Thursday, 10 August 2017

महामृत्युंजय के अनुष्ठान एंव लधु रूद्र, महारूद्र तथा सामान्य रूद्राअभिषेक प्रायः होते ही रहते है, लेकिन विशेष कामनाओं के लिए शिर्वाचन का अपना अलग विशेष महत्व होता है। महारूद्र सदाशिव को प्रसन्न करने व अपनी सर्वकामना सिद्धि के लिए यहां पर पार्थिव पूजा का विधान है, जिसमें मिटटी के शिर्वाचन पुत्र प्राप्ति के लिए, श्याली चावल के शिर्वाचन व अखण्ड दीपदान की तपस्या होती है। शत्रुनाश व व्याधिनाश हेतु नमक के शिर्वाचन, रोग नाश हेतु गाय के गोबर के शिर्वाचन, दस विधि लक्ष्मी प्राप्ति हेतु मक्खन के शिर्वाचन अन्य कई प्रकार के शिवलिंग बनाकर उनमें प्राण-प्रतिष्ठा कर विधि-विधान द्वारा विशेष पुराणोक्त व वेदोक्त विधि से पूज्य होती रहती है।

महामृत्युंजय के अनुष्ठान एंव लधु रूद्र, महारूद्र तथा सामान्य रूद्राअभिषेक प्रायः होते ही रहते है, लेकिन विशेष कामनाओं के लिए शिर्वाचन का अपन...

【१】लड्डू गोपाल को खीर का भोग लगायें खीर का भोग लगाने से आपको मकान और धन की प्राप्ति हो सकती है। 【२】 दही-मक्खन का भोग दही मक्खन का भोग लगाने से आप हमेशा निरोगी और स्वस्थ रहेंगे। 【३】 देशी घी का भोग देशी घी से पूजा करने से सुख, शांति, समृद्दि प्राप्त होगी। 【४】लड्डू झूले वाले कान्हा जी को मक्खन और लड्डू खिलाने से संतान सुख मिलता है। मिश्री का भोग मिश्री का भोग लगाने से अच्छी नौकरी मिलेगी। 【५】बर्फी का भोग लगायें बर्फी का भोग लगाने से सारे कर्जे माफ हो जायेंगे। 【६】इलायची वाले दूध का भोग इलायची वाले दूध का भोग लगाने से समृद्धि हासिल होती है। राधा-कृष्ण की पूजा राधा-कृष्ण की पूजा करने से शादी जल्दी और मनचाही होती है।

हिंदू पर्वों के निर्णय हेतु कौन-कौन से शास्त्र प्रामाणिक हैं निष्कर्ष यह है कि विद्यमान देश, काल और परिस्थिति में विषयान्तर्गत प्रामाणिकता क...

विश्लेषण =रोहिणी नक्षत्र के बिना जन्माष्टमी * वैष्णव कृष्ण जन्माष्टमी १५/अगस्त/२०१७ को वैष्णव जन्माष्टमी के लिये अगले दिन का पारण समय = ०५:५४ (सूर्योदय के बाद) पारण के दिन अष्टमी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी रोहिणी नक्षत्र के बिना जन्माष्टमी दही हाण्डी - १५th, अगस्त को अष्टमी तिथि प्रारम्भ = १४/अगस्त/२०१७ को १९:४५ बजे यानी अष्टमी तिथि प्रारम्भ १४अगस्त /२०१७को शाम 0७:४५से अष्टमी तिथि समाप्त = १५/अगस्त/२०१७ को १७:३९ बजे यानिअष्टमीतिथि समाप्त =१५अगस्त/२0१७को५:३९ बजे तक ===विश्लेषण

भगवान श्रीकृष्ण का ५२४४वाँ जन्मोत्सव निशिता पूजा का समय = २४:०३+ से २४:४७+ यानी  रात्र 12:बजकर ३ मिनिट से 12  बजकर ४७ तक अवधि = ० घण्टे ४...