ज्योतिष समाधान

Wednesday, 14 February 2018

होरा शास्त्र को शुभ और अशुभ कर्म फल की प्राप्ति के लिये उपयोग करते हैं। लग्न और राशि के आधे भाग (१५ अंश) की होरा संज्ञा होती है. सारांश:- भदावरी ज्योतिष सूर्य की होरा राजसेवा के लिये उत्तम है। चन्द्रमा की होरा सर्व कार्य सिद्ध करने के लिये शुभ है। मंगल की होरा युद्ध, कलह, विवाद, लडाई झगडे के लिये,बुध की होरा ज्ञानार्जन के लिये शुभ है। गुरु की होरा विवाह के लिये, शुक्र की होरा विदेशवास के लिये, शनि की होरा धन और द्रव्य इकट्ठा करने के लिये शुभ है. होरा मुहूर्त एवं राहुकाल विचार होरा मुहूर्त एवं राहुकाल विचार होरा मुहूर्त अचूक माने गए हैं। इन मुहूर्तों में किया जाने वाला हर कार्य सिद्ध होता है। सात ग्रहों के सात होरा- हैं, जो दिन रात के 24 घंटों में घूमकर मनुष्य को कार्य सिद्धि के लिए अशुभ समय में भी शुभ अवसर प्रदान करते हैं। सात ग्रहों के सात होरा राज सेवा के लिए सूर्य का होरा यात्रा के लिए शुक्र का होरा ज्ञानार्जन के लिए बुध का होरा सभी कार्यों की सिद्धि के लिए चंद्र का होरा द्रव्य संग्रह के लिए शनि का होरा विवाह के लिए गुरु का होरा युद्ध, कलह और विवाद में विजय के लिए मंगल का होरा प्रत्येक होरा एक घंटे का होता है। जिस दिन जो वार होता है, उस वार के सूर्योदय के समय 1 घंटे तक उसी वार का होरा रहता है। उसके बाद एक घंटे का दूसरा होरा उस वार से छठे वार का होता है।

विद्वान लोग होरा शास्त्र को शुभ और अशुभ कर्म फल की प्राप्ति के लिये उपयोग करते हैं। लग्न और राशि के आधे भाग (१५ अंश) की होरा संज्ञा होती है.

सारांश:-

भदावरी ज्योतिष सूर्य की होरा राजसेवा के लिये उत्तम है।

चन्द्रमा की होरा सर्व कार्य सिद्ध करने के लिये शुभ है।

मंगल की होरा युद्ध, कलह, विवाद, लडाई झगडे के लिये

,बुध की होरा ज्ञानार्जन के लिये शुभ है।

गुरु की होरा विवाह के लिये,

शुक्र की होरा विदेशवास के लिये,

शनि की होरा धन और द्रव्य इकट्ठा करने के लिये शुभ है.

होरा मुहूर्त एवं राहुकाल विचार होरा मुहूर्त एवं राहुकाल विचार होरा मुहूर्त अचूक माने गए हैं।

इन मुहूर्तों में किया जाने वाला हर कार्य सिद्ध होता है।

सात ग्रहों के सात होरा- हैं, जो दिन रात के 24 घंटों में घूमकर मनुष्य को कार्य सिद्धि के लिए अशुभ समय में भी शुभ अवसर प्रदान करते हैं।

सात ग्रहों केसात होरा राज सेवा के लिएसूर्य का होरा

यात्रा के लिएशुक्र का होरा

ज्ञानार्जन के लिएबुध का होरा

सभी कार्यों की सिद्धि के लिएचंद्र का होरा

द्रव्य संग्रह के लिएशनि का होरा

विवाह के लिएगुरु का होरा

युद्ध, कलह और विवाद में विजय के लिएमंगल का होरा

प्रत्येक होरा एक घंटे का होता है। जिस दिन जो वार होता है, उस वार के सूर्योदय के समय 1 घंटे तक उसी वार का होरा रहता है

उसके बाद एक घंटे का दूसरा होरा उस वार से छठे वार का होता है।

इसी प्रकार दूसरे होरे के वार से छठे वार का होरा तीसरे घंटे तक रहता है।

इस क्रम से 24 घंटे में 24 होरा बीतने पर अगले वार के सूर्योदय के समय उसी (अगले) वार का होरा आ जाता है।

यहां प्रत्येक वार के 24 घंटों का होरा चक्र दिया गया है:

होरा चक्रम उदाहरण के लिए मान लें आज गुरुवार है और आज ही आपको कहीं जाना है।

ऊपर बताया गया है कि शुक्र का होरा यात्रा के लिए श्रेष्ठ होता है।
अतः मालूम करना है कि आज गुरुवार को शुक्र का होरा किस-किस समय रहेगा।

चक्र में गुरुवार के सामने वाले खाने में देखें तो पाएंगे कि चैथे और ग्यारहवें घंटे में शुक्र का होरा है।

बिना सारणी के होरा ज्ञात करने की विधि:-

किसी भी वार का प्रथम होरा उसी वार से प्रारंभ होता है।

उस वार से विपरीत क्रम से वारों को एक-एक के अंतर से गिनें।
जैसे बुधवार को प्रथम होरा बुध का,
तत्पश्चात विपरीत क्रम से मंगल को छोड़कर चंद्र का होरा
एवं रवि को छोड़कर शनि का होरा होगा।

इसी क्रम से आगे शेष 21 होरा उस दिन व्यतीत होंगे।

होरा शास्त्र कार्य सिद्धि का अचूक शास्त्रीय माध्यम है

किसी भी व्यक्ति को विशेष कार्य की शुरुआत करनी हो तो वो उसे विशेष मुहूर्त मे ही काम करना चाहता है.ज्योतिष शास्त्र मे होरा चक्र का निर्माण किया गया है जिसे आप स्वयं देख कर किसी भी कार्य की शुरुआत कर सकते है

जिससे आप का कार्य सफल हो जायेकभी कभी बहुत ज़रूरी होने पर हम पंडितजी के पास नही जा पाते या कोई अन्य काम पड़ जाता हैं जिससे हम समय पर काम करने का सही व उचित समय नही जान पाते, इन सभी परेशानियो को ध्यान में रखकर ज्योतिषशास्त्र में होरा चक्र का निर्माण किया गया,जिससे आप किसी भी दिन स्वयं होरा देखकर कोई भी काम कर सकते हैं |

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार एक होरा (दिन-रात)में २४ होराएँ होती हैं जिन्हें हम २४ घंटो के रूप में जानते हैं जिसके आधार पर हर एक घंटे की एक होरा होती हैं जो किसी ना किसी ग्रह की मानी जाती हैं|

प्रत्येक वार की प्रथम होरा उस ग्रह की होती हैं जिसका वो वार होता हैं

जैसे यदि रविवार हैं तो पहली होरा सूर्य की ही होगी|
होराओ का क्रम- प्रत्येक ग्रह की पृथ्वी से जो दुरी हैं उस हिसाब से ही होरा चक्र बनाया गया हैं आईये देखते हैं की होरा कैसे देखी जातीं हैं

|मान लेते हैं की हमें रविवार के दिन किसी भी ग्रह की होरा देखनी हो तो हम उसे इस प्रकार से देखेंगे|

पहली होरा -सूर्य ग्रह की होगी

दूसरी होरा -शुक्र ग्रह की होगी
तीसरी होरा -बुध ग्रह की होगी
चौथी होरा-चंद्र ग्रह की होगी
पांचवी होरा -शनि ग्रह की होगी
छठी होरा -गुरु ग्रह की होगी
सातवी होरा -मंगल ग्रह की होगी
आठवी होरा फ़िर से सूर्य की ही होगी

तथा यह क्रमश: ऐसे ही चलता रहेगा| इस प्रकार जो भी वार हो उसी वार की होरा से आगे की होरा निकाली जा सकती हैं तथा अपने महत्वपूर्ण कार्य किए जा सकते हैं| विभिन्न ग्रहों की होरा में कुछ निश्चित कार्य किए जाए तो सफलता निश्चित ही प्राप्त होती हैं |

सूर्य की होरा – सरकारी नौकरी ज्वाइन करना,चार्ज लेना और देना,अधिकारी से मिलना,टेंडर भरना व मानिक रत्न धारण करना|

चंद्र की होरा – यह होरा सभी कार्यो हेतु शुभ मानी जाती हैं|

मंगल की होरा- पुलिस व न्यायालयों से सम्बंधित कार्य व नौकरी ज्वाइन करना, जुआ सट्टा लगाना,क़र्ज़ देना, सभा समितियो में भाग लेना,मूंगा एवं लहसुनिया रत्न धारण करना| बुध की होरा– नया व्यापार शुरू करना,लेखन व प्रकाशन कार्य करना,प्रार्थना पत्र देना,विद्या शुरू करना,कोष संग्रह करना,पन्ना रत्न धारण करना |

गुरु की होरा – बड़े अधिकारियो से मिलना,शिक्षा विभाग में जाना व शिक्षक से मिलना,विवाह सम्बन्धी कार्य करना,पुखराज रत्न धारण करना |

शुक्र की होरा – नए वस्त्र पहनना,आभूषण खरीदना व धारण करना,फिल्मो से सम्बंधित कार्य करना ,मॉडलिंग करना,यात्रा करना,हीरा व ओपल रत्न पहनना|

शनि की होरा – मकान की नींव खोदना व खुदवाना,कारखाना शुरू करना,वाहन व भूमि खरीदना,नीलम व गोमेद रत्न धारण करना|

इस प्रकार ग्रह की होरा में कार्य सफलता हेतु किए जा सकते हैं | इस प्रकार विभिन्न ग्रह की होरा में विभिन्न कार्य सफलता हेतु किए जा सकते हैं।

राहुकाल विचार:-

प्रत्येक दिन दिनमान अर्थात सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के कुल समय का आठवां भाग राहुकाल कहलाता है।

इस भाग का स्वामी राहु होता है इसे बहुत अनिष्टकारी मानते हैं। इसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। निम्न सारणी में प्रत्येक वार के नीचे उसका गुणक दिया गया है, जिसके आधार पर राहुकाल का समय ज्ञात किया जा सकता है।

राहुकाल ज्ञात करने की विधि-

स्थानीय दिनमान ज्ञात करके उसके आठ समान भाग करें।
अभीष्ट वार के गुणक से अष्टमांश को गुणा करके उसे सूर्योदय में काल जोड़ दें तो राहुकाल का आरंभ मालूम होगा।
उसमें दिनमान के 1/8 भाग के समय को जोड़ने पर जो समय आएगा, उतने बजे तक राहुकाल रहेगा।
राहुकाल गुणक उदाहरणस्वरूप–
17 जून 1999को कानपुर में सूर्योदय 05 बजकर 14मिनट पर एवं सूर्यास्त 18 बजकर 48 मिनट पर हुआ।

अतः 18.48 – 5 14 बराबर 13.34 घंटे दिनमान हुआ।
इस दिनमान में 08 से भाग दिया तो लगभग 01 घंटा 42मिनट का 01 भाग हुआ। अब 17 जून को सोमवार होने में गुणक 01 है। 01 घंटा 42 मिनट में 01 का गुणा किया तो 01 घंटा 42मिनट ही आया।

फिर सूर्योदय 5.14 में 01 घंटा 42 मिनट जोड़ा तो समय आया 6 घंटा 56 मिनट। अतः 16 जून सोमवार को राहुकाल का आरंभ 6 बजकर56 मिनट पर हुआ।

इसमें 01 घंटा 42 मिनट का एक भाग जोड़ दिया तो समय आया 08 घंटा 38 मिनट। अतः 17 जून 1996 सोमवार को राहुकाल का समय प्रातः6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 38 मिनट तक रहा।

उत्तर भारत में चैघड़िया, मिथिला एवं बंगाल में यामार्ध एवं दक्षिण भारत में राहुकाल को देखकर ही शुभ कार्य करने की प्रथा है।

अतः अशुभ यामार्ध, राहुकाल में यात्रा,धन-निवेश, कार्यारंभ आदि तो वर्जित है।

इस समय लोग हवन की पूर्णहुति भी नहीं देते।

होरा कुण्डली:-

इस कुण्डली से जातक के पास धन-सम्पत्ति का आंकलन किया जाता है.
इस कुण्डली को बनाने के लिए 30 अंश को दो बराबर भागों में बाँटेंगें. 15 -15अंश के दो भाग बनते हैं.
कुण्डली को दो भागों में बाँटने पर ग्रह केवल सूर्य या चन्द्रमा की होरा में आएंगें.

कुण्डली दो भागों, सूर्य तथा चन्द्रमा की होरा में बँट जाती है.

समराशि में 0 से 15 अंश तक चन्द्रमा की होरा होगी.
15 से 30 अंश तक सूर्य की होरा होगी .

विषम राशि में यह गणना बदल जाती है. 0 से 15अंश तक सूर्य की होरा होगी. 15 से 30 अंश तक चन्द्रमा की होरा होगी.

माना मिथुन लग्न 22 अंश का है. यह विषम लग्न है.

विषम लग्न में लग्न की डिग्री 15 से अधिक है तब होरा कुण्डली में चन्द्रमा की होरा उदय होगी अर्थात होरा कुण्डली के प्रथम भाग में कर्क राशि आएगी और दूसरे भाग में सूर्य की राशि सिंह आएगी.

अब ग्रहों को भी इसी प्रकार स्थापित किया जाएगा. माना बुध 17 अंश का मकर राशि में जन्म कुण्डली में स्थित है.
मकर राशि समराशि है और बुध 17 अंश का है.

समराशि में 15 से 30अंश के मध्य ग्रह सूर्य की होरा में आते हैं तो बुध सूर्य की होरा में लिखा जाएगा.

सिंह राशि में बुध को लिख देगें.

Gurudev Bhubaneswar
Kasturba nagar
Parnkuti guna
9893946810

Monday, 12 February 2018

चोरी का पता लगता है, उस समय को नोट कर लीजिये, प्रश्न कुंडली बनायें।

जब भी चोरी का पता लगता है, उस समय को नोट कर लीजिये, प्रश्न कुंडली बनायें।
मेष या वृषभ लग्न- पूर्व दिशा
मिथुन लग्न- अग्नि कोण
कर्क लग्न- दक्षिण
सिंह लग्न- नैरित्य कोण
कन्या लग्न- उत्तर दिशा
तुला और वृश्चिक लग्न- पश्चिम दिशा
धनु लग्न- वायव्य कोण
मकर और कुम्भ लग्न- उत्तर दिशा
मीन लग्न- इशान कोण

उपरोक्त लग्नों में खोयी वस्तु, उसके दिखाए गए लग्नो के सामने की दिशा में गयी है। चोरी करने वाला कौन हो सकता है ? नीचे लिखे लग्नों के आधार पर पता लगाया जा सकता है।

मेष लग्न- ब्राह्मण या सम्मानीय भद्र पुरुष
वृषभ लग्न- क्षत्रिय
मिथुन लग्न- वेश्य
कर्क लग्न- शुद्र या सेवक वर्ग
सिंह लग्न- स्वजन या आत्मीय व्यक्ति
कन्या लग्न- कुलीन स्त्री ,घर की बहू -बेटी या बहन
तुला लग्न- पुत्र ,भाई या जमाता
वृश्चिक लग्न- इतर जाति का व्यक्ति
धनु लग्न- स्त्री
मकर लग्न- वेश्य या व्यापारी

चोरी हुई वस्तु कहां छिपाई गयी?
-लग्नेश और सप्तमेश का आपस में परिवर्तन या दोनों एक ही भाव में हो तो वस्तु घर में ही कहीं छुपी या छुपाई गयी है।

-चंद्रमा अगर लग्न में हो तो वस्तु पूर्व दिशा में होगी और अगर सप्तम में हो तो वस्तु पश्चिम में मिलेगी।

चंद्रमा अगर दशम ने हो तो दक्षिण और चतुर्थ में हो तो वस्तु उत्तर दिशा में मिलेगी। -

अगर लग्न में अग्नितत्व राशि ( मेष, सिंह, धनु ) हो तो वस्तु घर के पूर्व, अग्नि -स्थान, रसोई घर में ही मिल जाती है।

-लग्न में अगर पृथ्वी -तत्व राशि ( वृषभ, कन्या, मकर ) हो तो वस्तु दक्षिण दिशा में भूमि में दबी मिलेगी।

-अगर लग्न में वायु -तत्व राशि ( मिथुन, तुला, कुम्भ ) हो तो वस्तु पश्चिम दिशा में हवा में लटकाई गयी है। -लग्न में जल-तत्व राशि ( कर्क, वृश्चिक, कुम्भ ) हो तो वस्तु जलाशय के पास या उसके आस-पास उत्तर दिशा में मिलेगी।

महाशिवरात्रि व्रत में निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी ग्राह्य है। इस वर्ष तिथि त्रयोदशी तथा चतुर्दशी दोनो दिन निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी प्राप्त होने से दिनद्वय महाशिवरात्रि व्रत का योग है। किन्तु ऐसी स्थिति में स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, स्मृतिग्रन्थ आदि के वचनों के अनुसार जया (त्रयोदशी) युक्त तथा भद्रा युक्त निशीथ  व्यापिनी चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि व्रत करना चाहिए ।

महाशिवरात्रिव्रत निर्णय/-

महाशिवरात्रि व्रत में निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी ग्राह्य है।
इस वर्ष तिथि त्रयोदशी तथा चतुर्दशी दोनो दिन निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी प्राप्त होने से दिनद्वय महाशिवरात्रि व्रत का योग है। किन्तु ऐसी स्थिति में स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, स्मृतिग्रन्थ आदि के वचनों के अनुसार जया (त्रयोदशी) युक्त तथा भद्रा युक्त निशीथ  व्यापिनी चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि व्रत करना चाहिए ।

त्रयोदशी यदा देवी
दिनयुक्ति प्रमाणतः।।
जागरे शिवरात्रि:स्मानिशि
पूर्णा चतुर्दशी।।
जयन्ती शिवरात्रिश्च
कार्ये भद्राजयान्विते ।।(स्कन्दपुराण)

भवेद्यत्र त्र्योदश्यां
भूतव्याप्ता महानिशा।। 
शिवरात्रि व्रतं तत्र
कुर्याजागरणमं तथा।।
(स्मृति)
ि फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि होती है।
परन्तु इसके निर्णय के प्रसंग में कुछ आचार्य प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी तो कुछ निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी में महाशिवरात्रि मानते है।
परन्तु अधिक वचन निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी के पक्ष में ही प्राप्त होते है।
कुछ आचार्यों जिन्होने प्रदोष काल व्यापिनी को स्वीकार किया है वहाॅं उन्होने प्रदोष का अर्थ ‘अत्र प्रदोषो रात्रिः’ कहते हुए रात्रिकाल किया है।

ईशान संहिता में स्पष्ट वर्णित है कि ‘‘

फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्याम् आदि देवो महानिशि।
शिवलिंगतयोद्भूतः कोटिसूर्यसमप्रभः।।

तत्कालव्यापिनी ग्राहृा शिवरात्रिव्रते तिथिः।।’

फाल्गुनकृष्ण चतुर्दशी की मध्यरात्रि में आदिदेव भगवान शिव लिंग रूप में अमितप्रभा के साथ उद्- भूूूत हुए अतः अर्धरात्रि से युक्त चतुर्दशी ही शिवरात्रि व्रत में ग्राहृा है।

धर्मशास्त्रीय उक्त वचनों के अनुसार इस वर्ष

दिनांक 13/02/2018 ई. को चतुर्दशी का आरम्भ रात्रि 10ः 22 बजे हो रहा है
तथा इसकी समाप्ति अग्रिम दिन दिनांक 14/02/2017 ई. को रात्रि 12: 17 मिनट पर हो रही है।

अतः ‘एकैक व्याप्तौ तु निशीथ निर्णयः’’

शास्त्र वचनों के अनुसार 13 फरवरी 2018 मंगलवार को  ही शिवरात्रि व्रत करना उचित है l

Sunday, 11 February 2018

जानिए महाशिवरात्रि निर्णय (13 को मनायें या 14 को)

जानिए महाशिवरात्रि निर्णय (13 को मनायें या 14 को)

सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व प्रतिपादित है। भगवान शिव की आराधना का यह विशेष पर्व माना जाता है।
पौराणिक तथ्यानुसार आज ही के दिन भगवान शिव की लिंग रूप में उत्पत्ति हुई थी।
प्रमाणान्तर से इसी दिन भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह हुआ है।
अतः सनातन धर्मावलम्बियों द्वारा यह व्रत एवं उत्सव दोनों में अति हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
वैसे तो सम्पूर्ण भारतवर्ष में इसकी महिमा प्रथित है परन्तु भगवान आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिगों के क्षेत्र में तथा उनमें भी तीनों लोकों से अलग शिवलोक के रूप में प्रतिष्ठित काशी एवं यहाँ पर विराजमान भगवान विश्वेश्वर के सान्निध्य में तो भक्ति एवं उत्सव का समवेत स्वरूप देखते ही बनता है ।

वैसे तो प्रतिवर्ष शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है परन्तु इस वर्ष कुछ पंंचांगकारोंं एवं धर्माधिकारियों के द्वारा इस पर्व की तिथि को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
इस सम्बन्ध में कुछ लोग 13 फरवारी तो कुछ लोग 14 फरवरी को इसके आयोजन एवं अनुष्ठान का उपदेश कर रहे हैं।
परन्तु हमारी सनातन व्यवस्था में इसका ठीक-ठीक निर्धारण ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र के सामञ्जस्य से ही सम्भव है।
विचार विमर्शपूर्वक देखा गया कि फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि होती है।
परन्तु इसके निर्णय के प्रसंग में कुछ आचार्य प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी तो कुछ निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी में महाशिवरात्रि मानते है।
परन्तु अधिक वचन निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी के पक्ष में ही प्राप्त होते है।
कुछ आचार्यों जिन्होने प्रदोष काल व्यापिनी को स्वीकार किया है वहाॅं उन्होने प्रदोष का अर्थ ‘अत्र प्रदोषो रात्रिः’ कहते हुए रात्रिकाल किया है।

ईशान संहिता में स्पष्ट वर्णित है कि ‘‘

फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्याम् आदि देवो महानिशि।
शिवलिंगतयोद्भूतः कोटिसूर्यसमप्रभः।।

तत्कालव्यापिनी ग्राहृा शिवरात्रिव्रते तिथिः।।’

फाल्गुनकृष्ण चतुर्दशी की मध्यरात्रि में आदिदेव भगवान शिव लिंग रूप में अमितप्रभा के साथ उद्- भूूूत हुए अतः अर्धरात्रि से युक्त चतुर्दशी ही शिवरात्रि व्रत में ग्राहृा है।

धर्मशास्त्रीय उक्त वचनों के अनुसार इस वर्ष

दिनांक 13/02/2018 ई. को चतुर्दशी का आरम्भ रात्रि 10ः 22 बजे हो रहा है
तथा इसकी समाप्ति अग्रिम दिन दिनांक 14/02/2017 ई. को रात्रि 12: 17 मिनट पर हो रही है।

अतः ‘एकैक व्याप्तौ तु निशीथ निर्णयः’’

इस धर्मशास्त्रीय वचन के अनुसार चतुर्दशी 13 फरवरी को निशीथ काल एवं 14 फरवरी को प्रदोष काल में प्राप्त हो रही है ऐसे स्थिति में निशीथ के द्वारा ही इस वर्ष शिवरात्रि का निर्णय किया जाएगा।

निशीथ का अर्थ सामान्यतया लोग अर्धरात्रि कहते हुए 12 बजे रात्रि से लेते है परन्तु निशीथ काल निर्णय हेतु भी दो वचन मिलते है माधव ने कहा है कि रात्रिकालिक चार प्रहरों में द्वितीय प्रहर की अन्त्य घटी एवं तृतीय प्रहर के आदि की एक घटी को मिलाकर दो घटी निशीथ काल होते है।

मतान्तर से रात्रि कालिक पन्द्रह मुहूर्त्तो्ं में आठवां मुहूर्त निशीथ काल होता है।

अतः इस वर्ष 13 फरवरी को निशीथकाल 11: 34:30 से 12: 26: 00 तक तथा 14 फरवरी 11:35:38 से 12:27:02  तक तथा प्रमाणान्तर दोनों दिवसों में रात्रि 11 बजे से 01 बजे तक हो रहा है।

अतः ‘‘
पूरे द्युः प्रागुक्तार्धरात्रस्यैकदेशव्याप्तौ पूर्वेद्युः ’’

वचन के अनुसार 14 फरवरी को (रात्रि 11:35:38 से 12: 27: 02 बजे तक) पूर्ण निशीथ काल के पूर्व 12:17 मिनट पर चतुर्दशी समाप्त हो जाने से पूर्ण निशीथ व्यापिनी नहीं मानी जा सकती।

अत एव स्पष्ट से धर्मशास्त्रीय वचनानुसार दिनांक 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि व्रतोत्सव मनाया जाएगा।

इसी आशय से काशी के महत्वपूर्ण पंचाङगो मे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित श्रीविश्वपञ्चाग एवं शिवमूर्ति हृषीकेशपंचांगो आदि में भी दिनांक 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि लिखा गया है।

अत: दिनांक 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि  मनायी जायेगी

गुरुदेव
Bhuvnesh we
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Friday, 9 February 2018

| प्रश्न कुंडली के आधार पर विवाह सम्बंधित प्रश्न तात्कालिक कुण्डली में यदि चन्द्रमा १०,११,३,७,५ भाव में स्थित हो, तो शादी होती है

| प्रश्न कुंडली के आधार पर विवाह सम्बंधित प्रश्न तात्कालिक कुण्डली में यदि चन्द्रमा १०,११,३,७,५ भाव में स्थित हो, तो शादी होती है

किन्तु यदि चन्द्रमा को इन स्थानों में गुरु देखता हो, तो अतिशीघ्र विवाह होगा| २,४,७ तीनों में से कोई एक लग्न हो,

शुभ ग्रह लग्न में स्थित हो या शुभ ग्रह से दृष्ट हो, तो शीघ्र विवाह होगा| यदि लग्न पाप ग्रहों का हो, पाप ग्रह लग्न में हो, सप्तम भी पीड़ित हो, युत या दृष्ट से शत्रु ग्रही हो, तो विवाह नहीं होगा

अर्थात तत्काल शादी का योग नहीं है| विवाह योग यदि चन्द्रमा लग्न में हो, सप्तम में मंगल हो, षष्ट भाव व अष्टम भाव में पाप ग्रह हो तो ऐसे योग में विवाह असफल होता है|

यदि चन्द्रमा प्रश्न लग्न में ३,५,६,७,११ भाव में स्थित हो तथा गुरु, रवि, बुध से देखा जाता हो तब विवाह होता है|

प्रश्न लग्न में केंद्र स्थान १,४,७,१० तथा त्रिकोण स्थान ५,९ इन भावों शुभ ग्रह हो तो भी विवाह योग बनाता है|

वर एवं कन्या के विवाह का प्रश्न कन्या पक्ष :

प्रश्न कुण्डली में यदि चन्द्र व शुक्र विषम राशि में स्थित हो और दोनों ही विषम नवमांश में भी हो, तो शीघ्र ही कन्या को वर मिलता है|

वर पक्ष : यदि सम राशि में चन्द्र व शुक्र हो सम नवमांश में भी हो तो वर को शीघ्र ही कन्या मिलेगी| भाव फल जो-जो भाव अपने स्वामी से दृष्ट हो या शुभ ग्रहों से दृष्ट हों उस भाव की वृद्धि होती है, बाकी भाव में पाप ग्रह हो या पाप ग्रह से दृष्ट हो तो उस भाव का हानि होगा| प्रश्न कुण्डली तथा लग्न कुण्डली दोनों में इसका विचार करना चाहिए|

विवाह कब होगा इस प्रश्न का विचार करने के लिए द्वितीय, सप्तम, तथा एकादश भाव में कौन से ग्रह हैं इनको देखा जाता है

विवाह कब होगा इस प्रश्न का विचार करने के लिए द्वितीय, सप्तम, तथा एकादश भाव में कौन से ग्रह हैं इनको देखा जाता है

ज्योतिषशास्त्र की इस विधा में विवाह का विचार सप्तम भाव के साथ साथ द्वितीय और एकादश भाव से भी किया जाता है.

सप्तम भाव जीवनसाथी, संधि, और साझेदारी का घर होता है अत: विवाह के विषय में इस भाव से विचार किया जाता है.

भारतीय दर्शन में विवाह को सम्बन्ध में वृद्धि की दृष्टि से भी देखा जाता है अत: एकादश भाव से भी विचार किया जाता है.

इन भावों के नक्षत्र कौन कौन से हैं. इन भावों के स्वामी के नक्षत्र में स्थित ग्रह. इन भावो के स्वामी तथा इन भाव में स्थित ग्रह के मध्य दृष्टि और युति सम्बन्ध को भी देखा जाता है.

प्रश्न ज्योतिष में इन तथ्यों से विचार करते हुए सबसे अधिक नक्षत्रो को महत्व दिया जाता है. प्रश्न ज्योतिष में विवाह के लिए शुभ स्थिति

-विवाह का कारक स्त्री की कुण्डली मे गुरुऔर पुरूष की कुण्डली में शुक्र

प्रश्न ज्योतिष में विवाह का विचार करते समय पुरूष की कुण्डली में चन्द्र और शुक्र को देखा जाता है तो स्त्री की कुण्डली में सूर्य और मंगल को देखा है.

प्रश्न कुण्डली के कुछ सामान्य नियम हैं जिनके अनुसार चन्द्रमा जब तृतीय, पंचम, षष्टम, सप्तम और एकादश भाव में होता है और गुरू, सूर्य एवं बुध उसे देखता है तो विवाह की शुभ स्थिति बनती है.

अगर त्रिकोण स्थान पंचम और नवम तथा केन्द्र स्थान यानी प्रथम, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम भाव शुभ प्रभाव में हो तो विवाह जल्दी होने की संभावना बनती है.

लग्न में अगर कोई स्त्री ग्रह हो अथवा लग्न और नवम में स्त्री राशि हो तथा चन्द्र व शुक्र इन भावों में बैठकर एक दूसरे को देखते हों तब में घर विवाह का शुभ संयोग बनता है.

प्रश्न कुण्डली मे लग्न का स्वामी और चन्द्र अथवा शुक्र सप्तम में स्थित होता है और सप्तम भाव का स्वामी लग्न में आकर बैठता है तो शहनाई गूंजती है.

प्रश्न ज्योतिष के अनुसार इसी प्रकार का अयोजन तब भी होता है जब प्रश्न कुण्डली के लग्न में गुरू

और सातवे घर में बुध बैठा हो तथा चन्द्रमा अपने घर में हो, सूर्य दसवें घर में और शुक्र दूसरे घर में बैठा हो. अगर आप किसी से बहुत अधिक प्यार करते हैं और जानना चाहते है कि आपकी शादी उससे होगी या नहीं उस स्थिति में अगर प्रश्न कुण्डली में चन्द्रमा तृतीय, छठे, सातवें, दशवें अथवा ग्यारहवें घर में शुभ स्थिति में हो और सूर्य, बुध और गुरू उसे देख रहे हों तो शुभ संकेत समझना चाहिए.

अगर ऐसा नहीं हो तब प्रथम और सप्तम स्थान के स्वामी एवं प्रथम और द्वादश भाव के स्वामी को देखना चाहिए.

अगर इन दोनों भावों के स्वामी एक दूसरे के घर में स्थान परिवर्तन कर रहे हैं तब भी प्रेम विवाह की पूरी संभावना बनती है.

महाशिवरात्रि व्रत कब मनाया जाए, इसके लिए शास्त्रों के अनुसार निम्न नियम तय किए गए हैं —दिन के व्रतमें दिनव्यापिनी तिथियाँ ही व्रतादि कर्म करनेके लिये पवित्र मानी गयी हैं । इसी प्रकार रात्रि - व्रतोंमें तिथियोंके साथ रात्रिका संयोग बड़ा श्रेष्ठ माना गया है ।

महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। जिसे फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को देशभर में वृहद स्तर पर पूर्ण श्रद्घा के साथ मनाया जाता है।

भोेलेबाबा की आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले ये त्यौहार इस बार 13 फरवरी 2018, मंगलवार के दिन मनाया जायेगा । जिसके तहत भक्त पूजा-अर्चना, रूद्राभिषेक आैर

वैसे तो वर्ष भर में 12 शिवरात्रियां आती है लेकिन इन सभी में फाल्गुन माह की शिवरात्रि को सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता है। वैसे तो इस व्रत को कोई भी रख सकता है लेकिन महिलाएं और लड़कियां इस व्रत को बड़े शौक से रखती है। माना जाता है, इस व्रत के प्रभाव से कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है और जिन महिलाओं का विवाह हो चुका है उनके पति का जीवन और स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहता है।

ज्योतिषाचार्य गुरुदेव भुबनेश्वर शास्त्री ने बताया की

दिनके व्रतमें दिनव्यापिनी तिथियाँ ही व्रतादि कर्म करनेके लिये पवित्र मानी गयी हैं ।

इसी प्रकार रात्रि - व्रतोंमें तिथियोंके साथ रात्रिका संयोग बड़ा श्रेष्ठ माना गया है ।

महाशिवरात्रि व्रत कब मनाया जाए, इसके लिए शास्त्रों के अनुसार निम्न नियम तय किए गए हैं —

1.   चतुर्दशी पहले ही दिन निशीथव्यापिनी हो, तो उसी दिन महाशिवरात्रि मनाते हैं। रात्रि का आठवाँ मुहूर्त निशीथ काल कहलाता है। सरल शब्दों में कहें तो जब चतुर्दशी तिथि शुरू हो और रात का आठवाँ मुहूर्त चतुर्दशी तिथि में ही पड़ रहा हो, तो उसी दिन शिवरात्रि मनानी चाहिए।

2.   चतुर्दशी दूसरे दिन निशीथकाल के पहले हिस्से को छुए और पहले दिन पूरे निशीथ को व्याप्त करे, तो पहले दिन ही महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है।

3.   उपर्युक्त दो स्थितियों को छोड़कर बाक़ी हर स्थिति में व्रत अगले दिन ही किया जाता है।

इस दिन शिवरात्रि निशिता काल पूजा का समय 12:09+ से 01:01+ तक होगा।

मुहूर्त की अवधि कुल 51 मिनट की है।

14th तारीख, को महा शिवरात्रि पारण का समय 07:04 से 03:20 तक होगा।

रात्रि पहले प्रहर पूजा का टाइम = 06:05 से 09:20
रात के दूसरा प्रहर में पूजा का टाइम = 09:20 से 12 :35+
रात्रि तीसरा प्रहर पूजा का टाइम = 12:35+ से 03:49+
रात्रि चौथा प्रहर पूजा का टाइम = 03:49+ से सूर्य उदय तक

चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी 2018, मंगवलार 10:34 से प्रारंभ होगी जो 14फरवरी 2018, 00:46 बजे खत्म होगी।

इन राशियों के लिए कैसा

1.मेष राशि- इस महाशिवरात्रि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार आपके ग्रहों में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। जिसके कारण आपको अपनी लाइफ में कुछ विशेष परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। पुराने अटके हुए काम बनेंगे उधार दिया हुआ धन वापस मिलेगा पुराना कर्ज चुकाने में सफल होंगे भगवान शंकर की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी परिवारिक व्यापार में आपको अचानक भारी धन लाभ हो सकता है। आप जिस काम को भी मन लगाकर करेंगे सफलता आपके कदम चूमेगी हालांकि आपको परिवारिक विवाद से बच कर रहना है परिवार एक परिवार आपकी सफलता में अड़चन बन सकता है। महालक्ष्मी की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी परिवार में आपको अपनी मां का सहयोग सबसे अधिक मिलेगा। अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

2.कर्क राशि- इस महाशिवरात्रि आपको अपने जीवन में सफलता के नए अवसर प्राप्त होंगे आप अपनी किस्मत खुद बदलने की क्षमता रखते हैं। व्यापारिक दृष्टिकोण से आपको भारी लाभ होने की संभावना नजर आ रही है। आपको अपने व्यापार को और बढ़ाने के नए अवसर प्राप्त होंगे परिवार में सुख शांति हो पर आप ऐसा बना रहेगा आने वाले समय में आप को तेजी से प्रगति करने के लिए दोस्तों और परिवार के बड़े बुजुर्गों की मदद लेनी पड़ सकती है इस महाशिवरात्रि आपके ऊपर भगवान शंकर की दया दृष्टि बनी रहेगी। आपके ग्रहों के अनुसार आपको सत्ता शासन का भरपूर सहयोग मिलेगा। किसी पर भी आंखें बंद करके भरोसा करना आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है इसलिए किसी पर भी भरोसा करने से पहले सच्चाई के बारे में जांच पड़ताल जरूर कर लें महालक्ष्मी की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी।

3.सिंह राशि- बदलाव प्रकृति का नियम है। आपको अपने जीवन में नया बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस महाशिवरात्रि से आपका अच्छा समय शुरु हो रहा है। आप को नौकरी में प्रमोशन मिलने की संभावना नजर आ रही है। इसके साथ-साथ पुराने अटके हुए काम बनेंगे। इनकम के क्षेत्र में तेजी से बढ़ोतरी होगी जिससे आपके परिवार में खुशहाली का माहौल बना रहेगा। भगवान शंकर की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी। परिवार में आपको अपने भाई का सहयोग सबसे अधिक मिलेगा स्थानांतरण की संभावनाएं नजर आ रही है यात्रा आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकती है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें मां लक्ष्मी जी की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी साधनों में वृद्धि होगी।

4.तुला राशि- इस महाशिवरात्रि आपको अपने जीवन में कुछ विशेष परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। व्यापारिक दृष्टिकोण से आपको अचानक भारी धन लाभ होने की संभावना है। आपको अपने व्यापार को बढ़ाने के नए अवसर प्राप्त होंगे आपके व्यापार के कार्यक्षेत्र में तेजी से बढ़ोतरी होगी जिससे आप का लाभ भी बढ़ेगा। अगर आप नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। तो आपके लिए साल 2018 लाइफ चेंजिंग साबित हो सकता है। महालक्ष्मी की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी परिवार में सुख शांति का माहौल बना रहेगा। व्यापार में हद से ज्यादा किसी पर भी भरोसा करना आपके लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए खास तौर पर व्यापार में सावधान रहने की आवश्यकता है। भगवान शंकर की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी आप जो भी काम करेंगे आपको सफलता जरूर मिलेगी।

5.मीन राशि- इस महाशिवरात्रि आपकी भेंट किसी पुराने मित्र से हो सकती है। जो आपके बिजनेस को तेजी से बढ़ाने में आपकी मदद करेगा इसके साथ-साथ किसी खास मित्र के जीवन में आने से आपके जीवन की खुशियां भी बढ़ेंगी मां लक्ष्मी की दया दृष्टि आप पर बनी रहेगी परिवार में सभी का आपको भरपूर सहयोग मिलेगा टीम लीडर के तौर पर आपके लिए साल 2018 सबसे अच्छा रहेगा। आपके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता है जो आपको दूसरों से खास बनाती है। आने वाले समय में आपका यही सफलता का सबसे बड़ा हथियार बनेगा। किसी खास मित्र की तरफ से विश्वासघात मिलने की संभावना नजर आ रही है। इसलिए मित्रों के प्रति थोड़ा सावधान रहने की आवश्यकता है। हर किसी को मित्र बनाने से आपको नहीं मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। परिवार में सभी का भरपूर सहयोग मिलेगा।

गुरुदेव bhubneshwar
Kasturwa nagar
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