ज्योतिष समाधान

Friday, 2 January 2026

नदियां कब रजस्वला होती है

*** नदियाँ भी रजस्वला होती हैं ***
*💐-- जब सूर्य देवता कर्क और सिंह राशि पर होते हैं तब नदियाँ रजस्वला होती हैं।यह मूल वचन महर्षि अत्रि का है --- 
सिंह कर्कटयोर्मध्ये सर्वा नद्यो रजस्वला ।
तासु स्नानं न कुर्वीत वर्जयित्वा समुद्रगा: ।।
महर्षि अत्रि के इस वचन को अन्य सभी ऋषियों ने सही कहा है। जहाँ भी किसी भी जाति में स्त्री है वह कभी न कभी रजस्वला अवश्य होती है।
*💐--- आठ हजार धनुः माप ( प्रायः आठ किलोमीटर)
तक बहने वाली को गर्त्त कहते हैं नदी नहीं।नदी वह होती हैजो स्वतःबहती हुई समुद्रमें चली जाती हो। समुद्रगामिनी धारा नदी की होती है।
*💐--- ग्रहण स्नान , उपाकर्म ( श्रावणी ), प्रेत कर्म का स्नान रजस्वला नदियों में भी किया जाता है---
चंद्रसूर्यग्रहे चैव रजो दोषो न विद्यते।
*💐--- गंगा जल के संपर्क मात्रा से अन्य जल पवित्र हो जाते हैं---
गंगाम्भसा समायोगाद् दुष्टमप्यम्बुपावनम्म ।।
*💐--- पावन नदियाँ--- भारत में ग्यारह नदियों को पवित्र माना गया है। ये हैं-- गंगा, महानदी , तापी , कृष्णा,
वेणी , गोदावरी , तुंगभद्रा,ताम्रपर्णी , कावेरी ,रेवा (नर्मदा)
और गोमती।
महर्षिदेवल के अनुसार गंगा के साथ यमुना और सरस्वती को भी पवित्र माना गया है।महर्षि देवल इन नदियोंके जल
को सदा पवित्र मानते हैं। साथ ही वे यह भी कहते हैंकि --
नद कभी भी अपवित्र नहीं होते हैं।नदों में --- सिंधु ,शोण , ब्रह्मपुत्र का जल कभी भी अपवित्र नहीं होता।
*💐---- नदी तीर वासियों को नदी का दोष नहीं लगता --
न तु तत्तीर वासीनाम्। महर्षि व्याघ्रपाद कहते हैं --
रजो दुष्टेsपि पयसि ग्रामभोगो न दुष्यति।
कर्मनाशा और वैतरणी के तट पर रह कर तपस्वी जीवन व्यतीत करने वाले को नदी का दोष नहीं लगता।यद्यपि कूप,तड़ाग और वापि का जल हो तो उस नदी का जल नहीं लेना चाहिए।