ज्योतिष समाधान

Thursday, 13 July 2023

सत्यनारायण पूजा सामग्री पर्णकुटी गुना 9893946810

1】हल्दीः--------------------------50 ग्राम
२】कलावा(आंटी)-------------2 गोले
३】अगरबत्ती-------------------     1पैकिट
४】कपूर-------------------------   50 ग्राम
5)
6)
७】यज्ञोपवीत -----------------   05नग्
८】चावल------------------------ 01किलो
९】अबीर-------------------------10ग्राम
१०】गुलाल, -----------------50ग्राम
11)
१२】सिंदूर --------------------50 ग्राम
१३】रोली, --------------------20 ग्राम
१४】गोल सुपारी, ( बड़ी)--------  50 ग्राम
१५】नारियल -----------------  3 नग्
१६】
१७】पंच मेवा------------------200 ग्राम
१८】शहद (मधु)--------------- 50 ग्राम
१९】शकर-----------------------100ग्रांम
२०】घृत (शुद्ध घी)------------  100 ग्रराम
२१】इलायची (छोटी)-----------05ग्राम
२२】लौंग -----------------05ग्राम
२३】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२4】धुप बत्ती ---------------------1पैकिट
=============
25】दूर्वा
26】पुष्प 
27】हार मोगरा के फूल के  5
28】ऋतुफल पांच प्रकार के -----1 किलो
29)पान के पत्ते ,10
29)तिली 100 ग्राम
30) जौ 20 ग्राम
31)हवन सामग्री पेकिट (सुर्जन) का 200 ग्राम
32)
33)
34)हवन के लिये समिधा 01किलो
35) 

1)सफेद कपड़ा (1मीटर)
२】लाल कपड़ा (1मीटर)

घर से उप्लब्ध करने का सामान
1)आसन बैठने के लिये
2)चौकी2×2
3)थाली 2 पूजा के लिये 
4)कटोरी 11 
5)हाथ पोछ्ने के लिये टाविल 
6)दूध
7)दही
8)माचिस
10)रुई
11)आटा  चोक पूरने  के लिये 100 ग्राम
12)प्रशाद पंजीरी   (कसार आटे)
13)हलुआ 
14)पूडी
15)पूजा के लिये फुटकर पैसे
16) केले के पत्ते
17)आम के गुच्छे- 5 
18)
19)गंगा जल
20)तुलसी दल 

Saturday, 8 July 2023

अखंड रामायण पूजन सामग्री

1)। हल्दीः----50 ग्रा
२】(आंटी)--2 गोले 
३)चंदन       1 पैकिट

४】कपूर---   100ग्राम
5】यज्ञोपवीत - 5 नग
6】चावल      o5किलो
7】अबीर----50 ग्राम
8】गुलाल- 50 ग्राम,
9】अभ्रक-----50 ग्राम
१0】सिंदूर ----20 ग्राम
११】रोली, ----20ग्राम
१२】सुपारी, ( बड़ी)- 200ग्राम
१३】नारियल ---5 नग्
१४】पंच मेवा---,100 ग्राम 
१५】शहद  50ग्राम
१६】शकर----1 किलो
17】 (शुद्ध घी) 1 किलो
18】इलायची 10ग्राम
19】लौंग मौल 10ग्राम
२0】इत्र शीशी -1 नग्
२1】धुप बत्ती 1 पैकिट 
(22)नवग्रह समिधा -1पेकिट

(२3) तिली ------1 किलो
(24)चावल_200 ग्राम साबुत वाले 
(25) जो ---200 ग्राम
(26)हवन सामग्री पेकिट 1 किलो
(27) समिधा हवन के लिए  10 किलो
(28)कपड़ा लाल  -------1 मीटर
(29)कपड़ा सफेद ----- 1 मीटर
30)
31)

तत्काल लेने वाले रामायण पूजा सामग्री लिस्ट

  • मिष्ठान 500 ग्राम
  • गुलाब/गेंदा का खुला हुआ फूल 500 ग्राम 
  • तुलसी की पत्ती 5 पीस
  • दूध 200 ग्राम
  • दही 100 ग्राम
  • पान के पत्ते (समूचे)5 पीस
  • फूल, हार (गुलाब) की 2 माला
  • फूल, हार (गेंदे) की 2 माला
  • केले के पत्ते 5 पीस
  • आम के पत्ते  
  • ऋतु फल 5 प्रकार के 1 किलो 
  • दूब घास 50 ग्राम

घर से लेने वाले रामायण पूजन सामग्री लिस्ट

  • आटा 100 ग्राम
  • थाली 2 पीस
  • लोटे 2 पीस
  • कटोरी 4 पीस
  • चम्मच 2 पीस
  • परात 2 पीस
  • कैंची /चाकू 1 पीस 
  • अखंड दीपक (ढक्कन समेत) 1 पीस
  • जल (पूजन हेतु), गाय का गोबर, 
  • रूई
  • माचिस 
  • Gurudev bhubneshwar
  • Parnkuti 
  • Guna 

Thursday, 6 July 2023

सत्यनारायण व्रत कथा पूजन सामग्री

हल्दीः-------------------------50 ग्रा
२】कलावा(आंटी)-------------2 गोले 

३】अगरबत्ती---------------     1 पैकिट
४】कपूर---------------------   20ग्राम
5】यज्ञोपवीत -----------------   5 नग
6】चावल------------------- 1 किलो
7】अबीर----------------------50 ग्राम
8】गुलाल- 50 ग्राम,{पांच प्रकार की 
9】अभ्रक--------------50 ग्राम
१0】सिंदूर --------------------20 ग्राम
११】रोली, --------------------20ग्राम
१२】सुपारी, ( बड़ी)--------  50ग्राम
१३】नारियल ----------------- 3 नग्
१४】पंच मेवा---,100 ग्राम 
१५】शहद (मधु)--------------- 50ग्राम
१६】शकर-----------------------100 ग्राम
17】घृत (शुद्ध घी)------------  100ग्राम
18】इलायची (छोटी)-----------10ग्राम
19】लौंग मौली-------------------10ग्राम
२0】इत्र की शीशी----------------1 नग्
२1】धुप बत्ती ------------------1 पैकिट 
(22)नवग्रह समिधा -----1पेकिट

(२3) तिली ------100 ग्राम
(24)चावल_-----500साबुत वाले 
(25) जो -------20 ग्राम
(26)हवन सामग्री पेकिट ------1 00ग्राम
(27) समिधा हवन के लिए  01 किलो
(28)कपड़ा लाल  -------1 मीटर
(29)कपड़ा सफेद ----- 1 मीटर

तत्काल लेने वाले रामायण पूजा सामग्री लिस्ट

  • मिष्ठान 500 ग्राम
  • गुलाब/गेंदा का खुला हुआ फूल 500 ग्राम 
  • तुलसी की पत्ती 5 पीस
  • दूध 1 लीटर
  • दही 100 ग्राम
  • पान के पत्ते (समूचे)5 पीस
  • फूल, हार (गुलाब) की 2 माला
  • फूल, हार (गेंदे) की 2 माला
  • केले के पत्ते 5 पीस
  • आम के पत्ते  
  • ऋतु फल 5 प्रकार के 1 किलो 
  • दूब घास 50 ग्राम

घर से लेने वाले रामायण पूजन सामग्री लिस्ट

  • आटा 100 ग्राम
  • चीनी 500 ग्राम
  • थाली 2 पीस
  • लोटे 2 पीस
  • कटोरी 4 पीस
  • चम्मच 2 पीस
  • परात 2 पीस
  • कैंची /चाकू (लड़ी काटने हेतु ) 1 पीस 
  • अखंड दीपक (ढक्कन समेत) 1 पीस
  • जल (पूजन हेतु), गाय का गोबर, मिट्टी बिछाने का आसन

मकर सक्रांति कब है 14 या 15 जनवरी को

मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोग बहुत कन्फ्यूज है. कोई 14 जनवरी की मकर संक्रांति बता रहा है तो कोई 15 जनवरी को. इस बारे में ज्योतिषाचार्य गुरुदेव श्रीभुवनेश्वरजी पर्णकुटी आश्रम गुना वालो ने जानकारी दी है कि मकर संक्रांति का पर्व किस दिन मनाया जाएगा.
इस साल मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोग बहुत कन्फ्यूज हैं.
कोई 14 जनवरी की मकर संक्रांति बता रहा है तो कोई 15 जनवरी को

ज्योतिषविद गुरुदेव श्री भुवनेश्वर जी पर्णकुटी वालो के मुताबिक,
 इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2023 को मनाया जाएगा. पंचांग के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य ग्रह 14 जनवरी दिन शनिवार को धनु राशि से निकलकर मकर राशि मे  सायंकाल  - 08:57 पर प्रवेश करेंगे.

इसलिए रविवार, 15 जनवरी को सुबह उदिया तिथि में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा.
मकर संक्रांति पर पुण्यकाल  15 जनवरी को
प्रातः 5 बजकर 43 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
वहीं महा पुण्यकाल सुबह 5 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।
यह पर्व 15 जनवरी को पूरे दिन मान्य होगा.


दोपहर तक का समय स्नान, दान के लिए विशेष पुण्य फलदायक रहेगा
इस दिन नदी के तट पर स्नान के बाद सूर्य देव की पूजा करने का विधान है.
ऐसा करने से इंसान की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है.
साथ ही मकर संक्रांति के दिन सूर्य देवता दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं और इसी से देवताओं के दिन शुरू हो जाते हैं.
मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है और शादी-विवाह जैसे शुभ व मांगलिक कार्यों पर लगी रोक भी हट जाती है.

मकर संक्रांति पर राहु-शनि दोष एवं साढ़ेसाती के लिए
ज्योतिष शास्त्र में उड़द की दाल का संबंध शनि देव से माना जाता है.
शनि दोष से निवृत्ति के लिए मकर संक्रांति के दिन उड़द दाल की खिचड़ी अवश्य दान करें.
ऐसा करने से निश्चित ही शनि दोष दूर होता है.
इसके अलावा, मकर संक्रांति के दिन तिल का भी दान कर सकते हैं‌.
ऐसी मान्यता है कि तिल के दान से भी शनि दोष दूर होता है.
मकर संक्रांति के दिन कंबल का दान भी बहुत फलदायी माना गया है.
इससे राहु दोष से मुक्ति मिलती है.

सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृतसिद्धि योग व राजपद योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। चित्रा नक्षत्र, शश योग सुकर्मा योग, वाशी योग, सुनफा योग और बालव करण योग बनेगा. यह योग कई लोगों की किस्मत चमका देगा. इन योगों में शुभ कार्य, दान, पुण्य, तीर्थ यात्रा,
भागवत महापुराण करना किस्मत के बंद दरवाजे खोल देता है

मकर संक्रांति में तिल के प्रयोग का विशेष महत्व है। इस दिन तिल से उबटन, जल में तिल डालकर स्नान आदि अवश्य करना चाहिए।

इस दिन तिल - स्नान करने वाला मनुष्य सात जन्म तक रोगी नहीं होता है। इसी लिए निरोगी शरीर की कामना करने वालें मनुष्य को तिल के उबटन से सुबह अवश्य ही स्नान करना चाहिए। देवी पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन स्नान नहीं करता है। वह रोगी और निर्धन बना रहता है। तिल युक्त जल पितरों को देना,अग्नि में तिल से हवन करना, तिल खाना खिलाना एवं दान करने से अनन्त पुण्य की प्राप्ति होती है। तिल के दान से आपकी कुंडली के कई दोष दूर होते है , विशेष रूप से कालसर्प योग, शनि की साढ़ेसाती और ढय्या, राहु-केतु के दोष दूर हो जाते हैं। इस दिन तिल के लड्डुओं के साथ हरे मूंग और चावल की खिचड़ी का दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मकर संक्रांति के दिन पितरों के लिए तर्पण करने का विधान है। इस दिन भगवान सूर्य को जल देने के पश्चात अपने पितरों को भी उनका स्मरण करते हुए तिलयुक्त जल देने से पितर प्रसन्न होते है एवं जातक पर उसके पितरों का सदैव शुभाशीष बना रहता है। इसी दिन राजा भागीरथी ने अपने पूर्वजों का तर्पण कर उनकी आत्माओं को तृप्त किया था । इस दिन पितरों के निमित किये गए तर्पण से पितर बहुत प्रसन्न होते है। उनके आशीर्वाद से जीवन में कोई भी संकट नहीं रहता है, हर तरह के सुखों की प्राप्ति होती है । मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद पूर्व दिशा में मुख करके कुश के आसन पर बैठें। फिर अपने सामने चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाएं और उसके ऊपर सूर्यदेव का चित्र, प्रतिमा या सूर्य यंत्र स्थापित करें। इसके बाद सूर्यदेव का पंचोपचार पूजन करें और भगवान सूर्य देव को गुड़ का भोग लगाएँ। पूजन में लाल फूल का उपयोग अवश्य करें। इसके बाद लाल चंदन की माला से नीचे लिखे किसी भी मंत्र का कम से कम 5 माला जप अवश्य करें। मंत्र - ऊँ भास्कराय नम: ।। ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।। भगवान सूर्य कि सदैव कृपा प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जप प्रत्येक रविवार को अवश्य ही किया जाना चाहिए। ऐसा करने से यदि किसी जातक की कुंडली में सूर्य दोष है तो उसका प्रभाव भी कम होता है और शुभ फलों कि अवश्य ही प्राप्ति होती है।

विश्वनाथ अष्टक

गङ्गाधरं  शशिकिशोरधरं   त्रिलोकी -
         रक्षाधरं    निटिलचन्द्रधरं     त्रिधारम्।
भस्मावधूलनधरं       गिरिराजकन्या -
        दिव्यावलोकनधरं       वरदं     प्रपद्ये।।
काशीश्वरं       सकलभक्तजनार्तिहारं
        विश्वेश्वरं           प्रतिपालनभव्यभारम्।
रामेश्वरं       विजयदानविधानधीरं
         गौरीश्वरं      वरदहस्तधरं        नमाम:।।
( श्रीकाशीविश्वनाथमङ्गलस्तोत्रम्,१-२)
अर्थ:-
       गंगा एवं बालचन्द्र को धारण करने वाले, त्रिलोकी की रक्षा करने वाले, मस्तक पर चन्द्रमा एवं त्रिधार ( गंगा)- को धारण करने वाले, भस्भ का उद्धूलन धारण करने वाले तथा पार्वती को दिव्य दृष्टि से देखने वाले, वरदाता भगवान् शंकर की मैं शरण में हूं।
       काशी के ईश्वर, सम्पूर्ण भक्तजन की पीड़ा को दूर करने वाले, प्रणतजनों की रक्षा का भव्य भार धारण करने वाले, भगवान् राम के ईश्वर, विजय प्रदान के विधान में धीर एवं वरद मुद्रा धारण करने वाले, भगवान् गौरीश्वर को हम प्रणाम करते हैं।'
      

Friday, 30 June 2023

वर्षा और घाघ भडरी

चैते वर्षा आई और सावन सूखा जाई।
एक बूंद जो चैत में परे सहसबूंद सावन की हरै।

घाघ! कहते हैं यदि चैत के महीने में वर्षा होगी तो सावन के महीने में कम वर्षा होगी। यदि एक बूंद भी वर्षा की पड़ती है, तो वह सावन की हजार बूंदों को समाप्त कर देती है। पाठकजनों! आपको याद होगा इस बार चैत्र (मार्च-अप्रैल) के माह में प0 उत्तर प्रदेश में वर्षा हुई थी, किसानों को उस माह अपनी गेहूं की फसल में पानी नहीं देना पड़ा, जबकि उस माह में अधिकतर वर्षा नहीं होती, परिणाम हमारे सामने है, पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश में सावन का महीना लगभग सूखा गया है।

माघ के ऊमष जेठ के जाड़, पहिला वर्षा भरिगे ताल।
कहैंघाघ हम होई बियोगी, कुआ खोदि के धोईहैं धोबी।।

घाघ! कहते हैं-यदि माघ के महिने में जाड़े के बजाय गर्मी पड़े और जेठ में गर्मी के जगह जाड़ा पड़े व पहली वर्षा से तालाब भर जाये तो समझ लेना चाहिए कि इस वर्ष इतना सूखा पड़ेगा कि धोबियों को भी कपड़े धोने के लिए जल कुएं से खींचना पड़ेगा। पाठकजनों! इस बार जेठ (मई-जून) के माह में गर्मी औसत से कम थी, परिणाम हमारे सामने है पूरा पश्चिम उत्तर प्रदेश काफी हद तक सूखे की चपेट में है।

मंगल रथ आगे चलै, पीछे चले जो सूर।
मन्द वृष्टि तब जानिये, पडती सगले धूर।।

इस कहावत में घाघ! ज्योतिष के अनुसार ग्रह-गोचर देखकर, वर्षा की भविष्यवाणी कैसे करे बताते हैं, यदि ग्रह-गौचर में मंगल आगे और सूर्य पीछे हो निश्चित ही सूखा पड़ता है। पाठकजनों!! इस वर्ष में जनवरी से अप्रैल तक मंगल गौचर में सूर्य से आगे रहे हैं, परन्तु 15 अप्रैल से सूर्य, मंगल से आगे चल रहे हैं।

आगे रवि पीछे चले, मंगल जो आषाड़।
तौ बरसे अनमोल हो, पृथ्वी आनन्द बाढ़।

जिस वर्ष गौचर में सूर्य के पीछे मंगल रहते हैं उस साल वर्षा खूब होती है और पृथ्वी पर आनन्द होता है।

माघ में जो बादर लाल घिरै, सांची मानो पाथर परै।
भड्डरी! कहते हैं कि यदि माघ के महीने मे

सावन मास बहे पुरवइया।
बछवा बेच लेहु धेनु गइया।।

अर्थात् यदि सावन महीने में पुरवैया हवा बह रही हो तो अकाल पड़ने की संभावना है। किसानों को चाहिए कि वे अपने बैल बेच कर गाय खरीद लें, कुछ दही-मट्ठा तो मिलेगा।

शुक्रवार की बादरी, रही सनीचर छाय।
तो यों भाखै भड्डरी, बिन बरसे ना जाए।।

अर्थात् यदि शुक्रवार के बादल शनिवार को छाए रह जाएं, तो भड्डरी कहते हैं कि वह बादल बिना पानी बरसे नहीं जाएगा।

रोहिनी बरसै मृग तपै, कुछ कुछ अद्रा जाय।
कहै घाघ सुन घाघिनी, स्वान भात नहीं खाय।।

अर्थात् यदि रोहिणी पूरा बरस जाए, मृगशिरा में तपन रहे और आर्द्रा में साधारण वर्षा हो जाए तो धान की पैदावार इतनी अच्छी होगी कि कुत्ते भी भात खाने से ऊब जाएंगे और नहीं खाएंगे।

उत्रा उत्तर दै गयी, हस्त गयो मुख मोरि।
भली विचारी चित्तरा, परजा लेइ बहोरि।।

अर्थात् उत्तरा और हथिया नक्षत्र में यदि पानी न भी बरसे और चित्रा में पानी बरस जाए तो उपज ठीक ठाक ही होती है।

पुरुवा रोपे पूर किसान।
आधा खखड़ी आधा धान।।

अर्थात् पूर्वा नक्षत्र में धान रोपने पर आधा धान और आधा खखड़ी (कटकर-पइया) पैदा होता है।

आद्रा में जौ बोवै साठी।
दु:खै मारि निकारै लाठी।।

अर्थात् जो किसान आद्रा नक्षत्र में धान बोता है वह दु:ख को लाठी मारकर भगा देता है।

दरअसल कृषक कवि घाघ ने अपने अनुभवों से जो निष्‍कर्ष निकाले हैं, वे किसी भी मायने में आधुनिक मौसम विज्ञान की निष्‍पत्तियों से कम उपयोगी नहीं हैं।
संकलन कर्ता
Gurudev bhubneshwar
Gunaa 

महा लिंग स्तुति



अनादिमलसंसार रोगवैद्याय शंभवे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 
आदिमध्यान्तहीनाय स्वभावानालादीपतये।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 2॥
प्रलयार्नवसंस्थाय प्रलयोत्पत्तिहेतवे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 3॥
ज्वालामालावृताङगाय ज्वलनस्तंभरूपिणे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 4॥
महादेवाय महते ज्योतिषेऽनन्ततेजसे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 5॥
प्रधानपुरुषेषाय व्योमरूपाय वेधसे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 6॥
निर्विकाराय नित्याय सत्ययामलतेजसे।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 7॥
वेदांतसाररूपाय कालरूपाय धीमते।
नमश्शिवाय शान्ताय ब्राह्मणे लिंगमूर्तये॥ 8॥
इति श्रीकूर्मपुराणान्तर्गतं श्रीमहलिङ्गस्तुतिः समाप्त।