Tuesday, 30 May 2017

ज्योतिष शास्त्र में संतान योगों पर विचार ​गर्भ सम्भावना रविंदुशुक्रावनिजैः स्वभागगैः गुरौ त्रिकोणोदयसंस्थितेपि वा| भवत्यपत्यम् हि विबीजिमामिमे करा हिमांशोर्वीदृशामिवाफलाः - जातक पारिजात प्रश्न कुण्डली में सूर्य, शुक्र, चन्द्रमा और मंगल यदि अपने अपने नवमांश में स्थित हो अथवा वृहस्पति, लग्न या त्रिकोण (5/9) भावों में स्थित हो तो गर्भ सम्भव होता है| ये योग नपुंसक व्यक्ति के विषय में अन्धों के लिए चन्द्र रश्मि की शोभा के समान निष्फल होता है| चन्द्रमा और वृहस्पति यदि पापग्रह्युक्त हो और गुरु लग्न को न देखे चन्द्रमा क्षीण हो तो पर पुरुष द्धारा गर्भ होता है|

ज्योतिष शास्त्र में संतान योगों पर विचार ​गर्भ सम्भावना रविंदुशुक्रावनिजैः स्वभागगैः गुरौ त्रिकोणोदयसंस्थितेपि वा| भवत्यपत्यम् हि विबीजिमाम...

ज्योतिष और यौन सुख : ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शुक्र ग्रह की अनुकूलता से व्यक्ति भौतिक सुख पाता है। जिनमें घर, वाहन सुख आदि समिल्लित है। इसके अलावा शुक्र यौन अंगों और वीर्य का कारक भी माना जाता है। शुक्र सुख, उपभोग, विलास और सुंदरता के प्रति आकर्षण पैदा करता है। विवाह के बाद कुछ समय तो गृहस्थी की गाड़ी बढिय़ा चलती रहती है किंतु कुछ समय के बाद ही पति पत्नि में कलह झगडे, अनबन शुरू होकर जीवन नारकीय बन जाता है. इन स्थितियों के लिये भी जन्मकुंडली में मौजूद कुछ योगायोग जिम्मेदार होते हैं. अत: विवाह तय करने के पहले कुंडली मिलान के समय ही इन योगायोगों पर अवश्य ही दॄष्टिपात कर लेना चाहिये. सातवें भाव में खुद सप्तमेश स्वग्रही हो एवं उसके साथ किसी पाप ग्रह की युति अथवा दॄष्टि भी नही होनी चाहिये.

ज्योतिष और यौन सुख : ज्योतिष विज्ञान के अनुसार शुक्र ग्रह की अनुकूलता से व्यक्ति भौतिक सुख पाता है। जिनमें घर, वाहन सुख आदि समिल्लित है। इ...