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में एक नारियल अपने पास रखें।
- इससे गर्भवती महिला पर वायुमंडल से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं होता है।
- ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं चाकू, कैंची और सुई का बिल्कुल भी प्रयोग न करें।
- ग्रहण के वक्त गर्भवती महिला को घर के अंदर रहना चाहिये, बाहर नहीं निकलना चाहिए।
- ग्रहण के वक्त गर्भवती महिला को सोना नहीं चाहिए।
- घर के अंदर ऊंचे स्वर में मंत्रों का जाप किया जाना चाहिए।

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए जानने योग्य सबसे जरूरी बात है इस दौरान बाहर निकलने की भूल ना करें।
ऐसा माना जाता है क‍ि ग्रहण की तरंगे आपके अजन्मे शिशु पर बुरा प्रभाव कर सकती हैं। ग्रहण काल में सबसे ज्यादा सावधानी गर्भवती महिलाओं को रखनी चाहिए।
इस दौरान वे सबसे ज्यादा संवेदनशील होती हैं और गर्भस्थ शिशु पर ग्रहण काल का असर विपरीत पड़ सकता है।

... बालक, बृद्ध और रोगी पर कोई नियम नही लागू होता है
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गरूदेव भुबनेश्वर  पर्णकुटी वालो ने बताया कि चंद्र ग्रहण का सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा. अतः किन लोगो के लिए चंद्र गK्रहण शुभ रहेगा व किन राशियों के लिए चंद्र ग्रहण अशुभ.

मेष राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

मेष राशि – मेष राशि के जातको के लिए चंद्रग्रहण का प्रभाव मिलाजुला रहेगा। पारिवारिक सुखों में वृद्धि होगी लेकिन कार्यक्षेत्र में कुछ परेशानिया आ सकती है. इस दौरान आपको सफलता पाने के लिए और अधिक संघर्ष करने होंगे. चंद्रग्रहण के प्रभाव के कारण सेहत में गिरावट आ सकती है. इसलिए अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा.

वृषभ राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

वृषभ राशि – ग्रहण के दौरान आपको खास सावधानी बरतने की आवश्यकता है. किसी बात को लेकर चिंता हो सकती है. प्रेम सम्बन्धो के लिए समय बढ़िया रहेगा. आर्थिक स्थिति व सेहत भी अच्छी रहेगी. इस दौरान आपको अनावश्यक के विवादों से दूर रहने की आवश्यकता है.

मिथुन राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

मिथुन राशि – मिथुन राशि के जातको के लिए यह चंद्रग्रहण सामान्य रहेगा. इस दौरान आपके विरोधी शांत रहेंगे. अचानक धन लाभ हो सकता है लेकिन इसी के साथ आपको अपने खर्चो पर भी ध्यान देने की जरूरत है. कार्यक्षेत्र में आय वृद्धि की अपार संभावना बन रही है.

कर्क राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

कर्क राशि – कर्क राशि के जातको के लिए चंद्र ग्रहण का प्रभाव औसत रहेगा. व्यवसाय संबंधी सभी परेशानियां दूर होंगी. कारोबार में मुनाफा प्राप्त होगा. पार्टनर से बातचीत करते समय धैर्य रखना होगा व साथ ही अपने गुस्से पर भी नियंत्रण रखें.

सिंह राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

सिंह राशि – चंद्र ग्रहण के प्रभाव से आपके स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. इसलिए अपने सेहत का ध्यान रखें. काम को लेकर यात्रा करनी पड़ सकती है. कार्यक्षेत्र की कोई नई जिम्मेदारी या कोई नया प्रोजेक्ट मिल सकता है. इस दौरान आपको पैसों के लेन – देन में ख़ास सावधानी बरतनी होगी.

कन्या राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

कन्या राशि – कन्या राशि के जातको के लिए 27 जुलाई पूर्ण चंद्रग्रहण का प्रभाव बहुत ही शुभ रहेगा. थोड़ी मेहनत में अधिक लाभ होगा. खर्चे बढ़ सकते है लेकिन आर्थिक स्थिति बढ़िया रहने से पैसों के कारण कोई भी कार्य नहीं रूकेगा. समाज में मान सम्मान में वृद्धि होगी. चंद्रग्रहण के प्रभाव से आपके सभी कार्य समय पर पूर्ण होंगे.

तुला राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

तुला राशि – तुला राशि के जातको के लिए चंद्रग्रहण का प्रभाव काफी बढ़िया साबित होगा. इस दौरान आप अपने सभी कार्य पुरे उत्साह से करेंगे. कार्यस्थल पर मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी इसके आलावा नौकरी व व्यवसाय में सफलता प्राप्त होगी। आय में वृद्धि भी हो सकती है.

वृश्चिक राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

वृश्चिक राशि – चंद्रग्रहण का प्रभाव वृश्चिक राशि के जातकों के लिए काफी लाभप्रद रहेगा. धन लाभ में वृद्धि होने से आर्थिक स्थिरता आएगी।इस दौरान आप अपने प्रियजनों के साथ अच्छा समय व्यतीत करने में सफल रहेंगे. व्यवसाय विस्तार के योग बन रहे है साथ ही बिज़नेस से अच्छा धन लाभ प्राप्त होगा. सेहत भी इस दौरान आपकी बढ़िया रहेगी.

धनु राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

धनु राशि – 27 जुलाई पूर्ण चंद्रग्रहण का प्रभाव धनु राशि के जातकों के लिए सामान्य रहेगा. काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है. इस दौरान आपको अपनी सेहत का भी ध्यान रखने की भी जरूरत है. किसी भी अजनबी व्यक्ति की बातों में ना आये और किसी भी काम में निवेश करने से पहले अच्छे से सोच विचार कर ले.

मकर राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

मकर राशि – 27 जुलाई पूर्ण चंद्रग्रहण का प्रभाव मकर राशि के जातकों पर शुभ रहेगा. कई समय से रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे. कर्जे से छुटकारा मिलेगा. कार्यस्थल पर कोई नया पद मिल सकता है. अतिरिक्त आय के साधन सामने आएंगे. परिवार के सदस्यों के सहयोग से सभी मत्वपूर्ण कार्य पूरे होंगे. इस दौरान आपको बेवजह तनाव लेने से दूर रहना होगा.

कुंभ राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

कुंभ राशि – कुम्भ राशि के जातको के लिए 27 जुलाई पूर्ण चंद्रग्रहण का प्रभाव सामान्य रहेगा.रूका हुआ धन वापस मिलने के योग बन रहे है. इस दौरान आपको घर परिवार व कार्यस्थल में किसी भी प्रकार के वाद – विवाद करने से बचना होगा इसके आलावा स्वास्थ्य का ध्यान रखने की आवश्यकता है.

मीन राशि पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव

मीन राशि – मीन राशि के जातकों के लिए चंद्रग्रहण का प्रभाव अच्छा रहेगा. काम को लेकर छोटी दूरी की यात्रा कर सकते है. कार्ययोजना सफल होगी. भाई बहनो के साथ अच्छा समय व्यतीत कर पाएंगे. भौतिक सुख – साधनो में वृद्धि होगी. इस दौरान आप कोई नया काम भी शुरू कर सकते है. विदेशी कारोबार से जुड़े लोगो को अपार मुनाफा प्राप्त हो सकता है.

गुरु देव
भुबनेश्वर
9893946810

साल का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण डालेगा बड़ा प्रभाव, जानिए कैसे बदलेंगे सितारे

साल का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण डालेगा बड़ा प्रभाव, जानिए कैसे बदलेंगे सितारे

27 जुलाई को पड़ेगा सबसे लंबा ग्रहण, सभी शहरों में देगा दिखाई

। साल का सबसे बड़ा चन्द्र ग्रहण 27 और 28 जुलाई को होगा। गरूदेव bhubneshwar पर्णकुटी वालो ने बताया कि यह चन्द्र ग्रहण साल का सबसे लंबा चन्द्र ग्रहण होगा और विक्रम सम्वत 2075 में एक मात्र खग्रास चन्द्र ग्रहण है जो भारत के सभी शहरों में दिखाई देगा।

यह चन्द्र ग्रहण आषाढ़ी पूर्णिमा 27-28 जुलाई को घटित होगा।

ग्रहण का समय भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 27 जुलाई को 11: 54 बजे प्रारम्भ होगा।

ग्रहण मध्य का समय 28 जुलाई को 1:52 बजे होगा

तथा ग्रहण समाप्त 3:49 बजे पर होगा।

इस सम्पूर्ण ग्रहण का पर्व काल 3 घण्टा 55 मिनट रहेगा।

ग्रहण का सूतक 27 जुलाई को दोपहर पश्चात 02:54 बजे प्रारम्भ होगा।

ग्रहण एवं गुरू पूर्णिमा ग्रहण के बाद गुरु पूर्णिमा एवं अन्य पर्व का विशेष पूजन-अर्चन आदि आयोजित नहीं होंगे।

इसके पश्चात मन्दिरों में आरती नहीं की जाएगी और गर्भगृह के कपाट बन्द कर दिए जाएंगे।

ग्रहण का फल यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र में घटित होगा यह ग्रहण आषाढ़ मास में शुक्रवार के दिन घटित हो रहा है।

शास्त्रों में आषाढ़ मास में होने वाले ग्रहण से कहीं कुछ वर्षा, कहीं रोग, कहीं अन्य का लाभ तथा वर्ष में शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती हैै।

ग्रहण क्रूर ग्रह मंगल से युत है, इसलिए शासक वर्ग में परेशानी की सम्भावना हो सकती है।

ग्रहण शुक्रवार को होने के कारण शुभ फल प्राप्त होने की सम्भावना है।

चांदी, चावल, दूध, रूई इत्यादि वस्तुओं पर भी नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।

राशियों पर क्या होगा प्रभाव उत्तराषाढ़ एवं श्रवण नक्षत्र वाले एवं मकर राशि वाले व्यक्तियों के लिए यह ग्रहण अधिक अशुभफलदायक रहेगा।

विभिन्न राशियों के लिए ग्रहण फल निम्मानुसार है।

मेष राशिः- सुख एवं वैभव की प्राप्ति
वृषभ राशिः- मानहानि की आशंका एवं अनावश्यक भय
मिथुन राशिः- आकस्मिक दुर्घटनाओं की आशंका
कर्क राशिः- जीवन साथी को परेशानी
सिंह राशिः- शुभ फलप्रद, कार्यों की सिद्धि एवं सफलता
कन्या राशिः- अशुभफलप्रद एवं पीड़ा
तुला राशिः- कार्यों में अनावश्यक अवरोध एवं परेशानी
वृश्चिक राशिः- कार्यसिद्धि एवं सफलता एवं धन का लाभ
धनु राशिः- व्यय की वृद्धि, आकास्मिक हानि
मकर राशिः- शारीरिक एवं मानसिक कष्ट
कुंभ राशिः- धनहानि एवं कार्यों में अवरोध
मीन राशिः- कार्यों में सफलता उन्नति एवं धन लाभ।

गुरुदेब bhubneshwar
9893946810

Monday, 18 June 2018

यज्ञ कितने प्रकार के होते है- श्रुति प्रतिपादित यज्ञो को श्रौतयज्ञ और स्मृति प्रतिपादित यज्ञो को स्मार्तयज्ञ कहते हैं! श्रौत यज्ञ में केवल श्रुति प्रतिपादित मंत्रो का प्रयोग होता है और स्मार्त यज्ञ में वैदिक पौराणिक और तांत्रिक मंन्त्रों का प्रयोग होता है।

यज्ञ कितने  प्रकार के होते है- श्रुति प्रतिपादित यज्ञो को श्रौतयज्ञ और स्मृति प्रतिपादित यज्ञो को स्मार्तयज्ञ कहते हैं!
श्रौत यज्ञ में केवल श्रुति प्रतिपादित मंत्रो का प्रयोग होता है और स्मार्त यज्ञ में वैदिक पौराणिक और तांत्रिक मंन्त्रों का प्रयोग होता है।

मित्रों!
वेदों में अनेक प्रकार के यज्ञों का वर्णन मिलता है। किन्तु उनमें पांच यज्ञ ही प्रधान माने गये हैं - 1. अग्नि होत्रम्, 2. दर्शपौर्णमास, 3. चातुर्मास्य, 4. पशुयाग, 5. सोमयज्ञ, ये पाॅंच प्रकार के यज्ञ कहे गये हैं, ये सभी  श्रुति प्रतिपादित हैं! वेदों में श्रौत यज्ञों की अत्यन्त महिमा वर्णित है। श्रौत यज्ञों को श्रेष्ठतम कर्म कहा है!

कुल श्रौत यज्ञों को १९ प्रकार से विभक्त कर उनका संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा है
1. स्मार्तयज्ञः-
विवाह के अनन्तर विधिपूर्वक अग्नि का स्थापन करके जिस अग्नि में प्रातः सायं नित्य हवनादि कृत्य किये जाते हैं, उसे स्मार्ताग्नि कहते हैं! गृहस्थ को स्मार्ताग्नि में ही पका भोजन प्रतिदिन करना चाहिये।

2. श्रौताधान यज्ञः-
विधिपूर्वक दक्षिणाग्नि स्थापना को श्रौताधान कहते हैं! इसमें पितृ संबंधी कार्य होते हैं!

3. दर्शपौर्णमास यज्ञः-
अमावस्या और पूर्णिमा को होने वाले यज्ञ को दर्श और पौर्णमास कहते हैं! इस यज्ञ का अधिकार सपत्नीक होता है। इस यज्ञ का अनुष्ठान आजीवन करना चाहिए यदि कोई जीवन भर करने में असमर्थ है तो 30 वर्ष तक तो करना चाहिए।

4. चातुर्मास्य यज्ञः-
चार-चार महीने पर किये जाने वाले यज्ञ को चातुर्मास्य यज्ञ कहते हैं!

5. पशु यज्ञः-
प्रति वर्ष वर्षा ऋतु में या दक्षिणायन या उतरायण में संक्रान्ति के दिन एक बार जो पशु-याग किया जाता है, उसे निरूढ पशु-याग कहते हैं!

6. आग्रहायणेष्टि (नवान्न यज्ञ) :-
प्रति वर्ष वसन्त और शरद ऋतुओं में नवीन अन्न ( गेहूँ व चावल) से जो यज्ञ किया जाता है, उसे नवान्न कहते हैं!

7. श्रौतामणी-यज्ञ (पशुयज्ञ) :-
इन्द्र के निमित्त जो यज्ञ किया जाता है उसे श्रौतामणी यज्ञ कहते हैं!  यह इन्द्र संबन्धी पशु-यज्ञ है ! यह यज्ञ दो प्रकार का है। एक वह जो पांच दिन में पूरा होता है।
इस  श्रौतामणी यज्ञ में गोदुग्ध के साथ सुरा (मद्य) का भी प्रयोग है। किन्तु कलियुग में वर्ज्य है।
दूसरा पशुयाग कहा जाता है। क्योकि इसमें पांच अथवा तीन पशुओं की बली दी जाती है।

8. सोम यज्ञः-
सोमलता द्वारा जो यज्ञ किया जाता है उसे सोम यज्ञ कहते हैं! यह वसन्त में होता है ! यह यज्ञ एक ही दिन में पूर्ण होता है।????
इस यज्ञ में 16 ऋत्विक ब्राह्मण होते हैं।

9. वाजपेय-यज्ञः-
इस यज्ञ के आदि और अन्त में बृहस्पति नामक सोम याग अथवा अग्निष्टोम यज्ञ होता है ! यह यज्ञ शरद रितु में होता है।

10. राजसूय यज्ञः-
राजसूय याग करने के बाद क्षत्रिय राजा  चक्रवर्ती उपाधि को धारण करता है।

11. अश्वमेघ यज्ञ:-
इस यज्ञ में दिग्विजय के लिए (घोडा) छोडा जाता है। यह यज्ञ दो वर्ष से भी अधिक समय में समाप्त होता है। इस यज्ञ का अधिकार सार्वभौम चक्रवर्ती राजा को ही होता है।

12. पुरुषमेध-यज्ञ:-
इस यज्ञ की समाप्ति चालीस दिनों में होती है। इस यज्ञ को करने के बाद यज्ञकर्ता गृह त्यागपूर्वक वान प्रस्थाश्रम में प्रवेश कर सकता है।

13. सर्वमेध यज्ञ:-
इस यज्ञ में सभी प्रकार के अन्नों और वनस्पतियों का हवन होता है। यह यज्ञ चौंतीस दिनों में समाप्त होता है।

14. एकाह यज्ञ:-
एक दिन में होने वाले यज्ञ को एकाह यज्ञ कहते हैं। इस यज्ञ में एक यजमान और सौलह विद्वान होते हैं!

स्मार्त यज्ञें---
15. रुद्र यज्ञ:-
यह तीन प्रकार का होता हैं रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र!

रुद्र यज्ञ 5-7-9 दिन में होता है!
महारुद्र 9-11 दिन में होता हैं।
अतिरुद्र 9-11 दिन में होता है।

रुद्रयाग में 16 अथवा 21 विद्वान होते हैं!
महारुद्र में 31 अथवा 41 विद्वान होते हैं!
अतिरुद्र याग में 61 अथवा 71 विद्वान होते हैं!

रुद्रयाग में हवन सामग्री 11 मन, महारुद्र में 21 मन अतिरुद्र में 70 मन हवन सामग्री लगती है।

16. विष्णु यज्ञ:-
यह यज्ञ भी तीन प्रकार का होता है। विष्णुयज्ञ, महाविष्णुयज्ञ, अतिविष्णुयज्ञ!

विष्णु यज्ञ में 5-7-8 अथवा 9 दिन में होता है। महाविष्णु याग 9 दिन में औरअतिविष्णु 9 दिन में अथवा 11 दिन में होता है!
विष्णु याग में 16 महाविष्णु-याग में  41 विद्वान होते हैं। अति विष्णु याग में 61 अथवा 71 विद्वान होते है।

विष्णु याग में हवन सामग्री 11 मन ! महाविष्णु याग में 21 मन और अतिविष्णु याग में 55 मन लगती है।

17. हरिहर यज्ञ:-
हरिहर महायज्ञ में हरि (विष्णु) और हर (शिव) इन दोनों का यज्ञ होता है। हरिहर यज्ञ में 16 अथवा 21 विद्वान होते हैं!  हरिहर याग में हवन सामग्री 25 मन लगती हैं। यह महायज्ञ 9 दिन अथवा 11 दिन में होता है।

18. शिव शक्ति महायज्ञ:-
शिवशक्ति महायज्ञ में शिव और शक्ति (दुर्गा) इन दोनों का यज्ञ होता है। शिव यज्ञ प्रातः काल और शक्ति (दुर्गा) इन दोनों का यज्ञ होता है। शिव यज्ञ प्रातः काल और मध्याह्न में होता है। इस यज्ञ में हवन सामग्री 15 मन लगती है, तथा 21 विद्वान होते हैं! यह महायज्ञ 9 दिन अथवा 11 दिन में सुसम्पन्न होता है।

19. राम यज्ञ:-
राम यज्ञ विष्णु यज्ञ की तरह होता है। रामजी की आहुति होती है। रामयज्ञ में 16 अथवा 21 विद्वान होते हैं ! हवन सामग्री 15 मन लगती है। यह यज्ञ 8 दिन में होता है।

20. गणेश यज्ञ:-
गणेश यज्ञ में एक लाख (100000) आहुति होती है। 16 अथवा 21 विद्वान होते है। गणेशयज्ञ में हवन सामग्री 21 मन लगती है। यह यज्ञ 8 दिन में होता है।

21. ब्रह्म यज्ञ (प्रजापति यज्ञ):-
प्रजापत्ति याग में एक लाख (100000) आहुति होती हैं इसमें 16 अथवा 21 विद्वान होते है। प्रजापति यज्ञ में 12 मन सामग्री लगती है। 8 दिन में होता है।

22. सूर्य यज्ञ:-
सूर्य यज्ञ में एक करोड़ 10000000 आहुति होती है। 16 अथवा 21 विद्वान होते है। सूर्य यज्ञ  21 दिन में किया जाता है। इस यज्वैदिक धर्म मे यज्ञ को वेद का प्राण ओर आत्मा कहा गया है।।
यज्ञ क्या है ।
आज के इस वैज्ञानिक युग् में पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकृष्ट जनमानस कहता है यज्ञ क्या है ।

हमारे ग्रंथ इनके प्रमाणों से भरे हुए है ।

यज्ञो वै श्रेष्ठतरं कर्म।
शत,ब्रा,1,7,1,5 ।

यज्ञो वै विष्णु:
तैत्तरीय 1,7,4 ।

प्रजापतिर्वै यज्ञ:
गोपथ ब्रा.2,18 ।

इन्द्रो वै यज्ञ: ।

अथर्व वेद के अनुसार
अयं यज्ञो भुवनस्य नाभिः ।
संसार का उतपत्ति स्थान यही यज्ञ है ।

क्योकि यज्ञ को ईश्वर और धर्म का साक्षात प्रतीक कहा गया है ।

यज्ञ ओर महायज्ञ ये दो भेद प्रधान है ।

जो स्वयं के लिये तथा पारलौकिक कल्याण के लिये किया जाता है उसे यज्ञ संज्ञा ।

जो सर्वकल्याण विश्वकल्याणार्थ किया जाए वह महायज्ञ संज्ञक ।

श्रौत -
श्रुति प्रतिपादित यज्ञो को श्रोत यज्ञ
इसमे श्रुति प्रतिपादित मन्त्रो का ही मात्र उपयोग होता है ।

स्मृति
स्मृति प्रतिपादित यज्ञो को स्मार्त यज्ञ कहा जाता है ।
इसमे वैदिक पौराणिक एवं तांत्रिक मन्त्रो का ही प्रयोग होता है ।

ब्रह्म यज्ञ ,पितृयज्ञ,देवयज्ञ,भूतयज्ञ,मनुष्य यज्ञ,इनको पंच महायज्ञ की संज्ञा से विभूषित किया गया है ।

पंच सुनाजन्य ,दोषों की निवृत्ति के लिये प्रत्येक गृहस्थ आश्रमी को इन पञ्च महा यज्ञो  को नित्य करना  चाहिये ।

समस्त सनातनी हिन्दुओ का प्रमुख ग्रंथ वेद ही है उपरांत अन्य ग्रथ ।

वेदों में ही कर्मकांड
ज्ञानकाण्ड एवं उपासना कांड का विस्तृत विवरण है,क्योकि इस पवित्र भारत भूमि में आज से नही अनादिकाल से इस कृत्य को प्रधानता से किया जा रहा है ।

नायं लोकोस्त्ययज्ञस्य कुतोन्य:कुरु सत्तमः।
भा.गीता--4,30 ।

यज्ञ न करने वाले को यह मृत्यु लोक भी प्राप्त नही हो सकता फिर अन्य सुंदर लोक तो बात ही क्या ।

सनातन धर्म मे यज्ञो का बड़ा महत्व माना गया है ।
जैसे इस पर न्याय दर्शन,4,1,62 ।
मनुस्मृति1.23 ।
सिद्धांत शिरोमणि
गणिताध्याय मध्यमाधिकारस्य कालमानाध्याय (9पद्य) ।

गोपथ ब्राह्मण1-4-24 ।
गीता4-32 ।
आदि में यज्ञ के महत्व का विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है ।
क्योकि यज्ञ से ही देवताओ ने स्वर्ग प्राप्त कर ,असुरों को परास्त कर अमरत्व पाया था ।

यज्ञ की सिद्धि से शत्रु भी मित्रवत हो जाते है ।

यज्ञ से सभी कष्टों का वज्रनाश होता है ।
तथा स्वर्ग की प्राप्ति भी होतिं है । 

यज्ञ से ही वृष्टि होकर मनुष्य का पालन पोषण होता है।
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विधिवत यज्ञ न होना ही जलस्तर का कम होना है । (अपूर्ण-अयोग्य विधि)

यज्ञा:कल्याण हेतवः-6-1-8 विष्णु पु. ।

यज्ञा:पृथ्वीम् धारयन्ति.अर्थववेद- ।

यज्ञो विश्वस्व भुवनस्य नाभिः -अथर्ववेद-9-10-14 ।

यज्ञइश्च देवानाप्नोति. मत्स्यपुराण-143-33 ।

यज्ञ के बहुत से प्रयोजन हुआ करते है।
उनमे स्वर्ग की प्राप्ति भी एक परलौकिक प्रयोजन है ।

यैरीजाना:स्वर्गं यान्ति लोकम्।।
18-4-2अथर्ववेद । 

देवान् देवयजो यज्ञी -गीता 7-23 ।

देवताओ का निवास होता है स्वर्ग में।
दिवि देवा:,अथर्व--11-7-23 ।

यज्ञ का प्रयोजन मात्र स्वर्ग प्राप्ति नही होती अपितु विविध कामनाओं की प्राप्ति भी हुआ करती है । 

उसके भी कारण देव पूजा ही हुआ करती है।।

क्योकि देवता विविध कामनाओं को पूर्ण किया करते है ।।

ऋग्वेद--10-121-10
यत्कामास्ते जुहूयः तन्नो अस्तु।।
इस मंत्र से भी हवन द्वारा विविध कामनाओं की पूर्ति कही गयी है ।

वयं स्याम पतयो रयीणाम्।
इस उक्त मन्त्र के अंतिम अंश से यज्ञ से विभिन्न ऐश्वर्य की प्राप्ति बताई गई है ।

इस मंत्र में प्रजापति देवता का वर्णन है ।
इसलिये हवन में प्रजापतये स्वाहा कहा जाता है ।

चक्षुष्कामं या जपाञ्चकार ।
महाभाष्य1-1-63
ग्रामकामा यजेत्।
पुकामः पुत्रेष्टया यजेत्।

*अन्नहीनो दहेद्राष्ट्रं मन्त्रहीनस्तु ऋत्विजः ।*
*दीक्षीतं दक्षिणाहिनो नास्ति यज्ञसमो रिपुः ।।*
अन्नहीन (ब्राह्मण भोजन से रहित) यज्ञ से राष्ट्र का , मंत्र हीन यज्ञ से पुरोहित का , ब्राह्मण से हीन ओर दक्षिणा से हीन यज्ञ करने से यजमान का नाश होता है । अतः संपूर्ण विधि विधान से रहित यज्ञ न करे ।

गुरुदेब
भुबनेश्वर
पर्णकुटी गुना
9893946810