ज्योतिष समाधान

Tuesday, 14 February 2017

महाशिवरात्रि चारो पहर सहित मुहूर्त एबम पूजन सामग्री सहित

24 फरवरी 2017 को मनाया जाएगा।

एक नजर शिवारात्रि पूजा और मुहूर्त के समय पर

महाशिवरात्रि : 24 फरवरी 2017
निशिथ काल पूजा- 12:08 से 12:59
पारण का समय- 06:54 से 3:24 (25फरवरी)

चतुर्दशी तिथि आरंभ- 09:38 (24 फरवरी) चतुर्दशी तिथि समाप्त- 09:20 (25 फरवरी

चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं।

रात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त

निशीथ काल पूजा का मुहूर्त- रात 12.30 से 01.05 बजे तक

पहले प्रहर की पूजा- शाम 06:42 से 09:45 बजे तक

दूसरे प्रहर की पूजा- रात 09:45 से 12:50 बजे तक

तीसरे प्रहर की पूजा- रात 12:50 से 03:50 बजे तक

चौथे प्रहर की पूजा- रात 03:50 से सुबह 06:50 बजे तक
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
                     रेलवे टाइम

Nishita Kaal Puja
Time= 24:08+ to 24:58+
Duration = 
0 Hours 50 Mins On 25th,

Maha Shivaratri Parana
Time06:50 to 15:25

Ratri First Prahar Puja 
Time = 18:16 to 21:25

Ratri Second Prahar Puja 
Time = 21:25 to 24:33+

Ratri Third Prahar Puja
Time = 24:33+ to 27:42+

Ratri Fourth Prahar Puja 
Time = 27:42+ to 30:50+

How to read 24+ time?

Chaturdashi Tithi Begins
= 21:38 on 24/Feb/2017 Chaturdashi Tithi Ends
= 21:20 on 25/Feb/2017

(पूजन समग्री कम और ज्यादा कर सकते है )

============================
1】हल्दीः--------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------100 ग्राम
३】अगरबत्ती------------------- 3पैकिट
४】कपूर------------------------- 50 ग्राम
५】केसर------------------------- 1डिव्वि
६】चंदन पेस्ट ------------------ 50 ग्राम
७】यज्ञोपवीत ----------------- 11नग्
८】चावल------------------------ 05 किलो
९】अबीर-------------------------50 ग्राम
१०】गुलाल, -----------------10 0ग्राम
११】अभ्रक-------------------
१२】सिंदूर --------------------100 ग्राम
१३】रोली, --------------------100ग्राम
१४】सुपारी, ( बड़ी)-------- 200 ग्राम
१५】नारियल ----------------- 11 नग्
१६】सरसो----------------------50 ग्राम
१७】पंच मेवा------------------100 ग्राम
१८】शहद (मधु)--------------- 50 ग्राम
१९】शकर-----------------------0 1किलो
२०】घृत (शुद्ध घी)------------ 01किलो
२१】इलायची (छोटी)-----------10ग्राम
२२】लौंग मौली-------------------10ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~अगर मंडल रचना करना हो तो लाना है

२४रंगलाल----------------------10ग्राम
२५】रंग काला--------------------10ग्राम
२६    रंगहरा-----------------------10ग्राम
२७】रंगपिला---------------------10ग्राम
२८】चंदन मूठा--------------------1 नग्
२९】धुप बत्ती ---------------------2 पैकिट =============================
अगर मिटटी का  शिवलिंग बनाना हो तो

३०】सप्तमृत्तिका

1हाथीकेस्थानकीमिट्टि-----------50ग्राम
२】घोड़ा बांदने के स्थानकीमिटटी--50ग्राम
३बॉबीकीमिटटी--------------------50ग्राम
४दीमककीमिटटी------------------50ग्राम
५नदीसंगमकीमिटटी-------------50ग्राम
६तालाबकीमिटटी------------------50ग्राम
७गौशालाकीमिटटी-----------------50ग्राम राजद्वारकीमिटटी------------------50ग्राम ============================ ३१】पंचगव्य
१】 गाय का गोबर -----------------50 ग्राम
२】गौ मूत्र-----------------------------50ग्राम
३】गौ घृत------------------------------50ग्राम
4】गाय दूध----------------------------50ग्राम
५】गाय का दही ---------------------50ग्राम ============================= ============================= ३३】कुशा
३४】दूर्वा
35】पुष्प कई प्रकार के
३६】गंगाजल
३७】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो 38】पंच पल्लव
१】बड़,
२】 गूलर,
३】पीपल,
४】आम
५】पाकर के पत्ते) ============================= ३९】बिल्वपत्र
४०】शमीपत्र
४१】सर्वऔषधि
४२】अर्पित करने हेतु पुरुष बस्त्र
४३】मता जी को अर्पित करने हेतु सौ भाग्यवस्त्र
44】जल कलश तांबे का मिट्टी का)

~~~~~~~~~~~~~~~~|~~~~~~~
    मण्डल रचना करना हो तो सरे बस्त्र लाना है नही तो केवल पिला या लाल लाना है
४५】 बस्त्र
१】सफेद कपड़ा दोमीटर)
२】लाल कपड़ा (2मीटर)
३】काला कपड़ा 2मीटर)
४】हरा कपड़ा 2मीटर)
5)पीला कपड़ा 2 मीटर
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
४६】पंच रत्न (सामर्थ्य अनुसार)
४७】दीपक
४८】तुलसी दल
४८】केले के पत्ते (यदि उपलब्ध हों तो खंभे सहित)
49】बन्दनवार
50】पान के पत्ते ------------11 नग
51】रुई

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
              अभिषेक सामग्री
1)गाय का दूध से स्नान
2)गाय का दही स्नान
3)गाय का घी स्नान
4)शहद स्नान
5)शकर स्नान
6)पंचामृत स्नान
7)फलो का रस स्नान
8)फूलो का रस (इत्र) स्नान
9)विजया (भांग) स्नान
10अष्टगंध या चन्दन घिसा हुआ  स्नान
11)यज्ञ भस्म  स्नान एबम त्रिपुण्ड के लिए
12)गंगा जल् स्नान

अभिषेक के लिए जल दूध गन्ने का रस  जिस कामना के लिए करना है उसकी व्यबस्था करे
============================ ×××××××××××××××××××××××××××××× संपर्क -किसी भी प्रकार की पूजा जैसे - सतचण्डीपाठ ,नवरात्रिपाठ ,महामृत्यंजय , वास्तु पूजन, ग्रह प्रवेश ,श्री मदभागवत कथा, श्री राम कथा , करवाने हेतु एबम ज्योतिष द्वारा समाधान,आदि की जानकारी के लिए ×××××××××××××××××××××××××××××× संपर्क सूत्र पंडित -परमेश्वर दयाल शास्त्री (मधुसुदनगड़) 09893397835 ============================= पंडित-भुबनेश्वर दयाल शास्त्री (पर्णकुटी गुना) 09893946810 ============================ पंडित -घनश्याम शास्त्री(मधुसुदंगड़) 09893983084 ============================= विशेष संपर्क कस्तूरवा नगर पर्णकुटी आश्रम गुना ऐ -बी रोड दा होटल सारा के सामने 09893946810 =============================

महाशिवरात्रि पर मनोकामना पूर्ति के सरल उपाय


2017 ki puja vidhi रात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त

निशीथ काल पूजा का मुहूर्त- रात 12.30 से 01.05 बजे तक
पहले प्रहर की पूजा- शाम 06:42 से 09:45 बजे तक
दूसरे प्रहर की पूजा- रात 09:45 से 12:50 बजे तक
तीसरे प्रहर की पूजा- रात 12:50 से 03:50 बजे तक
चौथे प्रहर की पूजा- रात 03:50 से सुबह 06:50 बजे तक

इस प्रकार शिव की पूजा में प्रमुख है भावना।
भगवान शिव भावना के अनुरूप फल देते हैं और उनकी पूजन विधि भी बहुत आसान है, क्योंकि वे त्रुटियों को क्षमा भी कर देेते हैं। जानिए, भगवान शिव की पूजा से जुड़े ऐसे ही कुछ सरल उपाय, जो आपके जीवन की विघ्न-बाधाओं को दूर कर देंगे।

1- अगर आप जीवन में अनेक बाधाओं से परेशान हैं, बार-बार काम बिगड़ रहा है तो आज भगवान शिव का अभिषेक सरसों के तेल से कीजिए। इससे आपके बिगड़े हुए काम बनने लगेंगे।

2- जिन दंपत्ति के संतान नहीं है या जिनकी संतान अधिक दिनों तक जीवित नहीं रहती या जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो जाती है तो वे शिवरात्रि पर भोलेनाथ को गाय का घी चढ़ाएं और शुद्ध मन से प्रार्थना करें।

शिव आपके मन की मुराद जरूर पूरी करेंगे।

3- अगर आप आर्थिक समस्याओं से पीडि़त हैं, धन का व्यय अधिक हो रहा है या बीमारियों के उपचार में बहुत धन लग रहा है तो शिवरात्रि पर भगवान शिव को गन्ने का रस चढ़ाएं और पूजन कीजिए। पूजन के बाद प्रसाद के रूप में फल वितरित करें।

4- जो लोग व्यापार करते हैं या राजनीति, समाज सेवा, लेखन, भाषण जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं (जो सीधे जनता से संबंधित हैं), वे शिवलिंग पर जलधारा चढ़ाएं। जलधारा भगवान शिव को विशेष प्रिय है। यह व्यक्ति के जीवन में यश लाती है।

5- चिकित्सा, औषधि आदि क्षेत्रों से संबंधित लोग भगवान शिव को गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं। भगवान शिव जीवन और मोक्ष, दोनों के दाता हैं। चिकित्सक पर अगर शिव की कृपा हो तो उसके मरीज शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करते हैं। संभव हो तो इस दिन 11 या 16 लोगों को दूध का दान करें।

6- सैनिक, पुलिस, रक्षा और न्याय क्षेत्र से जुड़े लोग भगवान शिव को धतूरा और आक चढ़ाएं। शिव का एक हाथ सज्जनों को वरदान देता है तो दूसरा त्रिशूल के माध्यम से दुष्टों को दंड भी देता है। शिव न्याय और शक्ति के भी प्रतीक हैं। आक-धतूरा उन्हें विशेष प्रिय हैं।

7- अगर किसी के वैवाहिक जीवन में बाधा आ रही है या शादी का रिश्ता टूट जाता है तो वह भगवान शिव को शहद चढ़ाए। इससे व्यक्ति के जीवन की समस्याओं का निस्तारण होकर शहद की तरह मधुरता आती है।

8- अगर आप शिव की पूजन विधि से ज्यादा परिचित नहीं हैं तो भी शिव आप पर कृपा करेंगे। आप शिव को पवित्र जल और दही अर्पित कर भी शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पूजन के बाद प्रभु से क्षमायाचना करें।
पंडित
Bhubneshwar
Kasturwa nagar parnkuti guna
Mo.9893946810

सौ समस्याओ का एक समाधान केवल शमी बृक्ष लगाये घर में

1. शमी के वृक्ष का महत्व हिंदू सभ्यता में मान्यता है कि कुछ पेड़-पौधों को घर में लगाने या उनकी उपासना करने से घर में खुशहाली रहती है या घर में सदैव लक्ष्मी का वास रहता है।

पीपल, केला और शमी का वृक्ष आदि ऐसे पेड़ हैं जो घर में समृद्धि प्रदान करते हैं।

इसी तरह मान्यता है कि शमी का पेड़ घर में लगाने से देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है।

2. शनि के प्रकोप से बचाएगा शमी

शमी के पेड़ की पूजा करने से घर में शनि का प्रकोप कम होता है। यूं तो शास्त्रों में शनि के प्रकोप को कम करने के लिए कई उपाय बताएं गए हैं। लेकिन इन सभी उपायों में से प्रमुख उपाय है शमी के पेड़ की पूजा। घर में शमी का पौधा लगाकर पूजा करने से आपके कामों में आने वाली रुकावट दूर होगी।

3. यज्ञ की वेदी के लिए पवित्र लकड़ी शमी वृक्ष की लकड़ी को यज्ञ की वेदी के लिए पवित्र माना जाता है।

शनिवार को करने वाले यज्ञ में शमी की लकड़ी से बनी वेदी का विशेष महत्व है। एक मान्यता के अनुसार कवि कालिदास को शमी के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

4. गजानन का प्रिय वृक्ष शमी

शमी को गणेश जी का प्रिय वृक्ष माना जाता है। इसलिए भगवान गणेश की आराधना में शमी के वृक्ष की पत्तियों को अर्पित किया जाता है। भगवान गणेश की पूजा में प्रयोग की जाने वाली इस पेड़ की पत्तियों का आयुर्वेद में भी महत्व है। आयुर्वेद की नजर में शमी अत्यंत गुणकारी औषधि है। कई रोगों में इस वृक्ष के अंग काम लिए जाते हैं।

5. शमी के वृक्ष के दर्शन शुभ

उत्तर भारत के बिहार और झारखंड में सुबह के समय उठने के बाद शमी के वृक्ष के दर्शन को शुभ माना जाता है।

बिहार और झारखंड में यह वृक्ष अधिकतर घरों के दरवाजे के बाहर लगा हुआ मिलता है। लोग किसी भी काम पर जाने से पहले इसके दर्शन करते और इसे माथे से लगाते हैं, ऐसे करने से उन्हें उस काम में कामयाबी मिलती है।

6. कई दोषों का निवारण करता है शमी

शमी के वृक्ष पर कई देवताओं का वास होता है। सभी यज्ञों में शमी वृक्ष का उपयोग शुभ माना गया है। शमी के कांटों का प्रयोग तंत्र-मंत्र बाधा और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए होता है। शमी के पंचाग, यानी फूल, पत्तियों, जड़, टहनियों और रस का इस्तेमाल कर शनि संबंधी दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है।

7. दशहरे में शमी का पूजन लाभकारी

दशहरे पर शमी के वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व है। नवरात्र में भी शमी के वृक्ष की पत्तियों से पूजन करने का महत्व बताया गया है। नवरात्र के नौ दिनों में प्रतिदिन शाम के समय वृक्ष का पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले शमी के वृक्ष के सम्मुख अपनी विजय के लिए प्रार्थना की थी।

8. दरवाजे की बायीं तरफ लगाएं पेड़

शमी की पूजा के साथ ही एक सवाल यह भी है कि इस पेड़ को घर में किस तरफ लगाना चाहिए। शमी के वृक्ष को घर के मुख्य दरवाजे के बांयी तरफ लगाएं।

इसके बाद नियमित रूप से सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

आपके घर और परिवार के सभी सदस्यों पर सदैव शनि की कृपा बनी रहेगी।

9. पीपल का विकल्प शमी का वृक्ष

पीपल और शमी दो ऐसे वृक्ष हैं, जिन पर शनि का प्रभाव होता है।

पीपल का वृक्ष बहुत बड़ा होता है, इसलिए इसे घर में लगाना संभव नहीं हो पाता। वास्तु शास्त्र के मुताबिक नियमित रूप से शमी की पूजा करने और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष और उसके कुप्रभावों से बचा जा सकता है।

पंडित
Bhubneshwar
Kasturwanagar parnkuti guna
Mo.  9893946810

रत्न की जगह से शमी की जड़ से शनि राहु को प्रशन्न करे

में कोई ग्रह कमजोर है जिस कारण उसके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है और वह जातक हमेशा परेशान रहता है। ऐसे जातकों को रत्न पहने की सलाह दी जाती है। किन्तु बहुत से जातक आर्थिक विपन्नता के कारण रत्न धारण नहीं कर पाते है, तो उन लोगों के लिए ज्योतिष में जड़ पहनने का प्रावधान है।

जैसे रत्न पहनने से व्यक्ति की कुण्डली में कमजोर ग्रह बलवान होकर सकारात्मक उर्जा देने लगता है जिससे उसके जीवन में आने वाली बाधाओं में कमी आती है।

ठीक उसी प्रकार से ग्रह से सम्बन्धित पेड़ की जड़ को अभिमंत्रित करके पहने से कमजोर ग्रह मजबूत होकर शुभ फल देने लगता है।

आईये हम जानते है कि ग्रहो को बलवान करने के लिए कौन से पेड़ की जड़ धारण करके अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जाये।

सूर्य-

सूर्य की अशुभता को दूर करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में बेल की जड़ को खोदकर तत्पश्चात उसे सूर्य मन्त्र से अभिमन्त्रित करके लाल कपड़े में लपेट कर दाहिनी भुजा में बांधने से सूर्य अच्छा फल देने लगता है।

चन्द्र-

चन्द्र को बलवान करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में खिरनी की जड़ खोदकर तत्पश्चात उसे अभिमन्त्रित करके सफेद कपड़े में लपेटकर दिन सोमवार को लाकेट में भरकर गले में धारण करने से चन्द्र अशुभता में कमी आती है।

मंगल-

मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए अनन्तमूल या खेर की जड़ को शुद्ध करके लाल कपड़े में लपेटकर दिन मंगलवार को दाहिने भुजा में बांधने से मंगल ग्रह मजबूत होकर शुभ फल देने लगता है।

बुध-

बुध ग्रह बलवान करने के लिए किसी शुभ मुहूर्त में विधारा की जड़ खोदकर तत्पश्चात उसे शुद्ध करके हरे रंग के धागे में लपेट कर गले में धारण करने से बुध ग्रह से सम्बन्धित अच्छा फल प्राप्त होने लगता है।

गुरू-

गुरू ग्रह को मजबूत करने के लिए किसी अच्छे मुहूर्त में केले की जड़ को खोदकर तत्पश्चात उसे अभिमन्त्रित करके पीले कपड़े में बांधकर दिन गुरूवार को दाहिने भुजा में बाॅधने से गुरू ग्रह की अशुभता में कमी आती है।

शुक्र-

शुक्र ग्रह को स्ट्रांग करने के लिए गूलर की जड़ को शुद्ध करके दिन शुक्रवार किसी लाकेट में डालकर पहनने से शुक्र ग्रह बलवान होकर अच्छे फल देने लगता है।

शनि-

शनि देव को खुश करने के लिए शमी पेड़ की जड़ को किसी अच्छे मूहूर्त में शुद्ध करके नीले कपड़े में बाॅधकर धारण करने से शनि देव कृपा बरसने लगती है। राहु- राहु की अच्छी कृपा पाने के लिए सफेद चन्दन का टुकड़ा नीले धागे में बांधने से राहु की अशुभता में आती है और लाभ होने लगता है।

केतु- केतु की अशुभता दूर करने के लिए अश्वंगधा पेड़ की जड़ को किसी शुभ मुहूर्त में अभिमन्त्रित करके नीले धागे में लपेट कर गले में धारण करने से केतु का शुभ फल मिलने लगता है।

पंडित
Bhubneshwar
Kasturwanagr parnkuti guna
Mo.9893946810

Monday, 13 February 2017

महाशिवरात्रि पर अपनी मनोकामना अनुसार किस शिवलिंग का पूजन करे


2017 ki puja vidhi रात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त निशीथ काल पूजा का मुहूर्त- रात 12.30 से 01.05 बजे तक पहले प्रहर की पूजा- शाम 06:42 से 09:45 बजे तक दूसरे प्रहर की पूजा- रात 09:45 से 12:50 बजे तक तीसरे प्रहर की पूजा- रात 12:50 से 03:50 बजे तक चौथे प्रहर की पूजा- रात 03:50 से सुबह 06:50 बजे तक

श्री शिवमहापुराण सृष्टिखंड अध्याय ११ श्लोक १२से १५ में श्री शिव-पूजा से प्राप्त होने वाले सुखों का वर्णन निम्न प्रकार से है:-

दरिद्रता,
रोग सम्बन्धी कष्ट,
शत्रु द्वारा होने वाली पीड़ा

एवं चारों प्रकार का पाप तभी तक कष्ट देता है, जब तक प्रभू शिव की पूजा नहीं की जाती। महादेव का पूजन कर लेने पर सभी प्रकार का दु:ख नष्ट हो जाता है, सभी प्रकार के सुख प्राप्त हो जाते है और अन्त में मुक्ति लाभ होता है। जो मनुष्य जीवन पाकर उसके मुख्य सुख संतान को प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें सब सुखों को देने वाले महादेव की पूजा करनी चाहिए।

ब्राह्मण,
क्षत्रिय,
वैश्य,
शूद्र

विद्यिवत शिवजी का पूजन करें। इससे सभी मनोकामनाएं सिद्द्ध हो जाती है।

(प्रमाण श्री शिवमहापुराण सृष्टिखंड अध्याय ११श्लोक१२ से १५) दक्ष -प्रजापति ने अपने यग्य में 'शिव" का भाग नहीं रखा ,जिससे कुपित होकर -माँ पार्वती ने दक्ष के यग्य मंडप में योगाग्नि द्वारा अपना शारीर को भस्म कर दिया |यह वदित होने के वाद -भगवान् "शिव"अयंत क्रुद्ध हो गए एवं नग्न होकर पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे |
एक दिन वह [शिव ] नग्नावस्था में ही ब्राह्मणों की नगरी में पहुँच गए | शिवजी के नग्न स्वरूप को देखकर भूदेव की स्रियां[भार्या ] उन पर मोहित हो गईं|स्त्रिओं की मोहित अवस्था को देखकर ब्राह्मणों ने शिवजी को शाप दे दिया कि-ये लिंग विहीन तत्काल हो जाएँ एवं शिवजी शाप से युक्त भी हो गए ,जिस कारन से तीनों लोकों में घोर उत्पात होने लगा |

समस्त देव ,ऋषि ,मुनि व्याकुल होकर ब्रह्माजी की शरण में गए | ब्रह्मा ने योगबल से शिवलिंग के अलग होने का कारन जान लिया और समस्त देवताओं ,ऋषियों ,एवं मुनियों को साथ लेकर शिवजी के पास गए -ब्रह्मा ने शिवजी से प्रार्थना की कि -आप अपने लिंग को पुनः धारण करें -अन्यथा तीनों लोक नष्ट हो जायेंगें | स्तुति को सुनकर -भगवान् शिव बोले -आज से सभी लोग मेरे लिंग की पूजा प्रारंभ कर दें ,तो मैं अपने लिंग को धारण कर लूँगा |

शिवजी की बात सुनकर सर्वप्रथम ब्रह्मा ने सुवर्ण का शिवलिंग बनाकर उसका पूजन किया

| पश्चात देवताओं ,ऋषियों और मुनियों ने अनेक द्वयों के शिवलिंग बनाकर पूजन किया | तभी से शिवलिंग के पूजन का प्रारंभ हुआ ||

जो लोग किसी तीर्थ में -

मृतिका - के शिवलिंग बनाकर -उनका हजार बार अथवा लाख या करोड़ बार सविधि पूजन करते हैं-वे शिव स्वरूप हो जाते हैं ||

जो मनुष्य तीर्थ में

मिटटी
,भस्म ,
गोबर अथवा बालू का शिवलिंग बनाकर एक बार भी उसका सविधि पूजन करता है -वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है

-शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन करने से -मनुष्य -संतान ,धन ,धन्य ,विद्या ,ज्ञान ,सद्बुधी ,दीर्घायु ,और मोक्ष की प्राप्ति करता है ||

जिस स्थान पर शिवलिंग का पूजन होता है ,वह तीर्थ नहीं होते हुआ भी तीर्थ बन जाता है | जिस स्थान पर शिवलिंग का पूजन होता है ,उस स्थान पर जिस मनुष्य की मृत्यु होती है-वह शिवलोक को प्रप्त करता है |

जो शिव -शिव ,शिव नाम का उच्चारण करता है -वह परम पवित्र एवं परम श्रेष्ठ हो जाता है || भाव -जो मनुष्य शिव -शिव का स्मरण करते हुए प्राण त्याग देता है -वह अपने करोड़ों जन्म के पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त करता है || शिव =का - अर्थ है -कल्याण || "शिव "यह दो अक्षरों वाला नाम परब्रह्मस्वरूप एवं तारक है इससे भिन्न और कोई दूसरा तारक नहीं है

--"तारकं ब्रह्म परमं शिव इत्य्क्षर द्वयं | नैतस्मादपरम किंचित तारकं ब्रह्म सर्वथा ||

शिवलिंग पूजन में जलधारा से अभिषेक का विशेष महत्व है।

अभिषेक का शाब्दिक अर्थ है स्नान करना या कराना। शिवजी के अभिषेक को रुद्राभिषेक भी कहा जाता है। रुद्राभिषेक का मतलब है भगवान रुद्र (शिव) का अभिषेक करना।

शास्त्रों के अनुसार अभिषेक कई प्रकार के बताए गए हैं। रुद्रमंत्रों द्वारा शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, इसे ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। अभिषेक जलधारा से किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार समुद्र मंथन के समय दुर्लभ रत्नों के साथ ही भयंकर विष भी निकला था। इस विष की वजह से समस्त सृष्टि पर प्राणियों का जीवन संकट में आ गया था। सृष्टि को बचाने के लिए शिवजी ने इस विष का पान किया था। विष पान की वजह से शिवजी के शरीर में गर्मी का असर काफी तीव्र हो गया था।

इस गर्मी को खत्म करने के लिए ही शिवलिंग पर लगातार जलधारा से अभिषेक करने की परंपरा प्रारंभ हुई। जल से शिवजी को शीतलता प्राप्त होती है और विष की गर्मी शांत होती है। शिवलिंग पर ऐसी कई चीजें अर्पित की जाती हैं, जिनकी तासीर ठंडी होती है। ठंडी तासीर वाली चीजों से शिवजी को शीतलता प्राप्त होती है। जो भी भक्त नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करता है, उसे सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। कार्यों में भाग्य का साथ भी मिलने लगता है।

जानिए शिव लिंग के प्रकार एवं महत्त्व

(सम्पूर्ण)---

1. मिश्री(चीनी) से बने शिव लिंग कि पूजा से रोगो का नाश होकर सभी प्रकार से सुखप्रद होती हैं
2. सोंढ, मिर्च, पीपल के चूर्ण में नमक मिलाकर बने शिवलिंग कि पूजा से वशीकरण और अभिचार कर्म के लिये किया जाता हैं।
3. फूलों से बने शिव लिंग कि पूजा से भूमि-भवन कि प्राप्ति होती हैं।
4. जौं, गेहुं, चावल तीनो का एक समान भाग में मिश्रण कर आटे के बने शिवलिंग कि पूजा से परिवार में सुख समृद्धि एवं संतान का लाभ होकर रोग से रक्षा होती हैं।
5. किसी भी फल को शिवलिंग के समान रखकर उसकी पूजा करने से फलवाटिका में अधिक उत्तम फल होता हैं।
6. यज्ञ कि भस्म से बने शिव लिंग कि पूजा से अभीष्ट सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
7. यदि बाँस के अंकुर को शिवलिंग के समान काटकर पूजा करने से वंश वृद्धि होती है।
8. दही को कपडे में बांधकर निचोड़ देने के पश्चात उससे जो शिवलिंग बनता हैं उसका पूजन करने से समस्त सुख एवं धन कि प्राप्ति होती हैं। 9. गुड़ से बने शिवलिंग में अन्न चिपकाकर शिवलिंग बनाकर पूजा करने से कृषि उत्पादन में वृद्धि होती हैं।
10. आंवले से बने शिवलिंग का रुद्राभिषेक करने से मुक्ति प्राप्त होती हैं।
11. कपूर से बने शिवलिंग का पूजन करने से आध्यात्मिक उन्नती प्रदत एवं मुक्ति प्रदत होता हैं।
12. यदि दुर्वा को शिवलिंग के आकार में गूंथकर उसकी पूजा करने से अकाल-मृत्यु का भय दूर हो जाता हैं।
13. स्फटिक के शिवलिंग का पूजन करने से व्यक्ति कि सभी अभीष्ट कामनाओं को पूर्ण करने में समर्थ हैं।
14. मोती के बने शिवलिंग का पूजन स्त्री के सौभाग्य में वृद्धि करता हैं।
15. स्वर्ण निर्मित शिवलिंग का पूजन करने से समस्त सुख-समृद्धि कि वृद्धि होती हैं।
16. चांदी के बने शिवलिंग का पूजन करने से धन-धान्य बढ़ाता हैं।
17. पीपल कि लकडी से बना शिवलिंग दरिद्रता का निवारण करता हैं।
18. लहसुनिया से बना शिवलिंग शत्रुओं का नाश कर विजय प्रदत होता हैं।
19. बिबर के मिट्टी के बने शिवलिंग का पूजन विषैले प्राणियों से रक्षा करता है।
20. पारद शिवलिंग का अभिषेक सर्वोत्कृष्ट माना गया है।घर में पारद शिवलिंग सौभाग्य, शान्ति, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए अत्यधिक सौभाग्यशाली है। दुकान, ऑफिस व फैक्टरी में व्यापारी को बढाऩे के लिए पारद शिवलिंग का पूजन एक अचूक उपाय है। शिवलिंग के मात्र दर्शन ही सौभाग्यशाली होता है। इसके लिए किसी प्राणप्रतिष्ठा की आवश्कता नहीं हैं। पर इसके ज्यादा लाभ उठाने के लिए पूजन विधिक्त की जानी चाहिए

Pandit ~bhubneshwar
Kasturwanagar parnkuti guna
9893946810